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धर्म के नाम पर वोट मांगने वाले विधायक पर केरल हाईकोर्ट ने लगाया 6 साल का बैन

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 November 2018, 9:49 IST

देश में इस समय पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. वोटों के लिए भारतीय राजनीति में अधिकतर धर्म और जाति का अप्रत्यक्ष सहारा लेना भी वोट बैंक इकट्ठा करने का एक हिस्सा है. अक्सर ही देश में धर्म की राजनीति देखने को मिलती है. चुनावों के समय में धार्मिक मुद्दे अचानक ही जोर पकड़ लेते हैं. लेकिन केरल हाई कोर्ट ने धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है. केरल हाई कोर्ट ने धर्म के नाम पर वोट मांगने को लेकर एक विधायक की सदस्यता रद्द कर दी है. इतना ही नहीं इसी एक साथ कोर्ट ने विधायक पर 6 साल तक कोई चुनाव न लड़ने का प्रतिबन्ध भी लगा दिया है.

केरल हाईकोर्ट ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के एक विधायक को अयोग्य करार कर दिया है. इसी एक साथ विधायक की विधानसभा की सदस्यता भी खत्म हो गई है. जानकारी के अनुसार इस विधायक ने 2016 के विधानसभा चुनाव में धर्म के नाम पर लोगों से वोट मांगे थे.

केरल हाईकोर्ट ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के विधायक केएम शाजी की सदस्यता को धर्म की राजनीति करने के लिए रद्द कर दिया. इसी एक साथ अब केएम शाजी अगले 6 साल तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे.

इसी के साथ केरल हाई कोर्ट ने ये आदेश भी दिया है कि आजीकोड़ विधानसभा सीट के लिए चुनाव दोबारा कराए जाएं. इस मामल में सुनवाई कर रहे जस्टिस पी डी रंजन ने केरल विधानसभा के अध्यक्ष और निर्वाचन आयोग को त्वरित रूप से उचित कार्रवाई करने को कहा है. गौरतलब है कि कोर्ट ने ये फैसला एलडीएफ उम्मीदवार एमवी निकेश कुमार की याचिका पर सुनाया है.

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2016 में कुमार ने शाजी के खिलाफ चुनाव लड़ा था. कुमार ने आरोप लगाया है कि शाजी ने उनके खिलाफ वोट न करने के लिए पैंपलेट बांटे थे. कुमार ने कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि शाजी ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के जरिये वोट मांगे. सूत्रों के अनुसार हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ केएम शाजी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. गौरतलब है कि राज्य में आईयूएमएल कांग्रेस-नीत विपक्ष यूडीएफ का हिस्सा है.

First published: 10 November 2018, 9:49 IST
 
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