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रामलला को आजाद देखने की इच्छा रखने वाले बाबरी के मुद्दई हाशिम अंसारी का निधन

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 July 2016, 10:46 IST
(ट्विटर)

बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद के सबसे बुजुर्ग मुद्दई मोहम्मद हाशिम अंसारी का 96 साल की उम्र में अयोध्या में निधन हो गया है. अयोध्या केस में मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी लंबे वक्त से बढ़ती उम्र की वजह से बीमार चल रहे थे.

उनके बेटे इकबाल अंसारी ने स्थानीय मीडिया को दी जानकारी में बताया कि बुधवार सुबह वो नमाज के लिए नहीं उठे. जब परिवार वालों ने जाकर देखा तो पता चला कि उनकी मृत्यु हो चुकी है.

साठ साल से ज्यादा वक्त तक बाबरी मस्जिद की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले हाशिम अंसारी के स्थानीय हिंदू साधु-संतों से रिश्ते हमेशा अच्छे रहे. 

1949 से कर रहे थे पैरवी

अयोध्या विवाद में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद वो मामले के जल्द समाधान के पक्ष में थे. हालांकि बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का रुख इस पर अलग रहा.

कुछ साल पहले हाशिम अंसारी ने कहा था, "मैं सन 1949 से मुकदमे की पैरवी कर रहा हूं, लेकिन आज तक किसी हिंदू ने हमको एक लफ्ज गलत नहीं कहा. हमारा उनसे भाईचारा है. वो हमको दावत देते हैं. मै उनके यहां सपरिवार दावत खाने जाता हूं."

एक रिक्शे पर जाते थे हाशिम-परमहंस

अयोध्या में विवादित स्थल के दूसरे प्रमुख दावेदारों में निर्मोही अखाड़ा के राम केवल दास और दिगंबर अखाड़ा के दिवंगत महंत परमहंस रामचंद्र दास से हाशिम अंसारी की अंत तक गहरी दोस्ती रही.

श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष परमहंस और हाशिम अंसारी अक्सर एक ही रिक्शे या कार में बैठकर मुकदमे की पैरवी के लिए अदालत जाते थे और साथ ही चाय-नाश्ता करते थे. दोनों के भाईचारे की शहर में मिसाल दी जाती थी.

इसके अलावा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत ज्ञानदास के साथ भी उनके अच्छे संबंध रहे.

हाशिम अंसारी और अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर के महंत ज्ञानदास (पीटीआई)

हिंदू संतों से बातचीत का किया था प्रयास

हाशिम अंसारी 1949 से लेकर तकरीबन 60 सालों तक बाबरी मस्जिद के लिए मुस्लिम पक्ष की पैरवी कर रहे थे. इस सिलसिले में कई बार उन्होंने कोर्ट से बाहर जाकर भी हिन्दू धर्मगुरुओं से मिलकर मामले को सुलझाने का प्रयास किया. हालांकि उनकी कोशिशें किसी अंजाम तक नहीं पहुंच सकीं.

इसके अलावा हाशिम अंसारी अक्सर अपने बयानों की वजह से भी चर्चा में बने रहते थे. उन्होंने कई बार पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की, तो कभी आलोचना करने से भी गुरेज नहीं किया.

उत्तर प्रदेश की सपा सरकार और मुलायम सिंह के बारे में भी उनका रुख यही था. कभी अच्छे कामों के लिए वो मुलायम सिंह यादव की तारीफ करते तो कभी गलत लगने वाले कदम की आलोचना से परहेज नहीं किया.

अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की पैरवी करते हुए एक वक्त ऐसा भी आया जब हाशिम अंसारी ने इस मामले की पैरवी करने से इनकार कर दिया था.

विवाद का जल्द चाहते थे निपटारा

2014 में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार हाशिम अंसारी इस मुद्दे के राजनीतिकरण से इतने नाराज हुए थे कि उन्होंने बाबरी मस्जिद के मुकदमे की पैरवी ना करने का फैसला कर लिया था.

विवादित जमीन के मालिकाना हक के मुकदमे में सबसे पुराने वादियों में एक हाशिम अंसारी ने कहा था कि वो अब रामलला को आजाद देखना चाहते हैं. उनका कहना था, "चाहे हिंदू नेता हों या मुस्लिम सब अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हैं और मैं कचहरी के चक्कर लगा रहा हूं."

हालांकि इसके तुरंत बाद अपने बयान से पलटते हुए हाशिम अंसारी ने कहा था कि पैरवी से हटने संबंधी जो बयान दिया, वह मामले की धीमी सुनवाई को लेकर खीझ में दिया गया था.

हाशिम अंसारी चाहते थे कि विवाद का जल्द से जल्द हल निकलना चाहिए. इसके लिए वो मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के पक्ष में थे. 

अब हाशिम अंसारी के निधन के बाद अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की पैरवी उनके बेटे करेंगे. ये फैसला खुद हाशिम ने पहले ही कर दिया था.

अयोध्या के हनुमान गढ़ी मंदिर में महंत ज्ञानदास और संत के साथ मोहम्मद हाशिम अंसारी (पीटीआई)

मोहन भागवत को दी थी नसीहत

हाशिम अंसारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को मंदिर के बजाए देश के विकास पर ध्यान देने की नसीहत दी थी. हाशिम अंसारी ने कहा, "मंदिर-मंदिर चिल्ला रहे हो. जरा मद्रास (चेन्नई) की तरफ देखो. देश के विकास की तरफ देखो. लाखों लोग भूख से मर रहे हैं.

उसकी तरफ देखो. बस मंदिर बनाओगे. क्या मंदिर बनाओगे. बनाओ मंदिर, बनाओ हिम्मत है तो बनाओ. बस रामलला को जेल में रखकर राजनीति करते हो. मोहन भागवत से कह दो आकर देखें. अगर सच में अपने धर्म को मानते हैं तो सच बोलें."

First published: 20 July 2016, 10:46 IST
 
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