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एचआर भारद्वाज: यूपीए 1 में थी मुलायम सरकार को बर्खास्त करने की तैयारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 April 2016, 0:36 IST

पूर्व राज्यपाल और यूपीए सरकार में कानून मंत्री रहे हंसराज भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि 2007 में यूपी में मुलायम सिंह की सरकार को बर्खास्त करने की तैयारी थी.

पूर्व कानून मंत्री भारद्वाज ने केंद्र की तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. भारद्वाज के मुताबिक विरोध की वजह से ऐसा नहीं हो सका.  

एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में भारद्वाज ने कहा कि वो कई मुद्दे पर कांग्रेस की विचारधारा से थक चुके थे भारद्वाज का कहना है कि यूपी में राष्ट्रपति शासन और 2G स्पेक्ट्रम पर पार्टी लाइन का उन्होंने समर्थन नहीं किया था. 

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कांग्रेस पर अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग का आरोप

यही नहीं भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कई बार अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया है. भारद्वाज ने कहा, " कांग्रेस ने बिहार में 23 मई 2005 की मध्यरात्रि को राष्ट्रपति शासन लगाया, जबकि राष्ट्रपति विदेश दौरे पर थे. "

बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था. कोर्ट ने विधानसभा भंग किए जाने को असंवैधानिक करार दिया था.

भारद्वाज के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व चाहता था कि मुलायम सरकार को भी बिहार की तर्ज पर बर्खास्त कर दिया जाए. लेकिन मैंने केंद्र सरकार को सलाह दी कि मुलायम सरकार को सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोपों में गिराना सही नहीं है.

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'कांग्रेस कोर ग्रुप चाहता था राष्ट्रपति शासन'

भारद्वाज ने कहा, " जब तक मुलायम सरकार बहुमत में है, उसे विधानसभा में चुनौती देनी चाहिए. लेकिन यूपीए सरकार के कुछ मंत्री मेरी इस बात से सहमत नहीं थे और ये मामला विवादों में बदल गया. "

भारद्वाज के मुताबिक इस मामले में कांग्रेस का कोर ग्रुप चाहता था कि मुलायम सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए. लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दुविधा में थे.

दूसरे सदस्यों का मत था कि यूपी में राष्ट्रपति शासन लगाना चाहिए, लेकिन मैं इसके खुले विरोध में था. भारद्वाज के मुताबिक इसी वजह से उन्हें यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में जगह नहीं मिली.

कांग्रेस से नाराजगी जताते हुए भारद्वाज ने कहा कि कर्नाटक में वापसी के बाद पार्टी ने उन्हें साइड लाइन कर दिया. आहत भारद्वाज ने यहां तक कह डाला कि अब तो मैं अपने आपको कांग्रेसी भी नहीं समझता.

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अरुणाचल-उत्तराखंड पर मोदी सरकार का बचाव

अनुच्छेद 356 के गलत इस्तेमाल के आरोपों पर भारद्वाज ने मोदी सरकार का बचाव किया. पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने की असली वजह कांग्रेस की आपसी फूट है.

भारद्वाज ने कहा कि एक बार जब मुख्यमंत्री अल्पमत में चला जाता है तो उसे बहुमत सिद्ध करना पड़ता है. लेकिन इस बीच, स्पीकर ने उन विधयाकों को अयोग्य घोषित कर दिया, जिन्होंने रावत सरकार के खिलाफ बगावत की.

लिहाजा फ्लोर टेस्ट नहीं हो पाया. ऐसे में राज्यपाल क्या कर सकता है. भारद्वाज ने कहा कि राज्यपाल तो जो वस्तुस्थिति होगी वही केंद्र को रिपोर्ट करेगा.

वहीं एचआर भारद्वाज ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा. भारद्वाज ने कहा, " मैं नहीं मानता कि राहुल बेहतर नेता हैं. उन्हें संसद में अभी भी बहुत कुछ जानने की आवश्यकता है. "

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First published: 16 April 2016, 0:36 IST
 
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