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167 सेकेंड का चमत्कार है भारत-पाकिस्तान वार्ता की शुरुआत

भारत भूषण | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST
QUICK PILL
  • भारत पाकिस्तान संबंधों पर नजर रखने वाले कुछ लोग मोदी सरकार पर यू-टर्न लेने का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन कुछ विश्वस्त सूत्रों के अनुसार बातचीत की पहल नवाज शरीफ की तरफ से हुई थी. उन्होंने मोदी को आश्वासन दिया कि पाक सेना भी चाहती है बातचीत बहाल हो.
  • भारत आतंकवाद पर अलग से बातचीत की जिद को अपनी सफलता मान रहा है लेकिन हो सकता है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग होते जा रहे पाकिस्तान ने कूटनीति के तहत लिया हो फैसला.

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर नजर रखने वाले नरेंद्र मोदी सरकार पर पाकिस्तान से बातचीत के मुद्दे पर यू-टर्न लेने का आरोप लगा रहे हैं. ऐसे लोगों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने का शोरगुल थमने के बाद ये बातचीत पुराने ढर्रे पर लौट आएगी.

रूस के उफा में हुए सम्मेलन के बाद अनुमान लगाया गया कि मोदी सरकार दोनों देशों की बातचीत के लिए नए नियम लिखने की कोशिश कर रही है. लेकिन पेरिस में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच तीन मिनट से कुछ कम समय की फौरी बातचीत के बाद हालात पूरी तरह बदले हुए नजर आने लगे हैं. उसके बाद दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बैंकॉक में एक गुपचुप बैठक हुई.

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बैंकॉक में हुई बैठक के बाद भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अफ़गानिस्तान के मुद्दे पर होने वाली एक बैठक में शामिल होने के लिए पाकिस्तान गयीं. पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं के मिलने के बाद उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू होने की घोषणा की. हालांकि सरकार के नजरिए में आए यू-टर्न के पीछे कारणों के लेकर कोई संकेत नहीं दिया गया.

पेरिस में दोनों नेताओं के बीच की बातचीत का ब्योरा अब छन छन कर बाहर आने लगा है.


यू-टर्न की वजह


ऐसा लगता है कि पेरिस में नवाज शरीफ ने मोदी को आश्वस्त किया कि पाकिस्तानी सेना दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने लिए उत्सुक है. वो दोनों देशों के संबंधों के बीच सबसे बड़े रोड़े 'भारत विरोधी आतंकवाद' पर लगाम लगाने के लिए भी तैयार हैं.

ऐसा प्रतीत होता है कि पेरिस सम्मेलन के मौके पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच मुलाकात की पहल नवाज शरीफ की तरफ से की गयी थी.

सरकार के करीबी सूत्रों की मानें तो कुल 167 सेकंड की इस बातचीत में शरीफ ने मोदी से कहा कि पाकिस्तान आगे बढ़कर बातचीत शुरू करना चाहता है. सूत्रों के अनुसार उन्होंने मोदी को इस बात का भरोसा दिलाया कि इसमें पाकिस्तानी सेना की भी रजामंदी है.

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कहा जा रहा है कि नवाज शरीफ ने मोदी को बताया कि पाकिस्तानी सेना के मौजूदा प्रमुख चीफ जनरल राहिल शरीफ अपने पूववर्ती सेनाध्यक्ष अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी  से अलग हैं. माना जाता था कि कियानी भारत को लेकर काफी कट्टर रुख रखते थे. इस बातचीत में मोदी को कहा गया कि पाकिस्तानी सेना के मौजूदा मुखिया हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ हैं और उनपर कार्रवाई भी कर रहे हैं.

शरीफ ने मोदी को आश्वासन दिया कि पाकिस्तानी सेना भारत विरोधी हिंसा में शामिल लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों पर भी कार्रवाई कर रही है. मोदी को भरोसा दिलाया गया कि बातचीत शुरू होने पर इसके नतीजे जल्द देखने को मिलेंगे.

माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी ने अजित डोभाल से पाकिस्तानी सुरक्षा सलाकार से कड़े शब्दों में बात करने के लिए कहा था

सूत्रों के अनुसार इस आश्वासन के बाद ही मोदी दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत के लिए तैयार हुए. इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नासिर खान जंजुआ के बीच छह दिसंबर को बैंकॉक में बैठक हुई.

माना जा रहा है कि मोदी ने डोभाल से पाकिस्तानी सुरक्षा सलाहकार से कड़े शब्दों में अपनी बात रखने के लिए कहा था. कहा जा रहा कि डोभाल ने बातचीत में बहुत ब्लंट तरीके से भारत का पक्ष रखा. सूत्रों के अनुसार उन्होंने जांजुआ से सीधे शब्दों में कहा कि अगर पाकिस्तान भारत विरोधी आतंकवाद पर रोक नहीं लगाएगा तो उसे  आंतरिक अस्थिरता से मुक्ति नहीं मिलेगी.

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एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा,  "डोभाल बातचीत में कितने ब्लंट थे ये तो वही जानते हैं." हालांकि उन्होंने ये जरूर बताया कि पाकिस्तीन वार्ताकार ने पहले की तरह अड़ियल रुख नहीं अपनाया. वो भारत का पक्ष का सुनने के लिए तैयार थे. चार घंटे तक चली इस बातचीत में पाकिस्तानी वार्ताकार ने भारत को भरोसा दिलाया कि जम्मू-कश्मीर समेत पूरे भारत में किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि को पाकिस्तान से प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन नहीं मिलेगा.

भारतीय वार्ताकारों को भले ही लग रहा हो कि ये एक अच्छी शुरुआत है लेकिन इस संभावना से भी नहीं इनकार किया जा सकता कि पाकिस्तानी वार्ताकारों का मौजूदा रुख आतंकवाद के मसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग प़ड़ जाने के बाद अपनायी गयी एक रणनीति भर हो.

इस बातचीत से ठीक पहले पाकिस्तानी मूल की महिला तफशीन मलिक ने अपने पति के साथ मिलकर अमेरिका के कैलिफोर्निया में गोलीबारी करके 14 लोगों को मार दिया और 21 लोगों को घायल कर दिया. पश्चिम के अलावा अब कुछ मुस्लिम देशों में भी पाकिस्तान को इस्लामी चरमपंथ के स्रोत के रूप में देखा जाने लगा है.

इसीलिए कूटनीतिक रणनीतिकारों ने पाकिस्तान को अपने छवि सुधारने की सलाह दी. अपनी छवि बदलने के लिए पाकिस्तान का भारत की तरफ हाथ बढ़ाना उसकी जरूरत बन चुका है.

जो भी हो भारतीय रणनीतिकार बैंकॉक से इस बात से संतुष्ट होकर लौटे हैं कि पाकिस्तान भारत की सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देगा.

साझा बयान के विषय


सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी दौरे में वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और विदेशी नीति सलाहकार सरताज अज़ीज़ से मुलाकात की. उसके बाद दोनों देशों की तरफ से जारी साझा बयान से भी भारत के इस सोच की झलक मिलती है.

इस साझा बयान के दूसरे पैराग्राफ़ में कहा गया है, "विदेश मंत्री और विदेश नीति सलाहकार आतंकवाद की निंदा करते हैं और इसे मिटाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं. आतंकवाद और सुरक्षा के मसले पर दोनों देशों के सलाहकारों को सफल बातचीत की और निर्णय लिया कि भविष्य में भी वो आतंकवाद के मुद्दे पर बातचीत जारी रखेंगे. भारत मुंबई हमलों के मामले से जुड़ी अदालती कार्रवाई में तेजी लाने के लिए उठाए गए कदमों से भी संतुष्ट है."

साझा बयान में उन विषयों की सूची भी दी गयी है जिनपर दोनों देशों के नेताओं ने बात की. इस सूची में 'आतंकवाद निरोध' को बातचीत के स्वतंत्र विषय के रूप में दिखाया गया है. इसके बाद प्रचारित किया जा रहा है कि भारत यही चाहता भी था- पाकिस्तान से आतंकवाद पर स्वतंत्र रुप से बात करना.

मोदी की रणनीति


नवाज शरीफ की तरफ से बढ़े हाथ को थामने के पीछे मोदी की एक और मजबूरी थी. अपनी विदेश यात्राओं के दौरान मोदी ने महसूस किया कि पाकिस्तान से बातचीत बंद होने से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक नुकसान हो रहा है.

मोदी ने महसूस किया कि आतंकवाद के अलावा बाकी मुद्दों पर पाकिस्तान के रुख में सकारात्मक बदलाव आया है. उसकी अर्थव्यवस्था पहले से बेहतर हुई है. उसे चीन और अमेरिका से फिर से आर्थिक मदद मिलनी शुरू हो गयी है. चीन के साथ उसके रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं. चीन और अमेरिका दोनों अफगानिस्तान में स्थिरता लाने के लिए पाकिस्तान पर भरोसा दिखा रहे हैं.

दूसरी तरफ मोदी ये जताने की कोशिश करते रहे हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप में अस्थिरता का सबसे बड़ा कारण पाकिस्तान है

भारत के साथ तल्ख रिश्तों का बहाना बनाकर पाकिस्तान रणनीतिक परमाणु हथियार, दूसरे मिसाइल और आयुधों के निर्माण को न्यायोचित ठहराता रहा है. उसका दावा रहा है कि भारत के 'कोल्ड स्टार्ट' युद्ध रणनीति का जवाब देने के लिए रणनीतिक परमाणु हथियार बनाना जरूरी है. कूटनीतिक रूप से भारत के लिए पाकिस्तान के परमाणु हथियार बनाने के इस तर्क को बेअसर करना जरूरी है.


समग्र वार्ता की घोषणा के बाद भी भारत में किसी को तुरंत किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है. हो सकता है कि जटिल मुद्दों पर बता करने से पहले 'धार्मिक पर्यटन' जैसे नरम विषयों पर बातचीत हो.


इस बात को लेकर भी आशंकाएं जतायी जा रही हैं कि किसी तीसरे देश के बजाय जब इस्लामाबाद या नई दिल्ली में बातचीत होगी तो किस तरह की मुश्किलें सामने आएंगी. पहले भी पाकिस्तान के हुर्रियत को बातचीत में शामिल करने पर जोर देने के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत बंद हो चुकी है. दोनों देशों में बातचीत होने की स्थिति में भविष्य में भी ऐसे मुद्दे रोड़ा अटका सकते हैं.

पाकिस्तान का दावा रहा है कि वो आतंकवाद का ज्यादा बड़ा शिकार रहा है और उसका आतंकवादियों पर कोई नियंत्रण नहीं है

आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस को बातचीत में शामिल करने पर जोर देना पाकिस्तानी के लिए महत्वपूर्ण है. हुर्रियत जम्मू-कश्मीर में आत्मनिर्णय के अधिकार और चुनाव बहिष्कार का समर्थन करता रहा है. वो अलगाववादियों को कश्मीरियों का असली नेता मानता रहा है.

पाकिस्तान के साथ आतंकवाद पर बातचीत की राह आसान नहीं है. पाकिस्तान का दावा रहा है कि वो आतंकवाद का ज्यादा बड़ा शिकार रहा है और उसका आतंकवादियों पर कोई नियंत्रण नहीं है. पाकिस्तान समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाकों के लिए भारत के हिंदुत्ववादियों आतंकियों को कठघरे में खड़ा करता रहा है.

इन आशंकाओं के बावजूद मोदी सरकार ने बातचीत जारी रखने का निर्णय लिया है. वार्ताकारों के एक नजदीकी सूत्र ने बताया, "हम देखेंगे कि इस बातचीत का क्या नतीजा निकलता है. लेकिन भारत केवल बात करने के लिए बात नहीं करेगा."

First published: 12 December 2015, 7:50 IST
 
भारत भूषण @Bharatitis

एडिटर, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में 25 से ज्यादा सालों का अनुभव. इस दौरान मेल टुडे के संस्थापक संपादक, हिन्दुस्तान टाइम्स के कार्यकारी संपादक, द टेलीग्राफ, दिल्ली के संपादक, एक्सप्रेस न्यूज़ सर्विस के संपादक, इंडियन एक्सप्रेस के वॉशिंगटन संवाददाता, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सहायक संपादक के रूप में काम किया.

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