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पंजाब में स्वराज पार्टी का घोषणापत्र: हर्बल नशे को अपराधमुक्त किया जाय

राजीव खन्ना | Updated on: 4 July 2016, 7:51 IST

पंजाब चुनाव में उतरने की घोषणा के करीब एक माह बाद स्वराज पार्टी ने अपना चुनावी एजेंडा तैयार कर लिया है. पार्टी नेतृत्व ने चुनाव संबंधी मुद्दों पर अपने सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है. मजेदार बात यह है कि स्वराज पार्टी ने पंजाब में ड्रग के मुद्दे पर लड़ना तय किया है.

पार्टी ने नशीली दवा एवं मादक पदार्थ अधिनियम-1985 में संशोधन कर पोस्त, अफीम और भांग को आपराधिक ड्रग की श्रेणी से बाहर निकालने की वकालत की है. पार्टी अध्यक्ष प्रो. मनजीत सिंह कहते हैं, ‘जब से इन जैविक दवाएं इस अधिनियम के अधीन लाई गई हैं, तभी से इन दवाओं की मनमानी कीमत पर काला बाजारी शुरू हुई. इससे लोगों को सिंथेटिक दवाएं अपेक्षाकृत सस्ती मिलने लगी और इनका उपभोग बढ़ गया.’

सिंह के मुताबिक स्वराज पार्टी चाहती है कि इन जैविक दवाओं को आपराधिक श्रेणी से बाहर लाकर इनका नियमितीकरण किया जाए. जरा, सूखे राज्यों पर गौर करें, वहां ड्रग माफिया पनप गया है, जबकि शराब उपलब्ध है. इससे हुआ यह कि जो राजस्व सरकारी कोष में जाना था, वह माफिया की जेब भर रहा है. गुजरात इसका उदाहरण है.

क्या ड्रग तस्करी की वजह से हुआ पठानकोट हमला?

दरअसल, राज्य की हालिया स्थिति को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के जानकारों और राजनेताओं ने जैविक दवाओं के अपराधीकरण को रोकने के लिए एक नई बहस छेड़ दी है. यह पहल ऐसे वक्त की जा रही है जब राज्य सरकार इस मामले में जमीनी स्तर पर अपनी नाकामी पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है, क्योंकि पंजाब में ही धरपकड़ ज्यादा हुई है और इस वजह से राज्य की काफी बदनामी हुई है. 

सरकार भी इस प्रकार की बरामदगी और गिरफ्तारियों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रही है ताकि वह यह संदेश दे सके कि वह मादक दवाओं की तस्करी की समस्या से कुशलतापूर्वक निपट रही है.

पक्ष में है बहस

अर्थशास्त्री डाॅ एसएस जोहल, आम आदमी पार्टी के निलंबित सांसद एचएस खालसा और डाॅ धर्मवीर गांधी इन दवाओं के अपराधीकरण को रोकने के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं. उनका तर्क है कि पुर्तगाल, ब्राजील और अमेरिका के कई राज्यों में नियंत्रित दवा बिक्री की नीति से लोगों में नशे की लत में कमी देखी गई.

उन्होंने इस बात की ओर भी इशारा किया कि एनडीपीएस कानून के कारण कुछ अवैध दवा कारोबारियों की मनमानी चल रही है, इससे काले बाजार में इन दवाओं की कीमतें आसमान छू रही हैं. इसके कारण युवा पहले चिकित्सीय दवाओं की ओर मुखातिब हुए और फिर धीरे-धीरे और सस्ते विकल्प यानी सिंथैटिक ड्रग की लत का शिकार हो गए.

इसे आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से हल करना होगा. राजनेताओं को दोष देना समाधान नहीं है, जरूरत नीतियां बदलने की है

इन लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है, हमें इस मामले से जुड़ी नैतिकता को छोड़कर आगे आना होगा और इसे आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से हल करना होगा. राजनेताओं को दोष देना समाधान नहीं है, जरूरत नीतियां बदलने की है. 

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ड्रग माफियाओं को सलाखों के पीछे करने के आह्वान के साथ ही स्वराज पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया है, ‘ड्रग पीड़ितों को दोषी ठहराने के बजाय उन्हें नशा उन्मूलन केंद्रों में भर्ती किया जाएगा ताकि उनकी क्षमताओं का उपयोग समाज के भले के लिए किया जा सके.’

मात्र महीने भर पहले अस्तित्व में आई पार्टी कई मुद्दों पर अपनी अलग और बेबाक राय रखती है. स्वराज अभियान की यह पार्टी आम आदमी पार्टी से टूटे कुछ नेताओं ने मिल कर बनाई है. यह फिलहाल पंजाब में ही लांच की गई है.

हालांकि स्वराज अभियान के केंद्रीय नेतृत्व ने राजनीतिक पार्टी के गठन से स्वयं को दूर ही रखा है. साथ ही कथित रूप से कहा है कि यह स्वराज अभियान की कार्य प्रणाली के अनुरूप नहीं है लेकिन वह फौरी तौर पर पंजाब में पार्टी के साथ जुड़ा रहेगा.

शराब बिक्री पर सरकार का नियंत्रण

स्वराज पार्टी ने अपने एजेंडे में एक और मुद्दा उठाया है, वह यह कि पंजाब में सरकार ने खुली शराब बिक्री का कारोबार पूरी तरह हथिया लिया है. राज्य में शराब बिक्री की मौजूदा स्थिति से बार-बार विवाद पैदा हो रहे हैं.

मीडिया में ऐसी खबरें थीं कि चौबीसों घंटे बाजार में शराब बेची जा रही है जबकि आधिकारिक तौर पर सुबह 9 से रात 11 बजे तक का ही समय शराब बिक्री के लिए निर्धारित है. बदनामी से बचने के लिए प्रदेश के आबकारी एवं कर विभाग ने 410 शराब की दुकानों का निरीक्षण किया. इनमें से विभिन्न जिलों में कुल 83 दुकानों पर समय का उल्लंघन हो रहा था. 

लेकिन सरकार के इस अभियान की खूब खिल्ली भी उड़ी क्योंकि कथित रूप से ये निरीक्षण सुबह 6 से 9 बजे के बीच किए गए जबकि खरीददार और दुकानदार दोनों ही सो रहे होते हैं, क्योंकि उन्होंने देर रात तक कारोबार जो किया होता है.

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एक और चुटकुला भी पंजाब में खूब चला कि छापा मारने वाली टीम देर रात पार्टी करने के बाद अलसुबह छापेमारी पर निकल पड़ी, कमाल का आफ्टर पार्टी आइडिया है. खैर, चुटकुलों को छोड़ें, सर्वविदित तथ्य यही है कि राज्य में चौबीस घंटे शराब की बिक्री कोई बड़ी बात नहीं है.

किसानी का एजेंडा

जहां तक खेती का सवाल है, स्वराज पार्टी का कहना है कि छोटे और निचले तबके के किसान और कृषि श्रमिकों को 25,000 करोड़ रुपये के ऋण से मुक्त कर दिया जाना चाहिए. मनजीत सिंह का कहना है कि मनरेगा के तहत मजदूरी की अवधि सौ दिन से बढ़ा कर दो सौ दिन कर दी जानी चाहिए.

पार्टी का आरोप है कि उत्तरोत्तर राज्य सरकारों ने यहां के सरकारी स्कूलों को धीरे-धीरे दलित स्कूल बना दिया है, जहां केवल निचले तबके के बच्चे पढ़ने आते हैं. पार्टी शिक्षा व्यवस्था में भी कई प्रकार के सुधारों की बात कर रही है. पार्टी का कहना है कि शिक्षा के अधिकार की तर्ज पर कुछ बड़े निजी स्कूलों में पढ़ाई का खर्च राज्य सरकार वहन करे. इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और स्टाफ का शोषण स्वतः समाप्त हो जाएगा.

पंजाब के पानी का पड़ोसी राज्यों के साथ बंटवारे के विषय पर पार्टी का मत है कि नदी तट सिद्धान्तों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. आम धारणा यह है कि फिलहाल इस छोटे दल से अगर किसी को नुकसान होगा तो वह है आम आदमी पार्टी. मनजीत का कहना है हम अपने आपको एक विलेन की तरह नहीं दिखाना चाहते लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सही मसलों पर अपनी आवाज नहीं उठाएंगे.

First published: 4 July 2016, 7:51 IST
 
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