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डाइटरी सप्लीमेंट्स: शरीर बनाने का नुकसानदेह शौक?

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST

शहरों में रहने वाले देश के 78 प्रतिशत किशोरों के लिए बुरी खबर है. आबादी का यह हिस्सा या तो वजन कम करने के लिए या ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए डाइटरी सप्लीमेंट्स का किसी ना किसी रूप में नियमित सेवन करता है.

हाल ही में हुए एक अध्ययन 'भारतीय न्यूट्रास्यूटिकल्स, हर्बल्स एंड फंक्शनल फूड इंडस्ट्री: इमर्जिंग ऑन ग्लोबल मैप' जो की एसोसिएटेड चेम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया (एसोचैम) के साथ मिलकर व्यावसायिक परामर्श कंपनी आरएनसीओएस द्वारा करवाया गया है. इसके अनुसार 60-70% डाइटरी सप्लीमेंट्स देश भर में गलत तरह से बेची जाती है जो की भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा अस्वीकृत, अपंजीकृत या नकली होती है. 

नकली उत्पाद और झूठे दावे

  • डाइटरी सप्लीमेंट्स मुख्य रूप से दवा कंपनियों द्वारा बेचे जाते हैं और अक्सर चिकित्सक, जिम प्रशिक्षक और पोषण विशेषज्ञ इन्हें लेने की सलाह देते हैं. अधिकांश प्रशिक्षक इस बात से सहमत हैं की ऐसे नकली प्रोडक्ट्स से बचा नही जा सकता. 
  • दिल्ली में एक जिम के ट्रेनर विकास कुमार, के अनुसार,"शहर भर में विभिन्न जिम और फिटनेस केंद्रों में जो प्रशिक्षक और पोषण विशेषज्ञ होते हैं उन्हें विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों से कुछ प्रोडक्ट्स की सिफारिश करने के लिए पैसे मिलते हैं. झूठे दावों के साथ नकली प्रोडक्ट्स को प्रशिक्षकों के माध्यम से बेचा जाता है." 

  • विकास बताते हैं की ग्राहकों को आमतौर पर प्रशिक्षकों द्वारा निर्धारित की गयी खुराक के दुष्प्रभाव के बारे में कुछ नही पता होता है. वह बिलकुल अनजान होते हैं. बहुत से आँख बंद करके प्रशिक्षक की बात मान लेते हैं. वह आगे बताते हैं की "कई लोग तो यह खुराख ऑनलाइन खरीद लेते हैं. यह सोचकर की यह बिलकुल सही है और इससे उनको कोई नुक्सान नही होगा. सच्चाई यह है की ज्यादातर ऑनलाइन रिटेलर्स ख़राब प्रोडक्ट्स बेचते हैं."

क्या किया जा सकता है?

  • एसोचैम के अध्ययन के अनुसार " ऐसी छोटी समूहों को ब्लॉक स्तर पर निर्मित किया जाना चाहिए जो की बाजार में नकली उत्पादों के प्रसार की जांच कर सकें और ख़राब प्रोडक्ट्स को तुरंत हटाया जा सके.

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन में वैज्ञानिक, डॉ आर हेमलता बताती हैं, "किसी भी डाइटरी सप्लीमेंट्स खुराक में पोषण सामग्री नकली नही होनी चाहिए. अच्छे स्वास्थ्य का दावा करने वाले प्रोडक्ट्स धोखा दे सकते हैं और इसीलिए उन्हें सही ढंग से उन्हें बनाया जाना चाहिए."

  • एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार ऐसी कई अपंजीकृत दवाएं बेची जा रही हैं जिनका नियमित रूप से सेवन करने पर दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है.
  • अगर प्रोडक्ट्स को एफएसएसएआई से मंजूरी मिल भी जाती है तब भी समय-समय पर इसकी सामग्री की जांच की जानी चाहिए. ऐसे मामलों में ग्राहक को धोखा देने की संभावना खत्म हो जाती है. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन के पूर्व निदेशक और भारत के पोषण सोसायटी के सदस्य डॉ बी सेसिकिरन कहते हैं की स्वास्थ्य लाभ के संबंध में जो दावे किये जाते हैं वह गुमराह करने वाले हो सकते हैं. 

डाइटरी सप्लीमेंट्स रिटेलर्स के माध्यम से ऑनलाइन या सीधे विक्रेताओं द्वारा बेचे जाते हैं. इनको गोलियां, कैप्सूल, सॉफ्ट जैल, जेल कैप्स, तरल पदार्थ और पाउडर के रूप में बेचा जाता है. इसके अतिरिक्त, कई प्रशिक्षक सही तरह से खुराक के सेवन के बारे में नही बता पाते. जिसका प्रभाव नुकसानदेह हो सकता है.

First published: 8 December 2015, 8:46 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @catchnews

एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म से पढ़ाई. पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी कहानियां करते हैं.

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