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दिल्ली हाईकोर्ट: ऑड-इवेन के लिए 15 दिन क्यों ?

आशीष कुमार पाण्डेय | Updated on: 6 January 2016, 16:37 IST
QUICK PILL
  • दिल्ली\r\nसरकार के ऑड-इवेन\r\nफॉर्मूले\r\nपर दिल्ली\r\nहाईकोर्ट ने सवाल खड़े किया\r\nहै.\r\nहाईकोर्ट\r\nने दिल्ली सरकार के इस फैसले\r\nसे जनता को हो रही परेशानी पर\r\nभी चिंता जाहिर की है.
  • दिल्ली\r\nहाईकोर्ट\r\nने सरकार से कहा कि आपको यह\r\nस्वीकार करना चाहिए कि आप के\r\nपास जनता के लिए परिवहन की\r\nपर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं.\r\n \r\n\r\n

दिल्ली सरकार के ऑड-इवेन फॉर्मूले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सवाल खड़े किये हैं. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के इस फैसले से जनता को हो रही परेशानी पर भी चिंता जाहिर की है.

कोर्ट ने कहा सरकार से कहा कि अगर यह ट्रायल के तौर पर चल रही है तो इसे 15 दिन की बजाय एक हफ्ते में क्यों नहीं हटाया जा सकता?

हाईकोर्ट ने पूछा है कि एक जनवरी से लागू हुए इस कानून का आज छठां दिन है और अब तक आपने पर्यावरण में सुधार का कोई भी डॉटा नहीं इकट्ठा किया है, क्यों?

इसके लिए कोर्ट ने शुक्रवार तक का समय देते हुए दिल्ली सरकार से कहा कि आप को यह स्वीकार करना चाहिए कि आप के पास जनता के लिए परिवहन की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं.

वहीं दूसरी तरफ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) के चेयरमैन भूरेलाल ने दिल्ली सरकार के ऑड-इवेन फार्मूले को पर्यावरण सुधार की दिशा में उठाया गया सही कदम बताया लेकिन साथ यह भी कहा कि सबके लिए इसे लागू करना इतना आसान नहीं है.

इस नियम से सड़कों पर गाड़ियों कि संख्या घटी है और यातायात भी सामान्य बना हुआ है. इन वजहों से यह कदम स्वागतयोग्य है.

दिल्ली सरकार के ऑड-इवेन फॉर्मूले को पड़ोसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लागू होने की संभावना पर भूरेलाल ने कहा कि इसे लागू करने के लिए हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों के पास राजनैतिक इच्छाशक्ति होनी चाहिए.

ईपीसीए ने इस मामले में यूपी और हरियाणा सरकारों के साथ 2 जनवरी को एक बैठक की थी. जिसमें दोनों राज्यों की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों कोे लागू करने पर अपनी सहमती जताई.

भूरेलाल के मुताबिक प्रदूषण की रोकथाम पर जितना बेहतर काम दिल्ली सरकार ने किया है, यूपी और हरियाणा की सरकारें इस दिशा में उतना काम नहीं कर पायी हैं.

पहले दिल्ली में बड़े पैमाने पर कचरा जलाया जाता थे, लेकिन बाद में दिल्ली सरकार ने इस मामले में जुर्माना वसूलना शुरु किया और इस तरह का प्रदूषण काफी कम हो गया है. लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लगातार कंस्ट्रक्शन जारी है और प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है.

First published: 6 January 2016, 16:37 IST
 
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