Home » इंडिया » How training camp in Ayodhya is different from Taliban's camp?
 

अयोध्या में प्रशिक्षण शिविर, आतंकी प्रशिक्षण शिविरों से अलग कैसे है?

अनूप कुमार | Updated on: 25 May 2016, 17:17 IST
QUICK PILL
  • आतंकवाद के नाम पर बजरंग दल और विश्व हिंदु परिषद सभी मुसलमानों को आतंकी के रूप में स्थापित करने की कार्यशाला खुलेआम चला रहे हैं.
  • यह कार्यशाला विश्व हिंदू परिषद के अयोध्या स्थित प्रांतीय कार्यालय कारसेवक पुरम परिसर में आयोजित हो रही है.
  • बजरंग दल के संरक्षक विनय कटियार कहते हैं दाढ़ी और टोपी लगा लेने से कोई मुसलमान नहीं हो जाता.
  • दुनिया में मंदिर-मस्जिद विवाद के लिए जानी जाने वाली अयोध्या से बजरंग दल ने फिर हिंसा और नफरत का सन्देश दिया है. बजरंग दल का एक वीडियो मीडिया और सोशल साइट्स पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में कुछ युवा हथियारों का प्रशिक्षण ले रहे हैं, युवाओं के एक अन्य समूह पर बंदूकों से सांकेतिक हमला कर रहे हैं, जिन पर हमला हो रहा है वो मुसलमानी टोपियां और दाढ़ी रखे हुए हैं. बाद में उनका काम तमाम करके हिंदू युवा लाशों को ठिकाने लगाने का प्रशिक्षण भी ले रहे हैं. वीडियो में प्रशिक्षण देने वाले संघ के गणवेश यानी खाकी हाफ पैंट पहने नजर आ रहे हैं.

    यह सब कुछ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से महज सवा सौ किलोमीटर दूर उसी अयोध्या में हो रहा है जो भारत के समसामयिक इतिहास के सबसे काले अध्याय का गवाह रहा है.

    आतंकवाद के नाम पर बजरंग दल और विश्व हिंदु परिषद मुसलमानों को आतंकी के रूप में स्थापित करने की कार्यशाला खुलेआम चला रहे हैं. यह कार्यशाला विश्व हिंदू परिषद के अयोध्या स्थित प्रांतीय कार्यालय कारसेवक पुरम परिसर में आयोजित हुई.

    इस प्रशिक्षण शिविर का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक दलों में एक दूसरे को घेरने-गिराने की शुरुआत हो गई है. उत्तर प्रदेश में सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी के एक मंत्री इसे प्रदेश में दंगा कराने की साजिश करार दे रहे हैं. दूसरी तरफ बजरंग दल संरक्षक और भारतीय जनता पार्टी से राज्यसभा के सांसद विनय कटियार ने इस प्रशिक्षण शिविर को अपनी परंपरा का हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका मकसद किसी धर्म विशेष पर आरोप लगाना नहीं है क्योंकि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता.

    कटियार असल में सुविधाजनक तरीके से परिभाषाएं गढ़ रहे हैं. आज वे कह रहे हैं कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता. कुछ समय पहले तक सभी संघ से जुड़े नेताओं का प्रिय जुमला हुआ करता था कि- सारे मुसलमान आतंकी नहीं हैं लेकिन सारे आतंकी मुसलमान क्यों होते हैं. इन लोगों ने अपनी लाइन को तब बदला जब 2008 में एक सिरे से हिंदुओं के आतंकवादी घटनाओं में शामिल होने की खबरें आने लगीं. खैर अगर कटियार और बजरंग दल की मंशा पर भरोसा करें तो यह सवाल उठता है कि वीडियो में हमलावरों को दाढ़ी और टोपी क्यों पहनाई गई?

    टोपी और दाढ़ी वाले आतंकी क्यों?

    अयोध्या के कारसेवकपुरम में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में मौजूद विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अंबरीश सिंह ने कहा कि देश में आतंकवाद की समस्या से लड़ने के लिए धर्म, समाज और देश की रक्षा के लिए विहिप और बजरंग दल लम्बे समय से शाखाओं और प्रशिक्षण शिविर कार्यक्रम का आयोजन करता चला आ रहा है. इसी सिलसिले में अयोध्या में भी कारसेवकपुरम परिसर में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया था जिसमे बजरंग दल के युवाओं ने लाठी चलाने और अस्त्र-शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण लिया.

    अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सिंह कहते हैं, 'बजरंगियों को एक सजीव मुठभेड़ के जरिए यह सिखाया गया कि अगर किसी मौके पर उनका सामना आतंकियों से हो जाए तो उनका सामना कैसे करना है, उन्हें कैसे मारना है और अन्य सावधानियां कैसे बरतनी हैं.'

    यह वीडियो वायरल होने के बाद अब इस प्रशिक्षण शिविर को लेकर विवाद उठ गया है. बताते चलें की शिविर के समापन समारोह के दौरान विहिप नेताओं ने खुले मंच से भाषण दिया था कि हिन्दू-मुस्लिम, भाई-भाई का नारा लगाने से देश में भाईचारा नहीं आ सकता. भाई के लिए एक माई की जरूरत होती है. जो लोग भारत माता की जय नहीं बोलने को तैयार हैं जिन्हें वन्देमातरम से दिक्कत है, जो गऊ की हत्या करते हैं, राम की जन्मभूमि पर आक्रमणकारी बाबर के नाम से मस्जिद की बात करते हैं वो भाई कैसे हो सकते है.

    संवेदनशील अयोध्या में इस तरह की हिंसा फैलाने वाली चीजें हो रही हैं और प्रशासन को भनक तक नहीं है

    इस पूरे मसले में प्रदेश सरकार की भूमिका भी संदेहास्पद है. पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह की हिंसा फैलाने वाली और घृणा को बढ़ावा देने वाली चीजें हो रही हैं और प्रशासन को भनक तक नहीं हैं. अयोध्या के विधायक और सपा सरकार में वन राज्य मंत्री तेज नारायण पांडेय इस पूरे कार्यक्रम की निन्दा करते हुए कहते हैं, 'भाजपा के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी के नताओं का ग्राफ तेजी से गिरा है इसलिए आने वाले विधानसभा चुनाव में सियासी फायदा उठाने के लिए भाजपा और उसके साथी संगठन प्रदेश में दंगे जैसे हालात पैदा करना चाहते है. विहिप और बजरंग दल वाले इस काम में उनकी मदद कर रहे हैं.'

    हालांकि तेज नारायण पांडेय कहते हैं कि उनकी पार्टी की सरकार ऐसे समाजविरोधी लोगों से निपटने के लिए तैयार है और शांति व्यवस्था में बाधा डालने वालों को हरगिज बक्शा नहीं जायेगा. बावजूद इसके अब तक इस वीडियो में दिख रहे लोगों के खिलाफ प्रशासन ने को कार्रवाई नहीं की है.

    इस मसले पर फैजाबाद के पुलिस अधीक्षक (एसपी) मोहित गुप्ता का बयान और भी ज्यादा लचर और गैरजिम्मेदारी भरा प्रतीत होता है. उनसे इस वीडियो के संबंध में जब इस संवाददाता ने बात की तो उनका जवाब चौंकाने वाला था- 'यह बजरंग दल का निजी कार्यक्रम था और उनके निजी परिसर में आयोजित हुआ था. इस मामले में अब तक हमारे पास कोई शिकायत भी नही आई है. अगर सार्वजनिक स्थान पर इस तरह का कोई आयोजन होगा तब हम निश्चित तौर पर कार्रवाई करेंगे.'

    मोहित गुप्ता का जवाब कई तरह के सवालों को जन्म देता है. क्या निजी परिसर में भी किसी को गैर कानूनी काम करने की छूट है? इस तरह के प्रशिक्षण शिविर जिनमें दो समुदायों के बीच घृणा और हिंसा फैलाने की पूरी संभावना है उसके सबूत सामने आने के बाद भी प्रशासन क्या इससे आंखे मड़ सकता है? हमने देखा है कि पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले में एक घर में हुए बम धमाके की जांच करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल तक वहां पहुंच गए थे. यहां बड़ी संख्या में युवाओं के मन में संगठित तरीके से जहर भरा जा रहा है और जिले के एसपी कहते हैं कि आयोजन निजी परिसर में हुआ था.

    भाजपा और विहिप के नेता तेजी से इस वीडियो के सामने आने के बाद इसके बचाव में उतर पड़े हैं. फैजाबाद से दो बार सांसद रहे बजरंग दल के संरक्षक और राज्यसभा सांसद विनय कटियार ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा, 'इस पूरे आयोजन में कुछ भी ऐसा नही है जिस पर किसी को कोई आपत्ति हो. हम पहले भी अभ्यास प्रशिक्षण वर्ग लगाते रहे है जिसका उद्देश्य देश रक्षा, समाज और हिन्दू धर्म की रक्षा है. जहां तक टोपी लगाने की बात है तो आतंकवाद का कोई मजहब नही होता सिर्फ टोपी लगा लेने और दाढ़ी रख लेने से कोई मुसलमान नहीं बन जाता.'

    कटियार ने कहा की इस कार्यक्रम में हमने किसी को बम चलाने या कारतूस से भरी बन्दूक चलाने का प्रशिक्षण नही दिया जो बंदूकें दिखाई जा रही है वह गुब्बारे फोड़ने वाली बंदूकें है. इस पूरे आयोजन का मकसद युवाओं को यह बताना है की अगर कभी आप के गली मोहल्ले गांव में कोई आतंकी घुस आए तो उसका सामना कैसे करें. मुझे नहीं लगता इसमें किसी को आपत्ति होनी चाहिए.

    उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं. ऐसे में बजरंग दल और विहिप द्वारा चलाए जा रहे ये शिविर माहौल को विषाक्त करने का काम करेंगे. इसमें भाजपा और सत्ताधारी सपा दोनों को अपना फायदा होता दिख रहा है लिहाजा दोनों की प्रतिक्रियाएं इतने गंभीर मसले पर टाल मटोल वाली हैं.
    First published: 25 May 2016, 17:17 IST
     
    अनूप कुमार @catchhindi

    संवाददाता, पत्रिका, उत्तर प्रदेश

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