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दो 'बाहरियों' के कंधे पर टिकी है असम में भाजपा की ऐतिहासिक जीत

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को ऐतिहासिक जीत नरेंद्र मोदी के मुकुट में एक और नगीना है. ऐतिहासिक इसलिए क्योंकि पूर्वोत्तर में पहली बार बीजेपी अपने दम पर सरकार बनी है. लेकिन यह जीत एक तरह से बीजेपी के लिए इज्जत बचाने वाली जीत भी है क्योंंकि चुनावरत पांच राज्यों में सिर्फ असम ही वह राज्य था जहां से बीजेपी अपने लिए उम्मीदें पाल रही थी.

लेकिन बीजेपी की इस जीत में भी कई किंतु-परंतु हैं, मसलन क्या इस जीत को बीजेपी संगठन की जीत या उसके सुखद भविष्य की गारंटी माना जा सकता है. इसमें पुराने भाजपाइयों की क्या भूमिका है? इस तरह के कुछ सवाल अभी से खड़े हो गए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि राज्य में बीजेपी जिन दो बड़े चेहरों के बल पर चुनाव लड़ रही थी वे दोनों ही अपनी मूल शिक्षा-दीक्षा में संघी या भाजपाई नहीं हैं. एक हैं सर्वानंद सोनोवाल और दूसरे हैं हेमंत बिस्वसर्मा.

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असम में बीजेपी के जीत के नायक केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल और हेमंत बिस्वसर्मा रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि दोनों नेताओं का पांच साल पहले तक बीजेपी से कोई नाता नहीं था. सोनेवाल असम गण परिषद में रह चुके हैं जबकि तरुण गोगोई ने नाराज होकर सर्मा बीजेपी में शामिल हुए थे.

हेमंत बिस्वसर्मा

राजनीतिक जानकार पहले से ही अनुमान लगा रहे थे कि सर्मा के आने से असम में बीजेपी की सरकार बनने की संभावना प्रबल है. कभी तरुण गोगोई के दाहिने हाथ रहे सर्मा के चुनावी प्रबंधन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2011 में कांग्रेस को मिली भारी जीत का श्रेय गोगोई ने सर्मा को दिया था. वहीं सर्मा इस चुनाव में गोगोई के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनके उभरे.

सर्मा ने पिछले साल अगस्त महीने में बीजेपी ज्वाइन किया था. उन्हें राज्य में बीजेपी का प्रचार प्रमुख बनाया गया था.राज्य के असमिया भाषी समुदाय में सर्मा की छवि रॉकस्टार नेता की है. गुवाहाटी के अभिजात्य कैफ़े में आने-जाने वालों से लेकर सिवासागर के कारोबारी, सिलचर के प्रोफ़ेसर तक उनकी तारीफ करते हैं. सर्मा मध्यवर्गीय आकांक्षाओं के सच्चे प्रतीक नजर आते हैं.

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सर्मा गोगोई सरकार ने में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री थे. दोनों महकमों से आम लोगों का रोज का वास्ता है. सर्मा इस समय बीजेपी के एकमात्र नेता हैं जो राज्य के ब्रह्मपुत्र और बराक वैली क्षेत्र में समान रूप से लोकप्रिय हैं. वह पहले उल्फा, फिर आसू, असम गण परिषद में भी रह चुके हैं.

इस चुनाव में सर्मा असम की जालुकबाड़ी सीट से 9000 मतों से विजयी हुए. उन्होंने राजनीति विज्ञान से पीजी किया है और लॉ ग्रेजुएट भी हैं. वह पहली बार 2001 में वे जालुकवाड़ी से विधायक बने. इसके बाद 2006 और 2011 में फिर से चुने गए.

सर्वानंद सोनेवाल

केंद्र सरकार में खेल और युवा मामलों के मंत्री सर्वानंद सोनोवाल जनवरी 2011 तक वह असम गण परिषद के साथ जुड़े हुए थे.

उनकी छवि आक्रामक युवा नेता की रही है. असम की राजनीति में उन्हें जातिय नायक के तौर पर भी देखा जाता है. पहली बार सोनोवाल मोरान  विधानसभा सीट से 2001 में विधायक बने. इसके बाद 2004 में डिब्रूगढ़ में वह पहली बार लोकसभा पहुंचे.

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बीजेपी के साथ उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 2011 से होती है. इसी साल बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया. पार्टी ने सोनोवाल को आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया था और इस रणनीति के तहत उन्हें 2011 में प्रवक्ता के साथ असम बीजेपी का महासचिव नियुक्त किया.

आखिरकार 2012 में सोनोवाल को असम बीजेपी की कमान दे दी गई. 2014 में वह असम के लखीमपुर से लोकसभा पहुंचे. बिहार में मिली चुनावी हार से सबक लेते हुए बीजेपी नेतृत्व ने असम में स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने का फैसला किया और इस साल सोनेवाल को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया था.

First published: 19 May 2016, 5:13 IST
 
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