Home » इंडिया » How Sushma Swaraj and John Kerry put Pakistan in its place
 

सुषमा स्वराज और ज़ॉन केरी ने कैसे दिखाया पाकिस्तान को आईना

सादिक़ नक़वी | Updated on: 1 September 2016, 7:50 IST

नई दिल्ली की तीन दिन की यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने घोषणा की है कि भारत, अमरीका और अफगानिस्तान अगले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन से इतर त्रिपक्षीय बातचीत करेंगे.

अमरीकी राजनयिकता को लेकर यह क्षेत्र में एक अन्य संकेत है. अभी तक अमरीका अफगानिस्तान में भारत की मौजूदगी को लेकर इतना उत्सुक नहीं रहा है.

केरी ने कहा है कि अमेरिका और भारत दोनों ही देश बढ़ते आतंकवाद से निपटने, रक्षा, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं समेत अनेक बिन्दुओं पर काफी निकटता के साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमने अपने सहयोग को प्रगाढ़ किया है. अमेरिका-भारत के बीच ये संबंध निश्चित रूप से नई परिभाषा लिए हुए होंगे. 

उन्होंने आतंकियों को पनाह देने पर पाकिस्तान को आगाह भी किया जो न केवल भारत बल्कि अफगानिस्तान के लिए भी गंभीर खतरा बना हुआ है.

पाकिस्तान: घर में पल रहे आतंकवाद से 5 साल में 5.7 करोड़ डॉलर का नुकसान

कहना न होगा कि भारत अपने बिगड़ैल पड़ोसी से कह चुका है कि वह आतंकियों पर कार्रवाई करे और आतंकी संगठनों को समर्थन देना बंद करे. काबुल में अमेरिकी यूनिवर्सिटी परिसर में हमले के बाद सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के दौरान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घानी ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन करने के स्थान पर सीधे ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ को फोन किया था कि हमले की योजना पाकिस्तान की धरती पर बनाई गई थी और वे इस पर कार्रवाई करें.

हकीकत तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन और क्रूरता का मुद्दा उठा दिए जाने के कारण पाकिस्तान पहले से ही परेशानी में घिरा हुआ है. इस त्रिपक्षीय मुलाकात के कदम से पाकिस्तान फिर अलग-थलग पड़ सकता है.

स्थिर अफगानिस्तान न केवल भारत और अमरीका के हित में है बल्कि पाकिस्तान के हित में भी है

अफगानिस्तान में भारत के विकासात्मक कार्यों की तारीफ करते हुए अमरीकी विदेश मंत्री ने यह भी रेखांकित किया है कि स्थिर अफगानिस्तान न केवल भारत और अमरीका के हित में है बल्कि पाकिस्तान के हित में भी है. पाकिस्तान को भी उसे प्रोत्साहित करना चाहिए.

यह टिप्पणी उसी एक दिन आई है, जब भारत और अमरीका ने वाशिंगटन में बहुत बड़े रक्षा समझौते लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते से दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने, साजो-सामान और अन्य सेवाओं को साझा करने की अनुमति मिल सकेगी. पेंटागन में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर और उनके अमेरिकी समकक्ष एस्टन कार्टर ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं.

मोदीजी! यह कटु सत्य है, पाकिस्तान आतंकवाद नहीं छोड़ेगा

इस समझौते पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपनी नपी-तुली प्रतिक्रिया में कहा है कि हम आशा करते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच यह सहयोग क्षेत्र में स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने का काम करेगा. जबकि अन्य विशेषज्ञ इस समझौते पर प्रतिक्रिया देने में दरियादिल नहीं रहे. कुछ की प्रतिक्रिया थी कि इससे भारत रणनीतिक संकट में पड़ सकता है.

इस बीच पाकिस्तान की अगुवाई वाला चार पक्षीय समन्वय समूह (क्वाड्रीलैटरल को-ऑर्डिनेशन ग्रुप) जिसमें चीन, अमरीका, अफगानिस्तान सदस्य के रूप में शामिल हैं, युद्ध से ध्वस्त हुए देश पर अभी तक कोई भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ने में विफल रहे हैं. पाकिस्तान तो अफगानिस्तान में हिंसा खत्म करने के लिए तालिबान नेतृत्व को वार्ता की मेज पर ही नहीं ला सका है.

इसके पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जानकारी दी कि भारत और अमरीका ने अफगानिस्तान में नेशनल यूनिटी सरकार को मजबूत करने के लिए साथ-साथ काम करने का निश्चय किया है. राष्ट्रपति अब्दुल घानी के विरोध में चीफ एक्जीक्यूटिव आफीसर अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह के खुलेआम सामने आने से गठबंधन सरकार कड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है.

दूसरी भारत-अमेरिका रणनीतिक और वाणिज्यिक वार्ता के बाद जवाहर लाल नेहरू भवन में केरी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में सुषमा स्वराज ने मीडिया से कहा कि हमने अपने क्षेत्र में, विशेषकर अफगानिस्तान में विकास के लिए व्यापक विचार-विमर्श किया है. 

यूएन में कश्मीर पर भारत का पाकिस्तान को करारा जवाब

अपनी पूर्व की नीति पर चलते हुए भारत सरकार अफगान सरकार को सैन्य समर्थन भी दे रही है

हम अफगानिस्तान में नेशनल यूनिटी सरकार को मजबूत बनाने की दिशा में साथ काम करने पर सहमत हुए हैं. भारी विकास कार्य कराए जान के चलते भारत ने इस युद्ध-ध्वस्त देश में व्यापक प्रभाव छोड़ा है.

इन विकास कार्यों में दो बिलियन डॉलर (12,800 करोड़ रुपए) लागत वाली परियोजनाएं हैं. इसमें हाल में उद्घाटित सलमा बांध और नवनिर्मित अफगानिस्तान के पार्लियामेंट भवन का निर्माण शामिल है.

अपनी पूर्व की नीति पर चलते हुए भारत सरकार अफगान सरकार को सैन्य समर्थन भी दे रही है. पिछले साल भारत ने काबुल को एमआई25 हमलावर हेलिकॉप्टरों की भी आपूर्ति की थी. 

अफगानिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क्यू शाह शहीम अधिक सैन्य सहयोग की अपेक्षा से चार दिन की यात्रा पर नई दिल्ली में हैं. इस सैन्य सहयोग में हमलावर हेलिकॉप्टर्स, छोटे चॉपर विमान और अन्य साजो-सामान शामिल है.

'युद्ध अपराध छिपाने के लिए पाकिस्तान ने मुझे रॉ एजेंट और आतंकवादी घोषित कर रखा है'

इससे पहले अफगानिस्तान में नाटो मिशन के कमांडर जनरल जन निकोलसन भी भारत से अफगानिस्तान की हेलिकॉप्टर मांग का समर्थन कर चुके हैं.

पाक प्रायोजित आतंकवाद

इस बीच, भारतीय विदेश मंत्री ने प्रेस में अपने बयान की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा- 'विदेश मंत्री केरी के साथ बातचीत में भारत में पाक प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा उठाया है. 

उन्होंने कहा कि मैंने सीमा पार से जारी आतंकवाद की समस्या से विदेश मंत्री केरी को अवगत कराया है कि भारत और क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान द्वारा फैलाई जा रही इस समस्या को झेल रहा है. वह और मैं, दोनों ही सहमत हैं कि पाकिस्तान को 2008 के मुम्बई हमलों और

2016 के पठानकोट पर हुए हमलों के हमलावरों के खिलाफ तेज गति से कार्रवाई करने की जरूरत है. पाकिस्तान उन्हें सजा दिलाए.

सुषमा स्वराज ने कहा कि कोई राष्ट्र दोहरे मानक नहीं अपना सकता. अच्छे या बुरे आतंकवादी में कोई फर्क नहीं होता. सुषमा ने यह भी कहा कि दोनों नेता इस बात से सहमत हैं कि आतंककारियों और अपराधियों के नेटवर्क के लिए सुरक्षित पनाहगाह बने लश्करे-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और डी-कम्पनी को नेस्तनाबूद करने की पाकिस्तान को तुरन्त जरूरत है.

24,000 पाकिस्तानी मदरसों की वहाबी फंडिंग कर रहा सऊदी अरब

हालांकि, केरी ने कश्मीर का जिक्र नहीं किया. सम्भवतः वह इस मुद्दे को प्रधानमंत्री के साथ होने वाली बैठक में उठा सकते हैं. उन्होंने कहा भी है कि हम अच्छे या बुरे आतंककारी के बीच अन्तर नहीं करते. आतंक आतंक होता है.

उन्होंने मुम्बई और पठानकोट के हमलवरों को न्याय की चौखट पर लाने के लिए भारत के रूख का समर्थन किया किया है. दिलचस्प बात यह है कि केरी इस बार की अपनी यात्रा में पाकिस्तान नहीं जा रहे हैं.

केरी और स्वराज आतंकवाद के प्रतिरोध के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मजबूत किए जाने की जरूरतों पर भी बोले

इस बीच स्वराज ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत तब तक नहीं हो सकती जब तक कि पड़ोसी देश आतंकियों पर कार्रवाई नहीं करता. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की करतूतों के चलते भारत बातचीत को निलम्बित करने के लिए मजबूर हुआ है. 

हम तनाव पैदा करने वालों में से नहीं हैं. केरी और स्वराज आतंकवाद के प्रतिरोध के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों को मजबूत किए जाने की जरूरतों पर भी बोले.

राजनाथ की पाकिस्तान को चेतावनी, चिंगारी का खेल न खेलें

स्वराज ने कहा कि हम आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत बनाने के अतिरिक्त उपाय करने पर सहमत हुए हैं. विशेषकर ज्ञात या संदिग्ध आतंकियों से जुड़ी सूचनाओं को साझा करने की ठोस व्यवस्था करने पर सहमत हुए हैं.

स्वराज ने भी यह भी कहा कि हम अब ज्यादा इन्फॉर्मेशन और इंटेलिजेंस शेयर करेंगे ताकि आतंकी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र के उपबंधों के तहत सजा दिलाई जा सके.

इसके पहले केरी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल से भी मुलाकात की थी. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर के अनुसार बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और आतंकवाद के प्रतिरोध के प्रयासों पर चर्चा हुई.

First published: 1 September 2016, 7:50 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी