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संसद में गृह मंत्री का बयान- 4 अगस्त के बाद से कश्मीर में गिरफ्तार किये गए 5000 से ज्यादा लोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 November 2019, 15:24 IST

संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति अब सामान्य है. गृह मंत्री ने राज्यसभा को बताया कि स्थानीय प्रशासन से इनपुट के बाद उचित समय पर इंटरनेट सुविधाएं बहाल की जाएंगी. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में कम से कम 5,161 लोगों को 4 अगस्त से गिरफ्तार किया गया था. गृह मंत्री ने यह भी बताया कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद पुलिस गोलीबारी के कारण एक भी व्यक्ति मौत नहीं हुई है.

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि सुरक्षा कारणों से जम्मू एवं कश्मीर में पहले भी इंटरनेट सेवा पर प्रतिबंध लग चुका है, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि स्थिति सुधरते ही सेवा बहाल कर दी जाएगी. इंटनरेट सेवा के अलावा, आजाद ने राज्य में शिक्षा का मुद्दा भी उठाया. इसी साल पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद से राज्य में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है.

जम्मू एवं कश्मीर में अनुच्छेद 144 लागू किए जाने के मुद्दे पर शाह ने कहा कि यह धारा कुछ थाना क्षेत्रों में सिर्फ सीमित समय शाम आठ बजे से सुबह छह बजे तक लागू है. उन्होंने कहा, "कुल 195 पुलिस थानों में से एक में भी धारा 144 लागू नहीं है. यह पूरी तरह से हटा दी गई है. एहतियातन यह शाम आठ बजे से सुबह छह बजे तक लगाई जाती है, वह भी चुनिंदा पुलिस थानों के क्षेत्रों में."

अमित शाह ने कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद से कहा "मैं गुलाम नबी आज़ाद साहब को चुनौती देता हूं कि इन तथ्यों का मुकाबला करें, जो मैंने प्रस्तुत किए, आप इन आंकड़ों को रिकॉर्ड पर आपत्ति क्यों नहीं देते? मैं इस मुद्दे पर एक घंटे के लिए भी चर्चा करने को तैयार हूं." इससे पहले कांग्रेस पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गांधी परिवार के लिए विशेष सुरक्षा समूह कवर हटाने का मुद्दा उठाया.

एनआरसी सबके लिए 

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो अन्य धर्मों को शामिल न करे. भारत के सभी नागरिक चाहे वे किसी भी धर्म के हों, NRC सूची में शामिल होंगे. उन्होंने कहा NRC नागरिकता संशोधन विधेयक से अलग है.

उन्होंने कहा"हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को नागरिकता मिलनी चाहिए, इसीलिए नागरिकता संशोधन विधेयक की आवश्यकता है ताकि पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले इन शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिल सके." - एजेंसी इनपुट के साथ 

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First published: 20 November 2019, 14:59 IST
 
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