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नागपुर में दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त बच्ची का जन्म, त्वचा न के बराबर

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 June 2016, 19:42 IST

महाराष्ट्र के नागपुर में एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से ग्रस्त बच्ची ने जन्म लिया है. शनिवार को नागपुर के एक हॉस्पिटल में “हर्लीक्वीन इचथियसिस” नाम की दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त बच्ची का जन्म हुआ है. इस अल्पविकसित नवजात के शरीर पर बाहरी त्वचा न के बराबर है.

डॉक्टर्स के अनुसार, इस नेत्रहीन बच्ची के जीवित रहने की गुंजाइश बेहद कम है. शिशु विशेषज्ञ डॉ. यशा बनैट का कहना है कि यह देश का पहला हर्लीक्वीन बेबी है.

भारत में इस तरह का पहला केस

जानकारी के मुताबिक नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में शुक्रवार को देर रात 12.30 पर एक महिला ने इस बच्ची को जन्म दिया. डिलीवरी कराने वाले डॉक्टरों की टीम में डॉ. यश बनैत, डॉ. प्राची दीक्षित, डॉ. मीनाक्षी और डॉ. नीलोफर मजावर शामिल थे.

डॉ. अविनाश बनैत ने बताया, बच्ची का जन्म एक पैदाइशी विकृति के साथ हुआ और ऐसा जीन में परिवर्तन के कारण होता है. 

डॉ. अविनाश के मुताबिक, इस तरह की बच्ची पूरी दुनिया में अब तक दो ही जगह पैदा हुई है. एक जर्मनी और दूसरी पाकिस्तान में. भारत में जन्मी इस तरह की भारत की पहली और दुनिया की तीसरी बच्ची है.

डॉ. बनैत ने कहा कि हैरेलक्विन इचथियसिस एक बेहद दुर्लभ गंभीर किस्म का अनुवांशिक त्वचा रोग है, जिसके कारण बाहरी त्वचा की सबसे बाहरी परत यानी ‘स्ट्रेटम कॉर्नियम’ मोटी हो जाती है.

ऐसे मामलों में बच्चे का पूरा बदन त्वचा की मोटी सफेद प्लेटों में बंट जाती है. जिसमें कई गहरी दरारें होती हैं. शरीर की चमड़ी ‘कवच’ का रुप ले लेती है. इसके अलावा, आंखें, कान, गुप्तांग और बाहरी हिस्से असामान्य तौर पर सिकुड़ जाते हैं.

 डॉक्टर का कहना है कि फिलहाल बच्ची की हालत अभी ठीक है और उसे आइसीयू में रखा गया है.

First published: 13 June 2016, 19:42 IST
 
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