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#JatReservation: हरियाणा में हालात बेकाबू, दंगाइयों को गोली मारने का आदेश

राजीव खन्ना | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • आरक्षण की मांग को लेकर शुरू हुआ हरियाणा के जाटों का आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है. रोहतक शहर में तीन लोगों की मौत हो गई है. हालात पर काबू पाने के लिए सेना बुलाई गई है.
  • ताजा खबरोंं के मुताबिक रोहतक और भिवानी में कर्फ्यू लगा दिया गया है. 9 जिलों में सेना तैनात की गई है. अब तक 550 के करीब ट्रेने निरस्त हो चुकी है.
  • अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में रोहतक, झज्जर, सोनीपत, पानीपत, जींद, भिवानी, हिसार औऱ करनाल आदि जिले हैं.
  • केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक सुरक्षा बलों की 20 अतिरिक्त टुकड़ियां भी भेजी हैं. हरियाणा के ज्यादातर जिलों में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है.
  • आंदोलनकारियों ने मुनक नहर का गेट बंद कर दिया है. इसके चलते दिल्ली में पानी की किल्लत बढ़ सकती है.
  • इससे पहले आदोलनकारियोंं ने शुक्रवार को रोहतक के आईजी के आवास में आगजनी कि और भाजपा नेता कैप्टन अभिमन्यू के घर पर हमला किया.
  • गौरतलब है कि 2015 में सुप्रीम कोर्ट यूपीए सरकार के एक फैसले को खारिज कर चुकी है जिसमें उन्होंने जाटोंं को सरकारी नौकरियों में ओबीसी के तहत आरक्षण दिए जाने का फैसला लिया था.

शुक्रवार को हरियाणा में आरक्षण की मांग को लेकर चल रहा जाटों का आंदोलन हिंसक हो गया. इसके राज्य के नौ जिलों में सेना बुला ली गयी है. रोहतक तथा भिवानी में कर्फ्यू लगाने के साथ ही हिंसा भड़काने वालों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिया गया है.

भीड़ द्वारा की गई हिंसा में अब तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुल तीन लोगों की मौत होने की खबर है और 25 अन्य घायल हो गए. केंद्र सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक हजार अर्धसैनिक बलों को हरियाणा रवाना कर दिया है.

रोहतक में हिंसक भीड़ ने कुछ पुलिसकर्मियों को बंधक बनाने के साथ ही राज्य के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर में आग लगा दी और रोहतक, झज्जर, हांसी तथा कई अन्य जगहों पर कई सरकारी और निजी संपत्तियों को को भी आग के हवाले कर दिया.

हरियाणा की बीजेपी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस समस्या से निपटने की है क्योंकि 2015 में सुप्रीम कोर्ट यूपीए सरकार के उस फैसले को खारिज कर चुका है जिसमें उन्होंने सरकारी नौकरियों में ओबीसी को आरक्षण दिए जाने का फैसला लिया था. बीजेपी सरकार अभी तक जाट नेतृत्व को समझाने-बुझाने में लगी थी लेकिन यह रणनीति अब विफल हो चुकी है.

बीजेपी के जाट नेता कुछ दिनों पहले हिसार में रेलवे ट्रैक पर धरने पर बैठे जाट नेताओं को समझाने में सफल रहे थे. हालांकि जाटों का अन्य समूह इस दौरान रोहतक और भिवानी में रेलवे ट्रैक और सड़क पर धरने पर बैठा रहा जिससे लोगों को जबर्दस्त परेशानियों का सामना करना पड़ा. 

उत्तर प्रदेश के ऑल इंडिया जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रेसिडेंट यशपाल मलिक ने यह कहकर सरकार की मुसीबतों को और अधिक बढ़ा दिया है कि जाट आंदोलन को उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में भी बढ़ाया जाएगा. विरोध प्रदर्शन और ट्रैफिक जाम की वजह से रोहतक और भिवानी में आम लोगों को जबरदस्त परेशानियों का सामना करना पड़ा.

विधानसभा की 90 सीटों में से 30 पर जाट और जाट सिक्ख का कब्जा है

खबरों के मुताबिक जाम और विरोध प्रदर्शनों की वजह से रोहतक में ईंधन की समस्या उत्पन्न हो गई है. इसके अलावा रोजाना की जरूरतों के सामानों की आपूर्ति में भी बाधा आ रही है. इतना ही नहीं बसों के आवागमन पर भी उल्टा असर हुआ है और महर्षि दयानंद युनिवर्सिटी में भी क्लासेज नहीं लग पा रही हैं.

पानीपत, हिसार, जींद, भिवानी, रोहतक, सोनीपत, झज्जर और कुरुक्षेत्र जिलोंं में सरकार ने हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को बंद कर दिया है.

राज्य की कुल आबादी में करीब 26 फीसदी जाट हैं. विधानसभा की 90 सीटों में से 30 पर जाट और जाट सिक्खों का कब्जा है. मलिक ने कैच न्यूज को बताया, 'जातिवादी मानसिकता के लोग मीडिया में यह अफवाह फैला रहे हैं कि जाट समृद्ध और धनी हैं. मंडल और केसी गुप्ता आयोग समेत चार आयोगों ने यह माना है कि जाट सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हैं. हम ओबीसी के तहत आरक्षण मांग रहे हैं जहां क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू है. हम अन्य राज्यों में अपनी दायरा बढ़ाएंगे जब तक कि हमारी मांगों को पूरा नहीं कर लिया जाता है.'

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बुधवार को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में कोटा को बढ़ाए जाने का फैसला लिया जिसमें जनरल क्लास कैटेगरी के तहत ईबीसी को लाभ मिलेगा और इस श्रेणी में जाट समेत अन्य चार जातियां भी शामिल हैं. 

यूपीए सरकार ने जाटों को ओबीसी के तहत रखे जाने की अधिसूचना जारी की थी

सरकार का फैसला कोटा को 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करने का है. उन्होंने एक समिति बनाए जाने की भी घोषणा की है जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव के हाथों में होगी और यह समिति स्पेशल बैकवॉर्ड क्लासेज के लिए आरक्षण के हर पहलुओं पर विचार करेगी. समिति अगले बजट सत्र के पहले अपना रिपोर्ट सौंप देगी. लेकिन जाट नेतृत्व फिलहाल इंतजार करने के मूड में कतई नहीं है.

यूपीए सरकार ने जाटों को ओबीसी के तहत रखे जाने की अधिसूचना जारी की थी. सरकार ने एनसीबीसी की सिफारिशों को नजरअंदाज करते हुए यह फैसला लिया था. यूपीए सरकार ने यह फैसला मार्च 2014 में लिया था जब लोकसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने बचे थे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, भारतपुर और धौलपुर, उत्तर प्रदेश एंव उत्तराखंड के जाटों को ओबीसी की सूची से बाहर कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जाट आंदोलन को एक और बड़ा झटका तब लगा जब जुलाई 2015 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भूपिंदर सिंह हुडा की सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें जाटों, जाट सिक्खों, बिश्नोई, रोर और त्यागियों को एसबीसी कैटेगरी के तहत 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने का फैसला लिया था.

सात जिलोंं में सरकार ने हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए इंटरनेट और एसएमएस सेवाओं को बंद कर दिया है

हरियाणा में पहले से ही नौकरियों में एससी को 20 फीसदी और पिछड़ी जातियों को 27 फीसदी आरक्षण दिया गया है. पांच जातियों को अतिरिक्त 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने से आरक्षण का दायरा बढ़कर 57 फीसदी हो जाता. इसके बाद ईबीसी को भी 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने की सिफारिश की गई थी और कुल मिलाकर आरक्षण की सीमा 67 फीसदी हो जाती.

खट्टर खुद गैर जाट जाति से आते हैं और राज्य में गैर जाट मुख्यमंत्री कम ही हुए हैं. सच्चाई यह भी है कि हरियाणा मेें बीजेपी जाटों के वर्चस्व वाले इलाकों में अपनी दखल नहीं बना पाई है. यह अभी भी कांग्रेस और इनेलोद का गढ़ बना हुआ है. दोनों दलों ने बीजेपी पर जाटों के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है. 

जाट आंदोलन का दूसरे समुदायों पर भी असर होता है. जाट सिक्ख और रोर ने भी सरकार पर एसबीसी कैटेगरी में शामिल किए जाने को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. रोर समुदाय के नेता 24 और 25 फरवरी को जाट सिक्ख, त्यागी और बिश्नोई समुदाय के नेताओं से मुलाकात करेंगे ताकि इस मामले में आगे की रणनीति बनाई जा सके. इनकी योजना एक को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाने की है ताकि समग्र तरीके  से आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सके. 

अगर जाट आंदोलन दूसरे इलाकों में फैलता है तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में इसका असर बड़ा होगा जहां अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं.

First published: 20 February 2016, 9:05 IST
 
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