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दिल्ली की फिजा साफ करने में सफल रहे अरविंद केजरीवाल

सलमा रहमान | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • 2015 में 70 सूत्रीय एक्शन प्लान में आम आदमी पार्टी ने अन्य उपायों के अलावा दिल्ली में प्रदूषण को कम किए जाने का वादा किया था.
  • पार्टी ने इस दिशा में काम करते हुए 2015 में दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ पहली बार समग्र योजना की शुरुआत की और जनवरी महीने में 15 दिनों के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ऑड-ईवन की नीति लागू की.

पिछले साल फरवरी महीने में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने '70 सूत्री एक्शन प्लान' का घोषणापत्र जारी किया था. 2014 में 49 दिनों की सरकार चलाने के बाद फिर से सत्ता में वापस आने की कोशिशों में जुटे केजरीवाल ने 70 सूत्रीय घोषणा की थी. कई महत्वाकांक्षी योजनाओं के अलावा इस योजना में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में प्रदूषण घटाने का वादा किया था.

2014 की विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है. विशेषज्ञों की माने तो इस प्रदूषण की वजह से अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. 2015 आम आदमी पार्टी के लिए कठिन दौर का साल रहा और उसे शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कोशिशों को अमलीजामा पहनाने में खासी मशक्कतों का सामना करना पड़ा.

प्रदूषण का साल

Delhi Pollution.

सत्ता में आने के पांच महीनों बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने अगस्त 2015 में पहला समग्र प्रोग्राम शुरू किया ताकि दिल्ली की प्रदूषण चिंताओं को दूर किया जा सके. 2015-16 में आम आदमी पार्टी की सरकार ने पूरी दिल्ली में 14 लाख पौधे लगाने का आरंभिक लक्ष्य रखा था और कुछ मंत्रालयों ने इस मुहिम को आगे भी बढ़ाया. इसके बाद मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए कार फ्री कार्यक्रम की शुरुआत की गई.

हालांकि दिसंबर के पहले तक सरकार सख्त नहीं हुई. लेकिन इसके बाद सरकार ने कचरा जलाने समेत कई मामलों के खिलाफ संज्ञान लेते हुए चालान काटने की शुरुआत कर दी. सरकार ने एप की मदद से लोगों को पर्यावरण उल्लंघन मामले की जानकारी देने को कहा और उसने बदरपुर और राजघाट पावर प्लांट को बंद करने का फैसला लिया.

इस पूरी पहल में सबसे बड़ा फैसला ऑड-ईवन फॉर्मूला रहा जो भारत में सबसे पहले आम आदमी पार्टी की सरकार ने लागू किया. मैक्सिको, बागोटा, पेरिस और प्रदूषण की समस्या से हलकान बीजिंग से सबक लेते हुए दिल्ली ने इस साल 15 दिनों तक ऑड-ईवन को पायलट बेसिस पर चलाया. योजना के तहत सम संख्या वाली कारों को सम तारीख पर चलाया जाना था जबकि विषम नंबर की कारों को विषम तारीखों वाले दिन चलाना था.

कैसे चली योजना

ऑड-ईवन पॉलिसी से भारत के चीफ जस्टिस को छूट दी गई थी लेकिन उन्होंने कार पूल कर इस मुहिम को अपना समर्थन दिया. योजना की तारीफ करते हुए द एनर्जी एंड रिर्सोसेज इंस्टीट्यूट (टेरी) और सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने कहा कि ऑड-ईवन की योजना लागू किए जाने से शहर में पीएम 2.5 के स्तर में जबरदस्त कमी आई है. इसके अलावा सड़कों पर ट्रैफिक में कमी आई और ईंधन की खपत में भी बचत देखने को मिली.

सबसे बड़ी बात यह रही कि दिल्ली के लोगों ने ऑड-ईवन योजना को अपना पूरा समर्थन दिया.

दीर्घकालिक नीति

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉय का मानना है कि सरकार को आपातकालीन उपायों की बजाए दीर्घकालिक नीतियों पर काम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, 'हम ऑड-ईवन फॉर्मूले की तारीफ करते हैं लेकिन सरकार को इस नीति को आगे बढ़ाना चाहिए. इसके लिए कठोर निगरानी और सहयोगपरक नीति बनाए जाने की जरूरत है ताकि लंबे समय में प्रदूषण को कम किया जा सके.'

चौधरी ने कहा कि सरकार को इंटिग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाए जाने पर काम करना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने साइकिल और पैदल चलने वालों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए जाने पर जोर दिया.

2015 में दिल्ली सरकार ने शहर में धूल की समस्या के लिए जिम्मेदार मानते हुए कई मेट्रो निर्माण स्थलों के खिलाफ चालान किया गया. चौधरी के मुताबिक सरकार को धूल को नियंत्रित करने की दिशा में और अधिक सख्त दिशानिर्देशों को लागू करने की जरूरत है.

जहां तक कचरा जलाए जाने का सवाल है तो सरकार को उसकी रिसाइक्लिंग का पूरा इंतजाम करना चाहिए. धान के खेतों में आग लगाए जाने की घटना से निपटने की दिशा में सरकार को पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा, 'पंजाब जैसे राज्यों ने इसे गैर-कानूनी घोषित कर रखा है लेकिन सरकार को उस टेक्नोलॉजी पर सब्सिडी देनी चाहिए जिससे धान के डंठल को जमीन में मिलाने में मदद मिले. इससे किसानों को डंठलों को जलाना नहीं होगा.'

आपातकालीन रणनीति

Delhi Kejriwal.

2015 के पहले छह महीनों में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के लिए शहर के खतरनाक मौसम को जिम्मेदार बताया गया. हालांकि आईआईटीएम में सफर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. गुरफान बेग ने कहा कि मौसम की वजह से प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों पर असर पड़ता है जो पहले से ही फिजां में मौजूद होते हैं. उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की पहचान कर उसे रोकने के उपाय किए जाने चाहिए.

First published: 3 February 2016, 8:18 IST
 
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