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हिमाचल के गवर्नर हाउस में स्थाई यज्ञशाला बनने से विवाद

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2016, 18:37 IST

हिमाचल प्रदेश के गवर्नर आचार्य देवव्रत ने आधिकारिक आवास यानी राजभवन में स्थाई यज्ञशाला बनाए जाने की वजह से विवादों में घिर गए हैं. राज्य में कुछ विपक्षी दलों ने इस मामले में गवर्नर द्वारा धर्मनिरपेक्षता का पालन कराने वाली संवैधानिक शपथ के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

राजभवन में बनी इस यज्ञशाला का उद्धाटन बुधवार को किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल, कैबिनेट सदस्य शामिल हुए. इनके साथ ही यज्ञ में मुख्यमंत्री की पत्नी प्रतिभा सिंह भी शामिल रहीं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक राजभवन में यज्ञशाला बनाए जाने पर ऐतराज जताते हुए सीपीआई(एम) की स्टेट यूनिट ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखते हुए संवैधानिक प्रावधानों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की है.

इसके साथ ही इस पत्र में लिखा गया है कि राज्यपाल की तरह अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी अपने आधिकारिक निवास पर ऐसा करते हैं, तो यह एक गलत परंपरा शुरू हो जाएगी.

इस मामले में शिमला के डिप्टी मेयर तिकेंदर पंवार ने कहा कि बुधवार को राजभवन में यज्ञशाला को स्थाई रूप से स्थापित किया गया. इसका विधिवत उद्धाटन मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष के द्वारा किया गया.

यह हमारे देश की मूल भावना और संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है. पंवार ने कहा कि अन्य संवैधानिक पदों पर काबिज लोग अपने आधिकारिक निवास पर अपना पूजास्थल इसलिए नहीं बनाते, क्योंकि उन्होंने संवैधानिक शपथ ली है.

सीपीएम नेता ने कहा कि राज्यपाल को अपना धर्म का पालन करने की पूरी आजादी हो, लेकिन राजभवन में यज्ञशाला की स्थापना करना निंदनीय है. इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति से राजभवन के यज्ञशाला को ढहाए जाने की मांग की.

First published: 31 March 2016, 18:37 IST
 
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