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क्या कुलदीप के कांग्रेस में विलय से हरियाणा में बदलेंगे सियासी समीकरण?

राजीव खन्ना | Updated on: 27 April 2016, 22:36 IST
QUICK PILL
  • हरियाणा जनहित कांग्रेस (एचजेसी) के कांग्रेस में विलय की घोषणा हो चुकी है. एचजेसी ने पिछला लोकसभा चुनाव बीजेपी के संग मिलकर लड़ा था.
  • राजनीतिक जानकारों के अनुसार कांग्रेस ने गैर-जाटों को कांग्रेस से जोड़ने के लिए उठाया है ये कदम.

हरियाणा जनहित कांग्रेस के कांग्रेस में विलय की घोषणा हो गई है. माना जा रहा है कांग्रेस ने गैर-जाटों को बचाए रखने के लिए ये फैसला लिया है.

कुछ समय पहले हरियाणा में जाटों द्वारा की गई हिंसा के बाद कांग्रेस ने सोची-समझी रणनीति के तहत ये फैसला लिया है. वहीं एचजेसी के नेता चाहते हैं कि कांग्रेस में गैर-जाट नेताओं के लिए खाली जगह उन्हें मिल जाए.

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दोनों पार्टियों के विलय की घोषणा से पहले एचजीसी के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिले थे. बिश्नोई अभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे. उसके बाद ही दोनों दलों का आधिकारिक विलय होगा.

भजन लाल ने 2007 में कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया था

साल 2007 में हरियाणा के पूर्व सीएम भजन लाल ने कांग्रेस से अलग होकर जनहित कांग्रेस बनाई थी. भजन लाल 2004 के चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद भुपिंदर सिंह हुड्डा को सीएम बनाए जाने से नाराज थे.

साल 2009 के विधानसभा चुनाव में एसजेसी ने बीजेपी से हाथ मिलाया. उसे राज्य में छह सीटों पर जीत मिली. लोकसभा चुनाव में भी भजनलाल को हिसार से जीत मिली. उनके निधन के बाद 2011 में हिसार लोकसभा सीट से उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई जीते.

2014 लोकसभा चुनाव भी एचजेसी ने बीजेपी के संग मिलकर लड़ा था. इस बार बिश्नोई इंडियन लोकदल के दुष्यंत चौटाला से हार गए.

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जिसके बाद बीजेपी से उनकी दूरी बढ़ गयी और आखिरकार दोनों अलग हो गए. बीजेपी से अलग होने के बाद एचजेसी ने विनोद शर्मा की हरियाणा जन चेतना पार्टी से 2014 के विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन कर लिया. एसजेसी को इस चुनाव में महज दो सीटों पर जीत मिली थी.

माना जाता है कि बिश्नोई का बीजेपी से मुख्य विरोध सीट बंटवारे को लेकर उभरा था. एचजेसी सीएम के पद के साथ राज्य की आधी सीटें खुद लिए चाहती थी. खबरों के अनुसार लोक सभा चुनाव से पहले बीजेपी इसके लिए तैयार थी लेकिन लोक सभा के नतीजे आने के बाद वो इससे आनाकानी करनी लगी. खबरों के अनुसार बीजेपी ने राज्य की 90 सीटों में से एचजेसी को 25 देने के लिए तैयार थी.

कुलदीप बिश्नोई बीजेपी पर धोखा देने और लोक सभा चुनाव में अकेला छोड़ देने का आरोप लगाते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस और एचजेसी दोनों के लिए ये विलय का मुफीद वक्त है.

राजनीतिक विश्लेषक बलवंत तक्षक कहते हैं, "ये कांग्रेस के अंदर संतुलन बनाने की कवायत है. जाट नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा का कद काफी बढ़ गया था. इसीलिए गैर-जाट बिश्नोई को लाया गया है. हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष डॉक्टर अशोक तंवर के साथ मिलकर वो शक्ति का संतुलन बनाएंगे."


तंवर और हुड्डा को राजनीति प्रतिद्वंद्वी माना जाता है. माना जा रहा है कि बिश्नोई के कांग्रेस में वापसी की पटकता तंवर ने ही लिखी है.

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राज्य में हुई जाट हिंसा के बाद से यहां की राजनीति का तेजी से ध्रुवीकरण हुआ है. बीजेपी कांग्रेस और आईएनएलडी को जाटों की पार्टी बताने लगी है. इसका उसे राजनीतिक फायदा होता भी दिख रहा है.

बीजेपी के इस दांव के जवाब में कांग्रेस ने बिश्नोई का पत्ता चला है. तक्षक कहते हैं, "बिश्नोई लगातार कहते रहे है कि बीजेपी ने उन्हें धोखा दिया है. लोक सभा चुनाव में नरेंद्र मोदी एचजेसी की रैलियो के लिए नहीं आए. उनका आरोप है कि मोदी ने उन्हें अकेला छोड़ दिया. इसलिए शायद वो बदला लेने के लिए कांग्रेस से जा मिले."

राज्य में विधान सभा चुनाव होने में काफी वक्त है ऐसे में बिश्नोई और उनके साथी आराम से कांग्रेस में घुल जाएंगे.

बिश्नोई के पिता भजनलाल 'हरियाणा के तीन लाल' में से एक थे. बाकी दो थे बंसीलाल और देवीलाल. बंसीलाल की बहू किरण चौधरी पहले से ही कांग्रेस में हैं.

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2009 में कांग्रेस के पास 40 विधायक थे. वो एचजेसी के छह विधायको का समर्थन चाहती थी लेकिन बिश्नोई ने इनकार कर दिया था. हालांकि कांग्रेस इन छह में से पांच एचजेसी विधायकों ने बाद में कांग्रेस को समर्थन दे दिया था.

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी से गठबंधन करके एचजेसी हिसार और सिरसा से चुनाव लड़ी लेकिन दोनों सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा.

2014 के विधान सभा चुनाव में भी एचजेसी से मात्र दो सीटों पर जीत मिली थी. एचजेसी से केवल बिश्नोई और उनकी पत्नी रेणुका ही चुनाव जीत सकीं.

कांग्रेस में विलय के बाद एचजेसी के नेताओं का क्या होगा ये तो वक्त बताएगा. लेकिन कांग्रेस में घर वापसी के बाद बीजेपी ने बिश्नोई पर तीखा हमला करना शुरू कर दिया है.

बीजेपी नेता अनिल विज इस विलय को दो डूबते  जहाजों का मिलन कहते हैं. वहीं राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि इससे पता चलता है कि राज्य में विपक्ष सिकुड़ रहा है.

First published: 27 April 2016, 22:36 IST
 
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