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हरियाणा: कटघरे में खट्टर सरकार- 'कैसे खाओगे उनके हाथ की रोटियां जब पैदा ही नहीं होने दोगे बेटियां'

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 May 2018, 14:46 IST

'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' कैंपेन देश में भ्रूण हत्या रोकने और लड़कियों को उचित शिक्षा देने के लिए चलाया गया. लेकिन अब इस कैंपेन पर कहीं न कहीं पुरुषवादी मानसिकता की झलक नजर आती है. एक तरफ जहां बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ' जैसे कैम्पेन चलाये जा रहे हैं वही दूसरी तरफ देश में लड़कियों, महिलाओं की सुरक्षा अब भी कठघरे में हैं.

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कैम्पेन को लेकर हरियाणा से एक मामला सामने आया है. हरियाणा सरकार ने 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का ऐसा विज्ञापन निकाला है जिसे देख कर लगता है कि बेटियों का काम घर के काम-काज करना और रोटी बनाना ही है. हरियाणा सरकार के कथित विज्ञापन की एक तस्वीर सामने आई है जो कि सोशल मीडिया पर भी काफी शेयर की जा रही है.

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दीवार पर बनाये गए इस विज्ञापन पर लिखा गया है, ''कैसे खाओगे उनके हाथ की रोटियां जब पैदा ही नहीं होने दोगे बेटियां.' विज्ञापन में जो चित्र बना हुआ है उसमें एक लड़की को रोटी बनाते हुए दिखाया गया है. विज्ञापन की तस्वीर में ये साफ नहीं हो पाया है कि एजेंसी ने लगाई है.

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इस तस्वीर को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी ने ट्वीट किया. फोटो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, ''यही है हरियाणा का 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' मॉडल. हमें इसी पितृसत्तात्मक विचारधारा और मानसिकता से लड़ना है.''

उन्होंने अपने ट्वीट में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को भी टैग किया. उनके ट्वीट को कई सोशल मीडिया यूजर्स ने शेयर किया है.

First published: 30 May 2018, 14:46 IST
 
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