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सेल्फी विद डॉटर: बेटियों के लिए एक अनोखा ऑनलाइन म्यूजियम

श्रिया मोहन | Updated on: 23 June 2016, 7:40 IST
(सुनील जगलान)

हरियाणा में पितृसत्ता को चुनौती देता हुआ एक ऑनलाइन संग्रहालय तैयार किया गया है. इसका नाम 'सेल्फी विथ डॉटर्स' है. इस संग्रहालय के पीछे हैं हरियाणा के बीबीपुर गांव के सरपंच सुनील जगलान. हरियाणा में लैंगिक अनुपात देश में सबसे कम है. 

जगलान अपने #सेल्फीविथडॉटर कैंपेन को लेकर पहली बार चर्चा में आए थे. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में भी उनका जिक्र किया था. उसके बाद जगलान के व्हाट्सऐप पर सेल्फी विथ डॉटर की बाढ़ सी आ गई. देश ही नहीं विदेश से भी उनके पास ऐसी सेल्फी आने लगीं.

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जगलान ने कैच से बातचीत में कहा, "पहले मैं इन तस्वीरों का सचमुच का संग्रहालय बनाना चाहता था. लेकिन वो बहुत खर्चीला होता इसलिए मैंने उसे ऑनलाइन बनाने की सोची ताकि लोग इसमें नई तस्वीरें जोड़ते भी रहें."

सेल्फी म्यूजियम का उद्घाटन नौ जून को हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने किया. इस मौके पर मंत्री ने अपनी भतीजी के साथ सेल्फी खींच कर वेबसाइट पर पोस्ट किया. वेबसाइट के ऑनलाइन होने के चंद घंटों के अंदर इसपर 13 हजार से अधिक विजिटर्स आए. दो हफ्तों में 60 हजार से अधिक लोग इसपर आ चुके थे. इस दौरान वेबसाइट पर 1200 नई सेल्फी पोस्ट की जा चुकी हैं.

बेटी के जन्म की खुशी

2012 में जगलान और उनकी पत्नी को बेटी हुई. 30 वर्ष की उम्र में पिता बने जगलान ने बेटी के जन्म पर जब उन्होंने अस्पताल वालों को मिठाई और बख्शीश बांटना चाहा तो उन्होंने इन्हें लेने से इनकार कर दिया. जगलान उनके इस रवैये पर हैरान रह गए. बाद में उन सबकी चुप्पियों से उन्हें याद आया कि हरियाणा में आम तौर पर केवल बेटे के जन्म पर खुशी मनाई जाती है. जगलान कहते हैं, "उस समय तक मुझे लैंगिक अनुपात का मतलब नहीं पता था."

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अब जगलान राज्य में लैंगिक अनुपात से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में प्रति 1000 लड़कों पर 834 लड़कियां थीं. देश में ये अनुपात सबसे कम है.

2013 में जगलान ने 'बहू दो वोट लो' कार्यक्रम शुरू किया. हरियाणा में लड़कियों की कम होती संख्या के चलते कई नौजवानों को ब्याह के लिए लड़की नहीं मिलती. जगलान इस कार्यक्रम के माध्यम से सभी राजनीतिक दलों को एक संदेश देना चाहते थे.

उनके कार्यक्रम के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों असहज हो गए थे. इसके बाद जगलान स्थानीय जनता में काफी लोकप्रिय हो गए.

दस लाख

इस समय जगलान की उम्र 34 साल है और उन्होंने लैंगिक असमानता दूर करने के लिए डिजिटल तकनीकी का पूरी सफलता से इस्तेमाल कर रहे हैं. अपने इस प्रयास के कारण वो मीडिया के चहेते बन चुके हैं.

लेकिन ये सवाल ये भी है कि बेटियो के संग सेल्फी खींचने से क्या उन परिवारों तक भी संदेश जाता है जो सेल्फी नहीं खींच रहे हैं?

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जगलान कहते हैं, "हमने 2013 में एक अध्ययन किया जिसमें हमने पाया कि अनपढ़ और गरीब तबका बेटियों की भ्रूणहत्या नहीं करता. जन्म से पहले भ्रूण परीक्षण और फिर भ्रूण हत्या कराने में कम से कम 10 हजार रुपये लगते हैं. गरीब तबका इसका बोझ नहीं उठा सकता. इसलिए वो बेटे की उम्मीद में कई बच्चे पैदा कर लेते हैं. कन्या भ्रूणहत्या कराने वाले परिवार आर्थिक रूप से संपन्न होते हैं." 

जगलान को इस बात क अहसास है कि उनका सेल्फी कैंपेन शिक्षित और संपन्न तबके तक पहुंच रहा है. 

कुछ चर्चित हस्तियों ने भी लड़कियों के संग सेल्फी खींच कर इस वेबसाइट पर पोस्ट की है. इनमें कैलाश सत्यार्थी, साइना नेहवाल, स्मृति ईरानी, खली समेत कई अन्य नेता जैसे लोग शामिल हैं. 

लोगों की प्रतिक्रिया से उत्साहित और प्रसन्न जगलान कहते हैं, "इस वेबसाइट पर दस लाख सेल्फी डाली जा सकती है."

First published: 23 June 2016, 7:40 IST
 
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