Home » इंडिया » How Prashant Kishor plans to deliver UP to the Congress in 2019
 

प्रशांत किशोर का मिशन कांग्रेस और उत्तर प्रदेश

पाणिनि आनंद | Updated on: 11 February 2017, 6:46 IST
QUICK PILL
  • प्रशांत किशोर को अब उत्तर प्रदेश में 2019 में कांग्रेस को उबारने की जिम्मेदारी दी गई है. उत्तर प्रदेश में किशोर की जिम्मेदारी की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कहीं भी दिखाई नहीं देती है.
  • किशोर की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने पर होगा. मोदी और नीतीश कुमार के साथ काम करते वक्त हालांकि किशोर को यह काम नहीं करना पड़ा.

उन्होंने दो चुनावों में चौंकाने वाले नतीजे दिए हैं. पहला 2014 का आम चुनाव जिसमें नरेंद्र मोदी को शानदार सफलता मिली और दूसरा बिहार विधानसभा चुनाव जिसमें नीतीश कुमार को बीजेपी गठबंधन के ऊपर जबरदस्त निर्णायक जीत मिली.

प्रशांत किशोर को अब उत्तर प्रदेश में 2019 में कांग्रेस को उबारने की जिम्मेदारी दी गई है. उत्तर प्रदेश में किशोर की जिम्मेदारी की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कहीं भी दिखाई नहीं देती है. तो फिर किशोर इस चुनौती को कैसे पूरा करेंगे?

किशोर की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने पर होगा. मोदी और नीतीश कुमार के साथ काम करते वक्त हालांकि किशोर को यह काम नहीं करना पड़ा. 

दोनों चुनावों में किशोर ने सिर्फ और सिर्फ चुनावी प्रचार अभियान की कमान संभाली. वास्तव में उन्होंने पार्टी संगठन को नजरअंदाज करते हुए अपना वार रुम बनाया जिसमें सिर्फ उनके लोग थे.

संगठन बनाएंगे किशोर

इस बार किशोर के सामने दूसरी चुनौती है. कांग्रेस ने किशोर को पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए हायर किया है. उनके पास 2017 के चुनाव में जाने से पहले एक साल का समय बचा है. 

निश्चित तौर पर 2017 विधानसभा चुनाव किशोर की टेस्टिंग होगी लेकिन असली परीक्षा 2019 के लोकसभा चुनाव में होगी.

उत्तर प्रदेश की 80 संसदीय सीटों में से कांग्रेस के पास महज 2 सीटें हैं और दोनों ही सीटें गांधी परिवार के पास है. वहीं बीजेपी के पास 73 सीटें हैं. 2009 विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को 28 सीटें मिली थी और ऐसे में किशोर से इससे ज्यादा की उम्मीद होगी. इसके लिए किशोर को अधिक से अधिक सीटें भाजपा से छीननी पड़ेंगी. 

2019 में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की लड़ाई सपा और बसपा से नहीं बीजेपी से होगी

पिछले कुछ हफ्तों में किशोर ने पार्टी के बड़े नेताओं से लेकर छोटे अधिकारियों के साथ कई बैठके की हैं ताकि वह राज्य में कांग्रेस को लेकर लोगों की मानसिकता को समझ सकें.

अगली रणनीति अपने लोगों को तैनात करने की होगी. उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से 20 लोगों को मांगा है जो टिकट की उम्मीद के बिना पार्टी के लिए काम करने को तैयार हो. कम से कम कुछ सालों के लिए तो उन्हें पार्टी के लिए ही काम करना होगा. इन लोगों की छवि 'साफ सुथरी' होनी चाहिए और 'सक्रिय राजनीतिक' जीवन होना चाहिए.

मेहनती कार्यकर्ताओं की तैनाती

किशोर पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर उन्हें संबंधित क्षेत्रों में तैनात करेंगे. मुख्य तौर पर प्रशिक्षित कार्यकता लोगों के बीच कांग्रेस के सामाजिक और राजनीति एजेंडे को लेकर लोगों के बीच जाएंगे और उसके पक्ष में माहौल बनाएंगे. इन सभी लोगों की निगरानी प्रशांत किशोर के वार रुम से की जाएगी.

सभी कार्यकर्ता हालांकि पार्टी के संगठन के साथ ही मिलकर काम करेंगे न कि वह स्वतंत्र रूप से किशोर के लिए काम करेंगे. कांग्रेस के एक नेता ने बताया, 'यह पार्टी संगठन के अलावा काम होगा. इस तरीके से हम पार्टी के लिए और अधिक लोगों को काम पर लगाएंगे. मौजूदा ढांचे को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा.'

पूरी गतिविधि राहुल गांधी की निगरानी में होगी. कुछ सालों पहले उन्होंने युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के पुनर्गठन की जिम्मेदारी लिंगदोह और टी एस कृष्णमूर्ति को सौंपी थी. 

किशोर के लिए संगठन के साथ काम करना अच्छी खबर है क्योंकि उन्हें उत्तर प्रदेश में काम करना है. जब उन्होंने मोदी के प्रचार अभियान का जिम्मा लिया था तब उन्हें पार्टी संगठन को मजबूत नहीं करना था.

कांग्रेस फिलहाल न तो केंद्र में सत्ता में है और नहीं उत्तर प्रदेश में मजबूत स्थिति में है. इसलिए कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी संगठन को मजबूत करने की है. खबरों के मुताबिक किशोर राहुल गांधी के प्रचार अभियान का प्रबंधक बनना चाहते थे लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश में पार्टी का कायाकल्प करने की जिम्मेदारी दी गई है.

किशोर के प्रदर्शन से न केवल कांग्रेस बल्कि आने वाले समय में उनकी किस्मत भी तय होगी. 

First published: 18 March 2016, 11:39 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी