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होली पर भारतेन्दु हरिश्चंद्र की ये कविता पढ़कर प्यार में सराबोर हो जाएंगे आप

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 March 2020, 14:09 IST

होली एक ऐसा त्योहार है जिस पर हिंदी साहित्य की परंपरा में खूब लिखा-पढ़ा गया है. लेकिन हिंदी के प्रतिष्ठित कवि भारतेंदु हरिश्चंद की होली पर लिखी एक कविता पढ़कर आप होली के साथ प्रेम में भी सराबोर हो जाएंगे.

गले मुझको लगा लो ऐ दिलदार होली में,

बुझे दिल की लगी भी तो ऐ यार होली में

नहीं ये है गुलाले-सुर्ख उड़ता हर जगह प्यारे,

ये आशिक की है उमड़ी आहें आतिशबार होली में

गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझको भी जमाने दो,

मनाने दो मुझे भी जानेमन त्योहार होली में

है रंगत जाफ़रानी रुख अबीरी कुमकुम कुछ है,

बने हो ख़ुद ही होली तुम ऐ दिलदार होली में

रस गर जामे-मय गैरों को देते हो तो मुझको भी,

नशीली आँख दिखाकर करो सरशार होली में

भूलकर भी न करें होली पर ये बड़ी गलतियां, वरना पड़ जाएंगे लेने के देने

इस बार होली पर 499 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग, सभी राशियों के जातकों को होंगे ये लाभ

First published: 6 March 2020, 14:09 IST
 
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