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हरियाणा: सुशासन सहायक के नाम पर आरएसएस के लोगों की भर्ती

राजीव खन्ना | Updated on: 22 July 2016, 7:40 IST
QUICK PILL
  • हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हर जिले में सुशासन सहायकों की नियुक्ति को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर हैं.
  • खट्टर सरकार पर इन सुशासन सहायकों की आड़ में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के कार्यकर्ताओं को भर्ती करने और राज्य प्रशासन को इनके हाथों में सौंपने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हर जिले में सुशासन सहायकों की नियुक्ति को लेकर विपक्षी दलों के निशाने पर हैं. खट्टर सरकार पर इन सुशासन सहायकों की आड़ में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के कार्यकर्ताओं को भर्ती करने और राज्य प्रशासन को इनके हाथों में सौंपने के आरोप लगाए जा रहे हैं. तमाम विपक्षी दलों का कहना है कि खट्टर सरकार आरएसएस के लोगों को नौकरशाहों से ऊपर बिठाकर उन्हें निगरानीकर्ता बनाने जा रही है.

आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल में हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री सुशासन सहयोग कार्यक्रम की घोषणा की थी. इसके तहत कहा गया था कि राज्य के सभी 21 जिलों में एक साल के लिए सुशासन सहयोगी के तौर पर कुछ युवाओं की भर्ती की जाएगी. यह भी कहा गया था कि ये सहयोगी जिले के शीर्ष अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे और सरकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री कार्यालय से आने वाले आदेशों के पालन में मदद करेंगे.

इसके अलावा इन सहायकों को जिले की तमाम समस्याओं के समाधान भी बताने हैं, जो जिले से लेकर राज्य स्तर पर भी लागू हो सकते हैं. इन सहयोगियों का अपने इलाके के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगातार संपर्क बना रहेगा और ये अपने इलाके में नियमित रूप से कार्यक्रम और वर्कशॉप भी आयोजित करेंगे.

इस कार्यक्रम की घोषणा के दौरान सरकार ने कहा था कि सुशासन सहायकों की उम्र 30 साल से कम होगी और वे कम से कम स्नातक पास होंगे. इस कार्य्रकम के लिए अशोक विश्वविद्यालय को मुख्यमंत्री कार्यालय का नॉलेज पार्टनर चुना गया था.

राज्य के सभी 21 जिलों में एक साल के लिए सुशासन सहयोगी के तौर पर कुछ युवाओं की भर्ती की जाएगी

हाल ही में सरकार की ओर से जैसे ही सुशासन सहयोगियों को चुना जाने लगा, विपक्षी दलों को दाल में काला नजर आने लगा. सीपीएम ने इस कार्यक्रम को रद्द करने की मांग की है और कहा है कि सुशासन सहायक मुख्यमंत्री के चुनिंदा लोग होंगे, जिनको राज्य के खजाने में से हर महीने 50 हजार रुपये दिए जाएंगे. राज्य में पार्टी के वरिष्ठ नेता इंद्रजीत ने कहा है, 'यह असंवैधानिक पद है. इस बात में कोई शक नहीं है कि वे आरएसएस के पदाधिकारी होंगे. यह कुछ और नहीं, बस राज्य प्रशासन का नियंत्रण आरएसएस के हाथों में देने की कवायद है.'

कांग्रेसी नेता और पूर्व सीएम भूपेंदर सिंह हुड्डा ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर तगड़ा हमला किया है. उन्होंने इसे प्रशासनिक नजरिए से असंवैधानिक होने के साथ ही दुर्भाग्यपूर्ण भी बताया. उन्होंने कहा है, 'यह हरियाणा के 2.5 करोड़ लोगों और राज्य की पूरी प्रशासनिक मशीनरी का अपमान है. क्या यह अपने आप में विचित्र नहीं है कि सुशासन सहायक प्रशासनिक मामलों में दखलअंदाजी करेंगे जबकि उनकी इन मामलों में कोई जिम्मेदारी तय नहीं होगी.'

हुड्डा ने आगे कहा कि पहले ही आरएसएस के दखल से राज्य के अधिकारियों का मनोबल काफी नीचे पहुंच गया है और वे विकल्प तलाश रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सुशासन सहयोगियों की भर्ती नागपुर (आरएसएस मुख्यालय) के आदेशों पर और आरएसएस के आशीर्वाद से हो रही है.

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने भी इन नियुक्तियों को लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ करार दिया है. वरिष्ठ इनेलो नेता अशोक अरोड़ा ने सुशासन सहयोगियों को 'सुपर डिप्टी कमिश्नर' और 'सुपर एमएलए' कहा है. उन्होंने खट्टर प्रशासन की कई विश्वविद्यालयों में कुलपति, लोकायुक्त कार्यालय और पंजाबी अकादमी में कई अहम पदों पर हरियाणा के बाहर के लोगों को लाने पर भी आलोचना की है.

उन्होंने मुख्यमंत्री खट्टर आरोप लगाया कि पिछले हफ्ते ही उन्होंने पिछले विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी के हारे हुए नेताओं से कहा है कि वे निराश न हों और खुद को अपने इलाके का विधायक मानें. उन्होंने उन्हें आश्वासन भी दिया कि विकास कार्य उनकी इच्छा के हिसाब से ही होंगे.

अरोड़ा ने कहा, 'खट्टर सरकार लोकतांत्रिक और पारदर्शी ढंग से काम नहीं कर रही है.' उन्होंने आगे कहा कि एक ओर तो मुख्यमंत्री 'सबका साथ, सबका विकास' जैसे नारे देते हैं और दूसरी ओर दूसरी पार्टियों के विधायकों को नजरअंदाज करते हैं और इस तरह से वह दूसरी पार्टियों के विधायकों और लोकतांत्रिक मूल्यों दोनों को शर्मशार कर रहे हैं.

सुशासन सहायकों का मामला 19 अगस्त से होने वाले आगामी विधानसभा सत्र में मुख्य मुद्दा बन सकता है. इस मामले को लेकर विपक्षी दल सरकार को घेर सकते हैं. विधानसभा सत्र शुरू होने तक इस मामले के शांत पड़ने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं.

First published: 22 July 2016, 7:40 IST
 
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