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वसीयत पर विवाद, ठाकरे परिवार का क्या है राज?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
QUICK PILL
  • बाल ठाकरे की मृत्यु के चार वर्ष बाद उनका उत्तराधिकार विवादों में घिरता नजर आ रहा है. ताजा विवाद उनके परिवार में चल रही संपत्ति के विवाद को लेकर है.
  • बाल ठाकरे के दूसरे बेटे जयदेव ठाकरे ने उस मामले को सार्वजनिक कर दिया है जिसे कई लोग ठाकरे परिवार का स्याह पहलू मानते हैं.
  • जयदेव ने 2013 में अपने पिता की वसीयत को लेकर याचिका दायर की थी जिसे 2012 में सार्वजनिक किया गया था. ठाकरे की मौत के बाद उनका वसीयतनामा सार्वजनिक किया गया था. अपनी वसीयत के जरिये बाला साहेब ठाकरे ने अपनी पूरी संपत्ति उद्धव के नाम कर दिया है और इसमें जयदेव को कुछ भी नहीं मिला.

बाल ठाकरे और विवाद साथ-साथ चलते रहे हैं. उनकी मृत्यु के चार वर्ष बाद उनका उत्तराधिकार भी विवादों में घिरता नजर आ रहा है. ताजा विवाद उनके परिवार में चल रही संपत्ति के विवाद को लेकर है. बाल ठाकरे के दूसरे बेटे जयदेव ठाकरे ने उस मामले को सार्वजनिक कर दिया है जिसे कई लोग ठाकरे परिवार का स्याह पहलू मानते हैं.

18 जुलाई से जयदेव बंबई हाईकोर्ट में लगातार गवाह के तौर पर पेश हो रहे हैं जबकि उनके छोटे भाई उद्धव ठाकरे के वकील उनसे सवाल तलब कर रहे हैं. 

जयदेव ने 2013 में अपने पिता की वसीयत को लेकर याचिका दायर की थी जिसे 2012 में सार्वजनिक किया गया था. ठाकरे की मौत के बाद उनका वसीयतनामा सार्वजनिक किया गया था. अपनी वसीयत के जरिये बाला साहेब ठाकरे ने अपनी पूरी संपत्ति उद्धव के नाम कर दिया है और इसमें जयदेव को कुछ भी नहीं मिला.

जयदेव का दावा है कि 2011 के बीच उनके पिता की मानसिक हालत खराब हो गई थी और इसका फायदा उठाते हुए उद्धव ने वसीयतनामा तैयार करवाया. उन्होंने कहा कि उद्धव ने कथित तौर पर उनके पिता को प्रभावित कर वसीयत बनवाया.

जयदेव का कहना है कि उनके पिता संपत्ति में उन्हें हिस्सा देना चाहते थे क्योंकि उनकी संपत्ति में वाजिब हिस्सेदारी बनती थी. वह दोनों ठाकरे बंधुओं से बड़े हैं इसलिए हिंदू उत्तराधिकार एक्ट के तहत अपने पिता की संपत्ति में उनकी हिस्सेदारी बनती है.

संपत्ति को लेकर आमने-सामने ठाकरे बंधु?

हालांकि ठाकरे भाईयों के बीच जारी संघर्ष जयदेव की तरफ से कोर्ट को बताए गए खुलासे से जुड़ा नहीं है. उनका बयान उनकी पूर्व पत्नी स्मिता ठाकरे और बेटे ऐश्वर्य के बारे में है जिसे उनका बेटा भी माना जाता है.

जयदेव ने 20 जुलाई को कोर्ट को बताया कि ऐश्वर्य वास्तव में उनका बेटा नहीं है. जयदेव को बाल ठाकरे की वसीयत में कुछ नहीं मिला जबकि ऐश्वर्य को मातोश्री में एक पूरा फ्लोर दिया गया. जबकि अधिकांश प्रॉपर्टी उद्धव को मिल गई.

जयदेव ने कहा कि उनकी पहली पत्नी स्मिता के साथ लगातार होने वाले लड़ाई झगड़े की वजह से उन्हें 1999 में मातोश्री से बाहर निकलना पड़ा. स्मिता हालांकि तलाक तक यानी 2004 तक मातोश्री में रहीं. स्मिता इस दौरान राजनीति में भी रही और उन्हें फिल्म प्रोडक्शन में भी नाम बनाया. 

1999 में एक इंटरव्यू में उन्होंने कह था, 'मेरे पति दूसरी महिलाओं के प्रति आकर्षित थे. उन्होंने मुझे और मेरे बच्चे को छोड़ दिया. मुझे अपना भविष्य में अंधकारमय दिख रहा था. इस वक्त में मेरे ससुर ने मेरा साथ दिया और उन्होंने मुझे घर में रहने के लिए कहा.'

ऐश्वर्य के लिए ठाकरे की दरियादिली

ऐश्वर्य को जो संपत्ति मिली वह वसीयत में मौजूद विसंगति की तरफ इशारा करती है. जयदेव, उनके दूसरे बेटे और उद्वव के बेटे को भी वसीयत में कुछ नहीं मिला. यहां तक कि बाल ठाकरे के सबसे बड़े बेटे बिंदु माधव को भी कुछ नहीं मिला. 

वसीयतनामे में मातोश्री, करजत का फॉर्महाउस, बांद्रा में एक प्लॉट और बैंक डिपॉजिट का जिक्र किया गया था. उद्धव और उनके सहयोगियों ने इन सबकी कीमत 14.85 करोड़ रुपये लगाई थी.

जैसे ही जयदेव ने कोर्ट में ऐश्वर्य के बारे में बताना शुरू किया, जज ने मामले की कार्यवाही लंच तक के लिए रोक दी. लंच के दौरान जज ने दोनों पक्ष के वकील को अपने चैंबर में बुलाया और उनसे चर्चा की. चर्चा के बाद जब कार्यवाही शुरू हुई तब जज ने मीडिया को अनिश्चितकाल के लिए कोर्ट की कार्यवाही में भाग लेने से रोक दिया.

First published: 22 July 2016, 7:49 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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