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पाकिस्तान का बालाकोट कैसे बना इस्लामिक जिहाद का अड्डा ?

सुनील रावत | Updated on: 1 March 2019, 13:09 IST

 

बालाकोट, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक सुदूर घाटी में बसा शहर है, जहां भारतीय वायु सेना ने बीते दिनों को जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया. बालाकोट दक्षिण एशिया में जिहाद का उपरिकेंद्र माना जाता है. किताब 'पार्टिशन ऑफ़ अल्लाह-जिहाद इन एशिया' में इसका विस्तार से जिक्र किया गया है. इस किताब में इतिहासकार आयशा जलाल ने लिखा है कि बालाकोट में जिहाद के विचार और अभ्यास की एक लंबी परंपरा यही है.

जलाल ने मार्च 2010 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित किताब में उल्लेख किया था कि बालाकोट वह स्थान है जहां सैय्यद अहमद (1786-1831) और शाह इस्माइल (1779-1831) ने महाराजा रणजीत सिंह के सिख साम्राज्य के खिलाफ जिहाद छेड़ा और 6 मई 1831 को लड़ाई शुरू की.

किताब में कहा गया है कि "दक्षिण एशिया में जिहाद के विचार और अभ्यास के साथ बालाकोट की दोस्ती 1990 के दशक में हुई, जब उग्रवादी समूहों ने मुस्लिम देशों में तैनात सुरक्षा बलों के खिलाफ अपने अभियान के लिए तैयारी करने के लिए अपने आतंकियों के लिए यहां प्रशिक्षण शिविर लगाए.

इन आतंकवादियों के लिए सैय्यद अहमद और शाह इस्माइल महान नायक हैं, जिनके जिहाद के लिए उनके प्रशंसक अनुकरण करना चाहते हैं. खैबर पख्तूनख्वा का बालाकोट वह स्थान है जहां से जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े प्रशिक्षण शिविर ने पुलवामा आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली.

 

बालाकोट, JeM का केंद्र बनने के लिए भारतीय खुफिया एजेंसियों के रडार पर था. खुफिया एजेंसियों को यकीन था कि पुलवामा हमले की योजना बालाकोट में भी बनाई गई थी जहां मसूद अजहर के बेटे अब्दुल्ला ने भी आतंकी प्रशिक्षण लिया था. बालाकोट का स्थान एलओसी से दूर है जिसने इसे आतंकवादी प्रशिक्षण के लिए एक सुरक्षित जगह बनाया. ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना की बॉर्डर एक्शन टीम बालाकोट में आतंकियों को प्रशिक्षण देती है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कह कि शिविर में कई आतंकियों को ट्रेनिंग दी जा रही थी. यह JeM और अन्य आतंकी संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण केंद्र था और इसमें प्रशिक्षुओं और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए सुविधाओं को समायोजित करने के लिए कई संरचनाएं बनाई गई थी.

बालाकोट शहर से 20 किलोमीटर दूर स्थित इस शिविर का इस्तेमाल युद्ध के दौरान किया जाता था और इसके प्रशिक्षक पाकिस्तान सेना के पूर्व अधिकारी थे. सूत्रों ने कहा कि जेईएम के संस्थापक मसूद अजहर और अन्य आतंकी यहां प्रेरणादायक व्याख्यान देते थे. सूत्रों ने कहा कि अजहर के रिश्तेदारों और कैडरों को हथियार और रणनीतिक तौर पर बालाकोट में प्रशिक्षण दिया गया था.

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First published: 1 March 2019, 13:09 IST
 
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