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पाकिस्तानी पाठ्य पुस्तकें: अधपके दिमागों में जहर भरने वाली शिक्षा

लमट र हसन | Updated on: 20 April 2016, 9:24 IST

एक पूरी पीढ़ी का ब्रेनवॉश कैसे किया जा सकता है. इसकी सबसे बड़ी मिसाल पाकिस्तान में देखी जा सकती है. वहां के स्कूलों में बच्चों को भारत के बारे में झूठी जानकारियां भर-भर कर दी जा रही हैं. 

पश्चिम की कोरी कल्पना में भारत की छवि सपेरों और खुले घूमते बाघों वाली धरती की है. लेकिन अगर आपको पता चल गया कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भारत के बारे में क्या सोच है तो आपका गुस्सा और बढ़ जाएगा.

मिसाल के तौर पर-

"...हिंदू धर्म में विधवाओं को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा जाता है. और उन्हें अपने पति के मृत शरीर के साथ जिंदा जला दिया जाता है. भारत में मुस्लिमों को अपने धर्म का पालन करने की आजादी नहीं है."

"...आजादी से पहले मुसलमानोंं को मस्जिद में भी डरते-डरते जाना पड़ता था. भारत ने पाकिस्तान की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था ताकि पाकिस्तान को आर्थिक तौर पर कमजोर किया जा सके."

"...भारत हमारे हथियारों के प्रसार में भी बाधा खड़ी करता है जिससे देश सुरक्षा के मामले में पिछड़ा रहे."

ये पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ लोगों की डींगें नहीं है. ये कुछ उदाहरण हैं जिनसे पता चलता है कि पाकिस्तान की पाठ्य पुस्तकों में स्कूली बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है.

किताबें धार्मिक आधार पर पक्षपाती नजरिये से भरी हुई हैं. तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते हुए भारत के बारे में शत्रु देश की तरह वर्णन है.

भारत के बारे में भ्रामक जानकारी

इस शिक्षा के दो खतरनाक पहलू हैं. पहला पाकिस्तान में रहने वाले गैर मुस्लिमों के बारे में उल्टी-सीधी जानकारी देना और दूसरा भारत में हिंदू-मुस्लिम समाज के सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश के बारे में बिल्कुल झूठी अफवाहें फैलाना. 

छात्रों को ये मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है कि उनके बीच रहने वाले गैर मुस्लिम बाहरी और देशद्रोही हैं. धार्मिक अल्पसंख्यकों का योगदान और उनके अधिकारों को किताब में कहीं छुआ तक नहीं गया है.

देश के अल्पसंख्यकों को संदेह के नजरिए से देखने को कहा जाता है. जैसे हिंदू भारत के जासूस हैं और ईसाई पश्चिमी देशों के लिए जासूसी करते हैं. ये सारी बातें एक रिपोर्ट के बाद सामने आई हैं.

यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट से खुलासा

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजस फ्रीडम यानी यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट से इन तथ्यों का पता चला है. ये संस्था दुनिया में धार्मिक आजादी का उल्लंघन करने वालों की निगरानी के लिए अंतररराष्ट्रीय मानकों का प्रयोग करती है. 

यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट टीचिंग इनटॉलरेन्स इन पाकिस्तान (पाकिस्तान मेें असहिष्णुता की शिक्षा) के नाम से जारी हुई है. जिसमें पाकिस्तान के स्कूलों की किताबों में धार्मिक दुष्प्रचार फैलाने का खुलासा हुआ है. 

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पब्लिक स्कूलों की पाठ्य पुस्तक में भी गैर इस्लामी विचारधारा और गैर मुस्लिमों के बारे में गलत, अविश्वसनीय और घटिया शिक्षा दी जा रही है.

'भारत के कुटिल उद्देश्य'

बलोचिस्तान में पांचवीं के छात्रों की सामाजिक विषय की किताब में एक अध्याय है- स्वतंत्र मुस्लिम देश के निर्माण की जरूरत. इसमें छात्रों को बताया गया है कि अविभाजित भारत में अंग्रेज हिंदुओं से अच्छा व्यवहार करते थे. लेकिन मुस्लिमों पर जुल्मो-सितम ढाए जाते थे और उनकी हत्या तक कर दी जाती थी.

किताब में एक और अध्याय है- 'भारत के कुटिल उद्देश्य'. इस चैप्टर में बताया गया है कि भारत ने पाकिस्तान की ओर नदी के बहाव को रोक दिया है जिससे उसकी खेती बरबाद हो जाए.

भारत ने बंटवारे के समय पाकिस्तान के हिस्से की संपत्तियों को देने में अड़चन पैदा की ताकि पाकिस्तान आर्थिक तौर पर कमजोर हो जाए.

4 करोड़ 10 लाख छात्रों का ब्रेनवॉश

पाकिस्तान में करीब चार करोड़ 10 लाख छात्रों को यह एकतरफा, तथ्यहीन और घटिया किताब पढ़ाई जा रही है. आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अगर इतने बच्चों को धार्मिक अल्पसंख्यकों के बारे में रुढ़िवादी तरीके से नकारात्मक शिक्षा दी जाएगी तो आने वाला भविष्य क्या होगा.

जरा सोचिए कि अगर चार करोड़ 10 लाख बच्चे इस्लाम केंद्रित नजरिए को ही इकलौता सच और तार्किक विचारधारा मानेंगे तो क्या होगा. इन बच्चों को पढ़ाया जा रहा है कि शत्रु देश (भारत) उनके समाज पर अत्याचार करता है.

सामाजिक विज्ञान, पाकिस्तानी विषय और इतिहास पाठ्यक्रम वाले छात्रों को इतिहास का वो हिस्सा पढ़ाया जाता है जो पाकिस्तान की राष्ट्रीय इस्लामिक पहचान को प्रोत्साहित करे. रिपोर्ट के मुताबिक कई बार भारत के साथ विवाद को धार्मिक नजरिए से समझाया जाता है. 

बच्चों को जिहाद की शिक्षा

अगर आप सोच रहे हैं कि केवल छोटे बच्चों का ही इस शिक्षा के जरिए ब्रेनवॉश हो रहा है तो आप गलत हैं. आठवीं के छात्रों को जिहाद के बारे में बताते हुए हिंदुओं के बारे में घृणा भरी जाती है.

"हिंदू धर्म के लोग केवल मुसलमानों को ही खत्म नहीं करना चाहते, वो सभी गैर हिंदुओं को रास्ते से हटाना चाहते हैं." किताब में छात्रों को बताया गया है कि जिहाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहा है.

"अल्लाह के रास्ते पर बहुत से मुजाहिदीन अपने धर्म को बचाने और अन्याय के खिलाफ आजादी हासिल करने के लिए जिहाद में हिस्सा ले रहे हैं. एक छात्र के रूप में आप जिहाद में हिस्सा तो नहीं ले सकते लेकिन जिहाद की तैयारी के लिए आप आर्थिक मदद कर सकते हैं."

साझा कला-संस्कृति की अनदेखी

युद्ध और उनके नेतृत्वकर्ताओं का महिमामंडन भी किया गया है. सिंध पर मुहम्मद बिन कासिम की फतह और सुल्तान महमूद गजनवी के 17 मशहूर हमलों को इस किताब में शामिल किया गया है.

लेकिन कला, वास्तुशिल्प और संस्कृति की समृद्ध साझी विरासत को पाकिस्तानी पुस्तकों में अनदेखी की गई है.

इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि भारत की गलत छवि पेश की गई है. पाकिस्तान से अच्छी छवि की उम्मीद करना ही भोलापन होगा.

लेकिन जानबूझकर एक देश के बारे में किताबों में झूठ का अंबार भर दिया गया. पाकिस्तान को शायद शांति के बारे में भारत से ज्यादा हासिल करने की जरूरत थी. शायद हमसे भी ज्यादा.

First published: 20 April 2016, 9:24 IST
 
लमट र हसन @LamatAyub

Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.

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