Home » इंडिया » Hindu Mahasabha celebrating Godse Death Anniversary
 

गोडसे बलिदान दिवस : राष्ट्रवाद किस मोड़ पे ले आया

अतुल चौरसिया | Updated on: 17 November 2015, 16:32 IST
QUICK PILL
  • नाथूराम गोडसे की मृत्यु दिवस पर हिंदू महासभा ने हिंदुत्व के कुछ नायकों\r\nमसलन केरल हाउस में बीफ की\r\nशिकायत करने वाले हिंदू सेना\r\nके प्रमुख विष्णु गुप्ता और\r\nकश्मीर के विधायक अब्दुल राशिद\r\nपर स्याही फेंकने वाले देवेंद्र\r\nउपाध्याय को \"आज\r\nके गोडसे\"\r\nसम्मान\r\nसे सम्मानित किया गया.
  • राष्ट्रवादी\r\nशिवसेना नाम का संगठन चला रहे\r\nजय भगवान गोयल ने इस कार्यक्रम का आयोजन किया. उन्होंने\r\nकहा कि सत्ता में आने के बाद\r\nभाजपा ने रंग बदल लिया है.\r\nगौरक्षकों\r\nके साथ पुलिस कड़ी कार्रवाई\r\nकर रही है.\r\nसरकार\r\nको जानने की जरूरत है कि आज हर\r\nगांधी के बदले 100\r\nगोडसे\r\nपैदा हो रहे हैं.

यह कटु संयोग है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दौरे पर गांधी का नाम जप रहे थे तब देश में उनकी विचारधारा के लोग गांधी के हत्यारे गोडसे का बलिदान दिवस मनाने की तैयारियां कर रहे थे. यह भी दुर्लभ ही है कि प्रधानमंत्री ब्रितानी संसद के समक्ष लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा के पैर छू रहे थे और लगभग उसी समय नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में उनके उग्र समर्थकों का एक समूह वरिष्ठ हिंदी साहित्यकार उदय प्रकाश को बोलने नहीं दे रहा था. उनका गुनाह यह था कि उन्होंने राष्ट्रपिता के हत्यारे नथुराम गोडसे को धूर्त कहने का साहस किया था.

जो आज राष्ट्रवाद की सवारी कर रहे हैं उन्हें यह याद दिलाना भी बेजा लगता है कि सत्तर साल पहले इस देश में लड़ी जा रही आज़ादी की लड़ाई में उनके पास गिनाने को एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम तक नहीं है. महात्मा गांधी ने जब भारत छोड़ो का नारा दिया था तब सिर्फ दो समूहों ने खुद को इससे अलग रखा था उनमें से एक मुस्लिम लीग और दूसरा इसी वैचारिकी के लोग हैं जो राष्ट्रवाद के रथ पर सबको रौंद रहे हैं.

आज उसी सोच के लोग उस गोडसे की मृत्यु का शोक मना रहे हैं जिसने इस सदी के सबसे महान भारतीय महात्मा गांधी की हत्या की थी. गांधी, जिन्हें भारत की आज़ादी की लड़ायी का नायक माना जाता है. गांधी, जिसे नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग जूनियर जैसे नेता अपना गुरु मानते थे. गांधी, जिससे बीसवीं सदी के सबसे महान वैज्ञानिक एल्बर्ट आइंस्टीन अभिभूत रहा करते थे.

आज उसी सोच के लोग उस गोडसे की मृत्यु का शोक मना रहे हैं जिसने इस सदी के सबसे महान भारतीय महात्मा गांधी की हत्या की थी

महज साठ-सत्तर साल के भीतर यह कैसे संभव हो गया कि हत्यारे नायक हो गए और नायक निरीह. अतिवाद अपने उरुज की ओर जा रहा है. यह पूरे दक्षिण एशिया की समस्या बन गया है. भारत सिर्फ अनुसरण कर रहा है, अपने चरित्र के विपरीत.

रविवार को जब गोडसे की जयंती मनाई जा रही थी तब सिर्फ एक हत्यारे का महिमामंडन नहीं हो रहा था. एक विचार को खाद दी जा रही थी. ऐसा विचार जिसकी शाखाओं में विष है, जिसके पनपने पर हालात बदतर होना तय है.

यह पूरा विचार दरअसल घृणाओं के अंतरविरोध से भरा हुआ है. धर्म के मामले में यह मुसलमान और ईसाई से घृणा करता है, हिंदुओं में यह जातियों से घृणा करता है, जातियों में यह गोत्र से घृणा करता है, खाने में इसे दूसरी खानपान संस्कृतियों से घृणा है, भाषाओं में इसे भारत की ही दूसरी भाषाओं से घृणा है (उनकी जानकारी के लिए, गांधी मरते-मरते भी तमिल भाषा सीख रहे थे). इस राष्ट्रवाद में सिर्फ तिलकधारी पुरुष हैं, सिर्फ साड़ी पहनने वाली महिलाएं हैं, सिर्फ शाकाहारी भोजन है, सिर्फ हिंदी भाषा है, सिर्फ उत्तर भारत ही भारत है.

इस राष्ट्रवाद में सिर्फ तिलकधारी पुरुष हैं, सिर्फ साड़ी पहनने वाली महिलाएं हैं, सिर्फ शाकाहारी भोजन है, सिर्फ हिंदी भाषा है, सिर्फ उत्तर भारत ही भारत है.

यह इस्लाम की आलोचना करने वाली तस्लीमा नसरीन से लगाव रखता है लेकिन हिंदुत्व पर चित्रकारी करने वाले एमएफ हुसैन का गला काट लेना चाहता है. इन बातों पर उनका तर्क आता है कि फतवे तो वे भी सलमान रश्दी से लेकर तमाम मसलों में जारी करते हैं. इसके जवाब में यही कहा जा सकता है कि क्या भारत जाहिलियत के कंपटीशन में शामिल हो चुका है.

बहरहाल, रविवार के दिन उसी वैचिरिकी से जुड़ी हिंदू महासभा ने दिल्ली के मंदिर मार्ग पर स्थिति दफ्तर में गोडसे बलिदान दिवस मनाया. यह भी ऐतिहासिक तथ्य है कि इसी भवन के एक कमरे में गोडसे गांधी की हत्या से पहले ठहरा हुआ था. महासभा ने गांधी हत्या को जायज ठहराने वाले 150 कारणों का एक खर्रा जारी किया. ये वही कारण हैं जिन्हें कभी अपने बचाव में गोडसे ने कोर्ट के सामने रखा था.

इस मौके पर हिंदुत्व के कुछ नायकों मसलन केरल हाउस में बीफ की शिकायत करने वाले हिंदू सेना के प्रमुख विष्णु गुप्ता और कश्मीर के विधायक अब्दुल राशिद पर स्याही फेंकने वाले देवेंद्र उपाध्याय को "आज के गोडसे" सम्मान से सम्मानित किया गया.

सभा के मुताबिक गोडसे का बलिदान दिवस देश के लगभग 85 जिलों में मनाया गया. गोडसे की महानता से जुड़े विषयों का एक संकलन 'नाथूराम गोडसे, एक परिचय' की प्रतियां भी लोगों को बांटी गईं. दिल्ली में हुए आयोजन की खासियत यह रही कि हाल के दिनों में कानून व्यवस्था से जुड़े जितने भी विवाद चर्चा में आए थे उनके आरोपियों को हिंदू महासभा ने बाकायदा सम्मानित किया.

कुछ महीने पहले आइटीओ चौराहे पर गायों से भरे ट्रक रोककर लूटपाट करने वालों को गौरक्षक सम्मान से नवाजा गया. पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध करने वालों की भी हौसला अफजायी की गई. देश के कानून को इस दिशा में गंभीर मंथन करना होगा कि अपराधी तत्वों को खुलेआम समर्थन देने वालों से निपटने का उसके पास क्या तरीका है.

देश के कानून को इस दिशा में गंभीर मंथन करना होगा कि अपराधी तत्वों को खुलेआम समर्थन देने वालों से निपटने का उसके पास क्या तरीका है.

कार्यक्रम का आयोजन शिवसेना से बाहर कर दिए गए और फिलहाल राष्ट्रवादी शिवसेना नाम का संगठन चला रहे जय भगवान गोयल ने किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने रंग बदल लिया है. गौरक्षकों के साथ पुलिस कड़ी कार्रवाई कर रही है. सरकार को जानने की जरूरत है कि आज हर गांधी के बदले 100 गोडसे पैदा हो रहे हैं.

तो साठ-सत्तर साल के भीतर देश वहां पहुंच गया है जहां हत्यारे और नायक के बीच का भेद मिट चुका है. 78 साल के बुज़ुर्ग महात्मा गांधी की हत्या जिस कट्टरपंथी ने की थी वह कोई अकेला इंसान नहीं था. उसके साथ साजिश में बहुत सारे लोग शामिल थे. तत्कालीन गृह मंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल ने बताया था कि गांधी की हत्या के बाद कुछ लोगों ने खुशी में मिठाइयां बांटी थीं.

हम आज उस मोड़ पर आ पहुंचे हैं जहां अब तक दबे-छुपे खुशियां मनाने वाले, मिठाइयां बांटने वाले, सहानुभूति रखने वाले खुलेआम इस शर्मनाक कुकृत्य पर गर्व करने की हिम्मत रखते हैं. देश नाथूराम जैसों को सम्मान दे रहा है, गोडसे के मंदिर बनने वाले खड़े हो गए हैं. पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगाने की भी कोशिशे की गई.

यह उस कृतघ्न राष्ट्र की कहानी है जिसने साठ-सत्तर सालों में ही अपना रंग बदल लिया है. आज गांधी को गाली देना फैशन हो गया है. दबी छिपी खबरें सामने आईं थी कि हिंदू सेना, लक्ष्मण सेना, भगत सिंह सेना टाइप किसी अज्ञात संगठन ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर हत्यारे गोडसे की मूर्ति स्थापित करने की योजना बना डाली थी.

किसी अज्ञात संगठन ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर हत्यारे गोडसे की मूर्ति स्थापित करने की योजना बना डाली थी.

देश में सहिष्णुता-असहिष्णुता को लेकर तीखी बहस चल रही है. ऐसे में मौजूदा सरकार को तय करना होगा कि वो किस तरफ़ है. उसे तय करना होगा कि इस देश के नायक गांधी हैं या उनका हत्यारा गोडसे. भारत को अगर भारत बने रहना है तो नरेंद्र मोदी को भी ये समझना होगा कि इस देश का प्रधानमंत्री गांधी और गोडसे दोनों को साथ-साथ लेकर नहीं चल सकता.

First published: 17 November 2015, 16:32 IST
 
अतुल चौरसिया @beechbazar

एडिटर, कैच हिंदी, इससे पूर्व प्रतिष्ठित पत्रिका तहलका हिंदी के संपादक के तौर पर काम किया

पिछली कहानी
अगली कहानी