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गैर-कानूनी 'कानून' के तहत मध्य प्रदेश पुलिस ने की कार्रवाई

अनुप दत्ता | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
  • मध्य प्रदेश में तीन लोगों पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की पैरोडी तस्वीर बनाने के लिए मामला दर्ज किया है.
  • पुलिस ने इन लोगों पर आईपीसी की धारा 153 के साथ ही आईटी एक्ट की धारा 66(A) के तहत भी मामला दर्ज किया है जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है.

मध्य प्रदेश पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट की जिस विवादित धारा 66(A) का प्रयोग किया है उसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ही रद्द कर दिया था. पहले भी इस धारा के तहत कई लोगों पर इंटरनेट पर की गयी उनकी टिप्पणियों के कारण मामला दर्ज किया गया था.

इन युवकों पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की पैरोडी तस्वीर पोस्ट और शेयर करने का आरोप है. मध्य प्रदेश के कोटमा पुलिस थाने के प्रभारी सुनील गुप्ता कहते हैं, "हमने स्थानीय लोगों की शिकायत पर कोटमा निवासी दानिश मोहम्मद को गिरफ्तार किया. हमने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 153 और आईटी एक्ट की धारा 66(A) के तहत मामला दर्ज किया है."

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पिछले हफ्ते 16 मार्च को मध्य प्रदेश के खारगांव जिले के दो अन्य नौजवानों पर भी इसी तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए मामला दर्ज किया. शुक्रवार को अदालत ने इन अभियुक्तों को जमानत दे दी.

मध्य प्रदेश में तीन लोगों को ऐसे कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है जिसे सुप्रीम कोर्ट रद्द कर चुका है

पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66(A) को रद्द कर दिया था. इस धारा के तहत इंटरनेट पर 'अति-आपत्तिजनक' टिप्पणियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का प्रावधान था. इसे आटी एक्ट में साल 2008 में जोड़ा गया था. इसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक सज़ा हो सकती है.

नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और कानून के छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में इस कानून के खिलाफ अपील की. जिसपर सुनवायी करते हुए उच्चतम अदालत ने इसे गैर-कानूनी ठहराया. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस कानून में 'अति-आपत्तिजनक' शब्द को बहुत ही ढिलाई से प्रयोग किया गया और इसकी मनमानी व्याख्या संभव है.

पुलिस ने इस कानून के तहत कई लोगों पर फेसबुक पोस्ट के कारण मामला दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया था.

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 100 पुराने पड़ चुके कानूनों को रद्द करवाने की मुहिम चला रखी है

2012 में महाराष्ट्र में दो लोगों को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि उन्होंने एक स्थानीय नेता की मौत पर पूरे शहर को बंद कराने की फेसबुक पर आलोचना की थी. पुलिस ने पोस्ट लिखने वाली लड़की और पोस्ट लाइक करने वाले दोस्त, दोनों को गिरफ्तार कर लिया था. बाद में दोनों को जमानत पर रिहा हुए.

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मार्च, 2015 में यूपी पुलिस ने बरेली के एक युवक को सपा नेता आज़म ख़ान पर 'आपत्तिजनक' टिप्पणी के आरोप में एक किशोर को गिरफ्तार कर लिया था. किशोर को बाद में अदालत से जमानत मिली.

कई नागरिक संगठन ने ऐसे 100 कानूनों को रद्द कराने के लिए मुहिम चला रखी है जो पुराने पड़े चुके हैं या आम नागरिकों की निजता या सुरक्षा के खिलाफ जाते हैं.

‘100 लॉज रिपील प्रोजेक्ट’ नामक इस मुहिम में इन संगठनों विशेषज्ञों की राय के आधार पर सूची बनायी है. इनका मक़सद है कानून को आम लोगों के लिए सरल और सुलभ बनाना.

First published: 21 March 2016, 10:28 IST
 
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