Home » इंडिया » Has AgustaScam given VK Singh a chance to get back at CAG Sharma?
 

अगस्ता घोटाला: क्या वीके सिंह कैग प्रमुख शर्मा से हिसाब चुकता कर रहे हैं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 May 2016, 19:23 IST

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले पर विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह और ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) शशिकांत शर्मा में एक बार फिर टकराव की स्थिति बनती दिख रही है. चार साल पहले जब वीके सिंह थल सेना प्रमुख थे तब उनकी दो जन्मतिथियों को लेकर यूपीए सरकार से उनका टकराव हो चुका है. उस समय शशिकांत शर्मा रक्षा सचिव थे.

जन्मतिथि विवाद के केस में जनरल वीके सिंह को सुप्रीम कोर्ट में हारना पड़ा था. हालांकि, अब अगस्ता मामले में यूपीए सरकार से जुड़े कई लोग घिरते दिख रहे हैं और वीके सिंह के पास अब शर्मा से हिसाब चुकाने का मौका है.

अगस्ता मामले में कैग प्रमुख शर्मा का भी नाम सामने आ रहा है. वीके सिंह ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'अगर उनका नाम सामने आया होता तो वो सबसे पहले अपने पद से इस्तीफा देते और जांच में शामिल होते.' सिंह ने कहा कि शशिकांत शर्मा को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए और जांच में शामिल होना चाहिए.

अगस्ता वेस्टलैंड: श्रवण गुप्ता से मॉरिशस फंड और कनिष्क सिंह के बारे में पूछताछ

यूपीए सरकार ने मई, 2013 में शशिकांत शर्मा को कैग नियुक्त किया गया था. उनकी नियुक्ति के खिलाफ वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल किया. शर्मा के खिलाफ याचिका में कहा गया है कि रक्षा सचिव और डीजी (अधिग्रहण) के पद पर रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को मंजूरी दी है. सूत्रों के अनुसार इनमें कुछ सौदे भविष्य में जांच का विषय बन सकते हैं.

इस याचिका में 3500 करोड़ रुपये में होने वाले 12 वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों के सौदे मसला भी उठाया गया है. इटली के जांच अधिकारियों के अनुसार इस सौदे में 350 करोड़ रुपये दलाली दी गई है.

अगस्ता वेस्टलैंड: सिंघवी ने बिखेरा सरकार का शिराजा

शशिकांत शर्मा के रक्षा मंत्रालय में डीजी (अधिग्रहण) के पद पर रहने के दौरान रूस से विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव के सौदे पर अंतिम मुहर लगी थी. भारतीय नौसेना में शामिल होने के बाद अब इसका नाम आईएनएस विक्रमादित्य है. इस विमानवाहक पोत को अगस्त, 2008 में भारत कौ सौंपा जाना था. उस समय सौदे की कीमत 94.70 करोड़ डॉलर थी. भारत को यह विमानवाहक पोत 2013 में मिला और उस समय सौदे की कीमत बढ़कर 2.3 अरब डॉलर हो गई थी.

याचिका के अनुसार टाट्रा ट्रक डील को भी शर्मा ने ही मंजूरी दी थी. इस मामले में वीके सिंह ने सेना के लिए खराब गुणवत्ता वाले टाट्रा ट्रकों की खरीद की मंजूरी देने के लिए रिश्वत की पेशकश करने का आरोप लगाया था.

अगस्ता वेस्टलैंडः भाजपा के ईंट का जवाब पत्थर से दे रही कांग्रेस

शशिकांत शर्मा 2003 से 2013 तक कई रक्षा सौदों में अभिन्न हिस्से के तौर पर शामिल रहे जो भविष्य में कैग की जांच का विषय हो सकते हैं. शर्मा के खिलाफ दाखिल याचिकाओं में भी इन सौदों को जिक्र है. अब कैग प्रमुख के रूप में उन्हें इन सौदों को ऑडिट करना पड़ सकता है जो हितों के टकराव का मसला हो सकता है. हालांकि, उनके खिलाफ दाखिल याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और शर्मा कैग प्रमुख बने थे.

वहीं वीके सिंह का कहना है कि अगर वह शर्मा के पद पर होते तो संवैधानिक पद से इस्तीफा दे देते.

First published: 6 May 2016, 19:23 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी