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हिंदी दिवस: क्या आप जानते हैं? हिंदी नहीं है हमारी राष्ट्रभाषा

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 September 2020, 15:28 IST

Hindi Diwas: भारत समेत पूरी दुनियाभर में 14 सितंबर को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है? जी हां, सही पढ़ा आपने. हिंदी सिर्फ हमारी राजभाषा है. हमारी राष्ट्रभाषा कुछ है ही नहीं. आज से 71 साल पहले यानि 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान में यह तय किया गया कि हिंदी हमारी राजभाषा होगी.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 से लेकर 351 तक राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल को बखूबी समझाया गया है, लेकिन संविधान ने हिंदी को सिर्फ राजभाषा ही माना है राष्ट्रभाषा कभी नहीं माना. इसके लिए हमारा लिपि देवनागरी मानी गई है. संविधान सभा ने 14 सितंबर को इसका फैसला किया था.

इतिहास

जब देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ तो भारत का संविधान बनाने के लिए संविधान सभा का गठन हो चुका था. तब देश में कई भाषाएं थी. देश आजाद होने के बाद संविधान सभा के सामने यह समस्या खड़ी हुई कि किसे राजभाषा बनाया जाए, यह तय करना एक भी चुनौती थी. इसके बाद संविधान सभा में लंबी बहस हुई.

लंबी बहस के बाद यह माना गया कि हिंदी ही देश में सबसे अधिक बोली, समझी और लिखी जाती है. इसके बाद 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा दे दिया गया. फिर साल 1953 से 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत हुई.

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गैर-हिंदी भाषी लोगों ने किया था विरोध

जब हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया तो गैर-हिंदी भाषी लोगों ने इसका विरोध किया था. इस कारण संविधान सभा को अंग्रेजी को भी आधिकारिक भाषा बनाना पड़ा. बता दें कि दुनियाभर में आज हिंदी तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. भारत में लगभग 77 प्रतिशत लोग हिंदी बोलते, समझते तथा पढ़ते हैं.

अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद हिन्दी भाषा पूरे दुनिया में तीसरी सबसे बड़ी भाषा है, जो बोली जाती है. हालांकि अब धीरे-धीरे उसे अच्छी तरह से समझने, पढ़ने और लिखने वालों की संख्या में कमी आती जा रही है. साथ ही हिन्दी भाषा पर अब अंग्रेजी के शब्दों का बहुत अधिक प्रभाव बढ़ गया है. लोग हिंदी के शब्दों के साथ अंग्रेजी के शब्द बोलने लगे हैं.

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First published: 14 September 2020, 15:28 IST
 
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