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हिमाचल की संपत्ति को लेकर कानूनी दांवपेंच में उलझी प्रियंका गांधी

राजीव खन्ना | Updated on: 1 May 2016, 8:26 IST
QUICK PILL
  • एक आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रियंका गांधी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखा है. आरोप है कि प्रियंका गांधी केो कथित तौर पर जमीन का लैंड यूज़ और उसके उपयोग की शर्तों में ढील दी गई थी.
  • हिमाचल के कानून के अनुसार किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति द्वारा हिमाचल में अचल संपत्ति खरीदने के लिए विशेष कैबिनेट की मंजूरी अनिवार्य है.

एक आरटीआई कार्यकर्ता को अपनी मशोबरा स्थित संपत्ति का ब्यौरा देने से रोकने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में कानूनी जंग लड़ रही हैं. इस मसले में सबसे बुरी स्थिति स्थानीय प्रशासन की हो गई है. वह विरोधाभासी कानून के कारण खुद को असमंजस की स्थिति में पा रहा है.

असमंजस का एक कारण यह भी है कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस और भाजपा ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है, कहा जा रहा है कि प्रियंका को हिमाचल में जमीन खरीदने की अनुमति देने में अलग-अलग समय में दोनों दलों की भूमिका रही है.

प्रियंका को एक दिन में जमीन खरीदने के लिए क्लियरेंस मिल गया: आम आदमी पार्टी

आरोप है कि प्रियंका के लिए कथित तौर पर जमीन का लैंड यूज़ और उसके उपयोग की शर्तों में ढील दी गई थी. हिमाचल के कानून के अनुसार किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति द्वारा हिमाचल में अचल संपत्ति खरीदने के लिए विशेष कैबिनेट की मंजूरी अनिवार्य है.

आरटीआई कार्यकर्ता देव आशीष भट्टाचार्य ने कैच न्यूज को बताया कि वे राज्य के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय सतर्कता आयोग के निदेशक को पत्र लिखकर उन अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग करेंगे जिन्होंने प्रियंका को फायदा पहुंचाने के लिए कानूनों का उल्लंघन किया और मुझे आरटीआई से जानकारी देने से इनकार किया.
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हिमाचल स्थित प्रियंका गांधी का विवादित घर

भट्टाचार्य ने शिमला के नजदीक मशोबरा में प्रियंका गांधी की संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका लगाई है. उच्च न्यायालय ने मामले को सुनवाई के लिए छह जून को सूचीबद्ध करते हुए प्रियंका को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है. भट्टाचार्य को दिल्ली प्रशासन की तरफ से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के दिल्ली स्थित घरों का विवरण उपलब्ध कराया जा चुका है.

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प्रियंका ने राज्य सूचना आयोग के एक आदेश के खिलाफ पिछले साल उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी. सूचना आयोग ने शिमला के उपायुक्त को निर्देश दिए थे कि प्रियंका द्वारा मशोबरा में खरीदी गई जमीन की जानकारी उपलब्ध कराई जाए.

भट्टाचार्य की दलील है कि यदि दिल्ली सरकार सूचना के अधिकार के तहत प्रियंका की संपत्ति का विवरण उपलब्ध करा सकती है तो हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उसी आरटीआई कानून के तहत प्रियंका की संपत्ति का विवरण क्यों नहीं दिया जा सकता?

प्रियंका ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को चुनौती देते हुए 29 जून 2015 को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. याचिका का आधार यह बताया गया कि आयोग यह समझने में विफल रहा था कि भट्टाचार्य द्वारा मांगी गई जानकारी उस संपत्ति के बारे में थी जो याचिकाकर्ता (प्रियंका) की थी, इस तरह यह सूचना भी याचिकाकर्ता से व्यक्तिगत रूप से जुड़ी थी.

कहा जा रहा है कि प्रियंका के लिए कथित तौर पर जमीन का लैंड यूज़ और उसके उपयोग की शर्तों में ढील दी गई थी

यह दलील भी दी गई कि राज्य सूचना आयोग ने आदेश देते समय यह ध्यान ही नहीं किया कि जानकारी देना याचिकाकर्ता के व्यक्तिगत अधिकारों का हनन होगा और उसकी गोपनीयता में अतिक्रमण होगा. उनके वकील ने यह भी कहा कि कोरी कल्पना के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी व्यक्ति द्वारा जानकारी प्राप्त करने का दावा पूरी तरह निरपेक्ष और अप्रतिबंधित है.

भट्टाचार्य ने कहा कि आरटीआई के उनके पहले आवेदन के गायब हो जाने के बाद शिमला के उपायुक्त ने 27 जनवरी 2015 को एक आदेश के माध्यम से उन्हें जानकारी देने से इनकार कर दिया. आदेश में तर्क दिया गया कि प्रियंका को एसपीजी सुरक्षा प्राप्त है और उनकी संपत्ति की जानकारी देने से सीधे उनकी सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.

भट्टाचार्य ने राज्य सूचना आयोग के समक्ष इस आदेश को चुनौती दी, जिसने उपायुक्त को निर्देश दिए थे कि वह भट्टाचार्य को दस दिन के भीतर मांगी गई पूरी सूचना उपलब्ध कराए.

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2007 में प्रियंका ने कथित तौर पर अपना घर बनाने के लिए मशोबरा में 47 लाख रुपए की कीमत में 4.25 बीघा जमीन खरीदी थी. सरकार ने गैर-हिमाचली प्रियंका को जमीन खरीदने और आगे बढ़ने के लिए किराएदारी एवं जमीन सुधार कानून में विशेष छूट दी थी. बाद में प्रियंका ने अपनी संपत्ति से लगी और जमीन भी खरीद ली. भट्टाचार्य का दावा है कि 2011 और 2013 में प्रियंका साथ लगती दो और जमीन खरीद चुकी हैं.

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हिमाचल स्थित प्रियंका गांधी का विवादित घर

भट्टाचार्य ने शिमला उपायुक्त के कार्यालय में जनसूचना अधिकारी के समक्ष आवेदन कर जमीन, उसके बिक्री अभिलेख, हिमाचल में जमीन खरीदने के लिए एक बाहरी व्यक्ति को दी गई छूट, जमीन की वर्तमान स्थिति और इस बात की जानकारी मांगी थी कि क्या तय समय में प्रियंका को इस बात से अवगत कराने के लिए कोई संचार किया गया था कि वह भू-उपयोग से संबंधित शर्तों को पूरा नहीं करती हैं?

भट्टाचार्य ने कहा, “प्रियंका ने तीन अलग-अलग समय पर हिमाचल में जमीन खरीदी. मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूं कि हिमाचल प्रदेश किराएदारी और भूमि सुधार कानून 1972 के अनुच्छेद 118 के तहत यह सब कैसे संभव हो सकता है जबकि वह कानून तो सिर्फ एक बार जमीन खरीदने की अनुमति देता है.

हिमाचल के कानून के अनुसार किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति द्वारा अचल संपत्ति खरीदने के लिए विशेष कैबिनेट की मंजूरी अनिवार्य है

दूसरी बात यह कि भले बागवानी हो या घर के निर्माण के लिए, आखिर उनको भू-उपयोग में परिवर्तन की अनुमति इतने सालों तक कैसे बढ़ाई जाती रही, जबकि कानून कहता है कि इसे दो साल से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. तीसरी बात, मैं यह जानना चाहता हूं कि उन्होंने कुल कितनी जमीन खरीदी है. कानून घर बनाने के लिए 500 मीटर से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति नहीं देता और खेती के लिए 4 एकड़ से अधिक नहीं.”

उन्होंने आगे कहा, “यदि राज्य सरकार कानून का उल्लंघन करने पर प्रशांत भूषण की ट्रस्ट की जमीन डीड रद्द कर सकती है ततो वही कानून प्रियंका के मामले में भी लागू क्यों नहीं होता? यह सही समय है कि वे खुद इस मसले पर आगे आएं और दूसरों के लिए मिसाल कायम करें.”

राजनीतिक तौर पर बात करें तो सिर्फ कांग्रेस सरकार ही नहीं, भाजपा सरकार ने भी कथित तौर पर प्रियंका के लिए नियमों में ढील दे दी थी ताकि वे शिमला के पास प्राचीन छारबरा गांव में गर्मियों की छुटि्टयां बिताने के लिए अपने सपनों का घर सकें.

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इस गांव के आसपास का इलाका घने वनों से घिरा है और शिमला आरक्षित वन अभ्यारण्य और उसके जलग्रहण क्षेत्र का हिस्सा है.

प्रियंका को इस बात के लिए भी जाना जाता है कि उन्होंने अपनी जमीन पर पूरे ढांचे तो तोड़कर दोबारा बनाने का आदेश दिया था, क्योंकि वे इससे खुश नहीं थीं.

कथित तौर पर प्रियंका द्वारा गर्मियों के लिए अपने घर के लिए इसी जगह का चुनाव करने के पीछे यहां से जुड़ी उनकी अच्छी यादें प्रमुख कारण हैं. उनके पिता, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जब भी अपने परिवार के साथ छुटि्टयां मनाने यहां आते थे तो पास ही स्थित प्रेसीडेंट्स रिट्रीट में ठहरते थे.

भट्टाचार्य कहते हैं, “कोई नहीं कह सकता कि मेरे प्रयास राजनीति से प्रेरित हैं. मैंने दिल्ली में एक आरटीआई आवेदन लगाया, जहां कांग्रेस विपक्ष में है और मैंने हिमाचल में भी एक आरटीआई लगाई जहां भाजपा विपक्ष में है.”

भाजपा सरकार ने भी कथित तौर पर प्रियंका के लिए नियमों में ढील दे दी थी

जब कांग्रेस और भाजपा दोनों सरकारों ने इस मसले पर चुप्पी साध रखी है, माकपा ने राज्य में भूमि मापदंडों के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज बुलंद की है. पार्टी प्रवक्ता डॉ. ओंकार कहते हैं, “दोनों राजनीतिक पार्टियों द्वारा हिमाचल प्रदेश किराएदारी एवं भूमि सुधार कानून 1972 के अनुच्छेद 118 का बेशर्मी से दुरुपयोग किया गया है. जब भी उद्योगपतियों और होटल व्यवसायियों को जमीन सौंपने की बात आई, दोनों पार्टियां कानून के प्रति अंधी ही बन बैठीं. इसमें कृषि भूमि का बहुत अधिक बेनामी लेन-देन किया गया है.”

इसी बीच, आम आदमी पार्टी (आप) नेता डीएस पथिक ने प्रियंका को अनुच्छेद 118 के तहत दी गई अनुमति को रद्द करने की मांग की है. "जमीन मानदंडों का उल्लंघन कर दी गई है. यह घटनाक्रम यह भी दर्शाता है कि भाजपा की प्रेम कुमार धूमल सरकार हो या कांग्रेस के वीरभद्र सिंह का शासन, दोनों ही तत्कालीन केंद्र सरकार के दबाव में थे. प्रियंका को एक दिन में जमीन खरीदने के लिए क्लियरेंस मिल गया और वह भी दो-दो मौकों पर, जबकि स्थानीय लोग ऐसी अनुमति के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं.”

पर्यवेक्षकों का कहना है कि भले उच्च न्यायालय का निर्णय कुछ भी हो, आलोचना में अधिकारी ही घसीटे जाएंगे.

First published: 1 May 2016, 8:26 IST
 
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