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दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से पूछा, जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रहे?

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2016, 20:41 IST

आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की जांच का सामना कर रहे हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को दिल्ली हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है.

हाईकोर्ट ने सीएम वीरभद्र से कहा है कि उन्हें सीबीआई की जांच में सहयोग करना चाहिए ताकि मामले का निपटारा जल्द हो सके.

सुनवाई के दौरान सीबीआई ने वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी की मांग की. सीबीआई ने दलील दी कि उसके पास सीएम की गिरफ्तारी के पुख्ता सबूत हैं. इसलिए उनकी गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटाया जाना चाहिए.

सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि गिरफ्तारी पर लगी रोक और जांच में सहयोग नहीं करने के चलते मामला प्रभावित हो रहा है. मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी.

दबाव में कांग्रेसी नेतृत्व

वीरभद्र सिंह पर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही बीजेपी लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रही है. अरुणाचल प्रदेश में सरकार गिरने और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के चलते कांग्रेस नेतृत्व पहले ही दबाव में हैं.

वहीं मणिपुर कांग्रेस में भी बगावत की खबरें आ रही हैं. उत्तर भारत में सिर्फ कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में ही सत्ता पर काबिज है. अगर बुधवार को कोर्ट का फैसला वीरभद्र सिंह के खिलाफ आया तो कांग्रेस सरकार पर संकट मंडरा सकता है.

कुछ दिनों पहले मीडिया में खबरें आई थी कि हिमाचल कांग्रेस के कुछ विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं और वे उत्तराखंड के कांग्रेसी विधायकों की राह पर चल सकते हैं.

81 वर्षीय वीरभद्र साल 2012 में छठी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे. उनके कद का नेता फिलहाल हिमाचल में कांग्रेस में नहीं है. हिमाचल प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं.

क्या है पूरा मामला

प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल सितंबर महीने में सीबीआई की ओर से दायर याचिका के जवाब में वीरभद्र सिंह पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था.

सरकारी एजेंसियों को कुछ गोपनीय दस्तावेज मिले हैं जिसमें वीरभद्र सिंह और उनके सहयोगियों पर गैरकानूनी तौर पर पैसों की हेराफेरी का आरोप है.

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि 2009 से 2011 तक इस्पात मंत्री रहते हुए वीरभद्र सिंह ने 6.1 करोड़ रुपए आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक कमाए थे. इस मामले में सीबीआई ने सितंबर, 2015 में एफआईआर दर्ज की थी और उनके 13 ठिकानों पर छापे मारे थे.

सीबीआई ने मुख्यमंत्री वीरभद्र, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआइसी एजेंट आनंद चौहान और सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत 23 सितंबर को मामला दर्ज किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2015 में मामले को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से दिल्ली हाई कोर्ट स्थानांतरित किया था.

First published: 5 April 2016, 20:41 IST
 
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