Home » इंडिया » Human Right activist Sabeen mahmud was shot dead in Pakistan for being a liberal
 

कट्टरपंथ: हत्या के बाद दुनिया के 100 शीर्ष विचारकों में शामिल की गईं सबीन महमूद

ज़हीर आलम किदवई | Updated on: 8 December 2015, 12:20 IST
QUICK PILL
फॉरेन पॉलिसी मैगज़ीन ने दिवंगत पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता सबीन \r\nमहमूद को \'100 ग्लोबल थिंकर्स फॉर 2015\' की सूची में शामिल किया है. सबीन की कट्टरपंथियों ने 24 अप्रैल को कराची में सरेआम \r\nगोली मारकर हत्या कर दी थी. सबीन कराची के कला प्रेमियों और सामाजिक \r\nकार्यकर्ताओं के लिए टी2एफ नाम की संस्था चलाती थीं. हत्या की शाम वो एक \r\nकार्यक्रम से अपनी मां के साथ घर वापस लौट रही थीं. तभी हत्यारों ने \r\nउन्हें गोली मार दी.
जहीर आलम किदवई सबीन को बचपन से जानते थे. वो सबीन के मेंटर और दोस्त थे. उन्होंने कैच न्यूज़ से सबीन से जुड़ी यादें साझा की.
मुझे समझ में नहीं आता कि शुरुआत कहां से की जाए. सबीन महमूद या सैब ( मैं उसे इसी नाम से बुलाता था) से जब मैं मिला था तो वह बस 14 साल की थी. वह मेरी कंपनी में कंप्यूटर सीखने आई थी. 

हम इस मुलाकात के करीब छह महीने बाद दोस्त बने और अगले छह महीनों में मैं उसे अपनी बेटी की तरह मानने लगा. पहले कुछ सालों में मैं उसके मेंटर की तरह था और अगले कुछ सालों में वह मेरी मेंटर बन गई. 75 साल के अपने जीवन में मैंने उसके जैसी लड़की नहीं देखी.

कौन थी सबीन?

किदवई के मुताबिक उसे खेलों से बेहद लगाव था. वह अपने स्कूल की बेस्ट एथलीट थी. बेसबॉल उसका पसंदीदा खेल था. मुहल्ले के लोग उसे गली में क्रिकेट खेलने वाली लड़की के रूप में याद करते हैं. मैंने उसे खेलते हुए देखा है. वो बहुत अच्छी क्रिकेटर थी. उसके ऑफिस में हमेशा ही क्रिकेट की बॉल हुआ करती थी. जब भी उसे मौका मिलता वह खेलना शुरू कर देती.

फ़ारसी भाषा में सबीन की जबरदस्त रुचि थी. कुछ सालों के भीतर ही वह रूमी को बातचीत में कोट करने लगी थी

उसे पश्चिमी पॉप और क्लासिकल सभी तरह का संगीत पसंद था. मैंने उसकी मुलाकात जैज, भारतीय शास्त्रीय और कव्वाली से करवाई. कुछ समय बाद वह इनकी फैन हो गई. फारसी में उसकी जबरदस्त रुचि थी और कुछ सालों के भीतर वह रूमी और अन्य को अपनी बातचीत के दौरान कोट करने लगी.

उसने बंबइया अंदाज में उर्दू बोलना शुरू कर दिया था क्योंकि उसका ननिहाल वहीं था. उसे जो भी पसंद आता, वह उसके बारे में सीखने में देर नहीं लगाती. अपनी बात को वह लखनऊ ज़ुबान वाली उर्दू में खत्म करती. उसे स्कूल पसंद नहीं था क्योंकि उसे वहां उर्दू अच्छी तरह नहीं पढ़ाते थे. 

उसने पहली बार जब हमारे ऑफ़िस में ऐपल का सिस्टम देखा वो उसका पसंदीदा बन गया. वो स्टीव जॉब्स की बड़ी प्रशंसक थी. उसने अपने ऑफिस में जॉब्स की एक तस्वीर भी लगा रखी थी. 

सैब मेरे ऑफिस में स्कूल के बाद या शनिवार को आया करती. यहां तक की छुट्टियों के दौरान भी वह मेरे ऑफिस में काम किया करती थी. वह बेहतर प्रोग्रामिंग करती और उसने कंप्यूटर रिपेयरिंग के बारे में सीखने का फैसला किया था. हार्डवेयर टीम के लड़के उसे पसंद नहीं करते थे. लेकिन उसने वाकई में जबरदस्त मेहनत की. तीन महीने बाद आईटी डिपार्टमेंट के हेड मेरे पास आए और उन्होंने बताया कि वह सोल्डरिंग और रिपेयरिंग में सबसे बेहतर है.

कॉलेज से छुट्टियों के दौरान सैब मेरे ऑफिस में आया करती थी. वो करीब 17 साल की हो चुकी थी और छुट्टी में मेरे दफ़्तर में बैठी थी. तभी मेरा मैनेजर आया. हम दोनों ने लोगों के पास बकाया पैसे के बार में बातचीत की. जब मैनेजर चला गया तो सैब ने मुझसे कहा, "आपको एक ऐसे आदमी की जरूरत है जो लोगों के पीछे पड़कर पैसे निकलवा सके."

मैंने मैनेजर को बुलाया और कहा कि अगले कुछ हफ्तों तक सबीन इस कंपनी को चलाएगी. मैं छुट्टियों में हॉन्गकॉन्ग जा रहा था. उसे मुझे सब कुछ समझाना था क्योंकि वह मेरी जगह लेने जा रही थी. वह हंसी, लेकिन मैंने उसे समझाया कि तुम कर लोगी. मैंने उससे कहा, "जाओ और देखो, पैसा निकलवाना कितना मुश्किल है. जब मैं वापस आऊंगा तो देखूंगा कि तुम अपने काम में कितनी अच्छी हो." उसने हाथ खड़े कर दिए फिर पूछा अगर मैं पैसे वापस नहीं ला सकी तो? मैंने कहा कि कम से कम तुम बिजनेस के बारे में कुछ तो सीख लोगी.

मैं पूरे एक महीने के लिए बाहर था. सैब के हाथ में मेरे बिजनेस की कमान थी. मैंने उसे कहा था कि वह हर वीकेंड मुझे फोन पर सारी जानकारी देगी. मेरे ऑफिस के स्टाफ ने बताया कि मैं बड़ी भूल कर रहा हूं. सैब पहले थोड़ा डरी हुई थी. जब मैं वापस आया तब उसने वह सारे पैसे वसूल कर लिए थे जिसे हमने दे रखा था. 

उस साल वह कॉलेज गई और उसे साप्ताहिक मैगजीन में स्मार्ट यंग किड के तौर पर जगह मिली. जब उससे यह पूछा गया कि वह कॉलेज के बाद क्या करने वाली है तो उसने कहा कि वह मेरी कंपनी में काम करेगी. मैंने उसे एक मैसेज दिया और कहा कि मैंने पहले कभी प्रेस में ऐसा कोई जॉब ऐप्लिकेशन नहीं देखा था. जब वह वापस आई तो उसने मेरी कंपनी में ज्वाइन करने का फैसला किया. 

मैंने तब एक मल्टीमीडिया डिविजन की शुरुआत की थी जो जल्द ही एक अलग कंपनी बनने जा रही था. उसने इस डिविजन में ज्वाइन करने के बाद जो किया उसे मैं कभी नहीं भूल सकता. हमारी सबसे बेहतरीन सीडी (फैज आज के नाम) उसके बिना नहीं पूरी हो सकती थी.  

मैं और वह पूरा दिन काम करते और सॉफ्टवेयर पंडितों से बातचीत कर आइडिया जुटाते. मसलन हमें वीडियो कैसे मिलेगा? हम ऑडियो फाइल्स को कैसे कम करेंगे? हमें बहुत कम सवालों के जवाब मिलते. यह 1998 की बात है. उस वक्त कोई एमपी-3 नहीं होता था और कुछ सीडी पर कुछ ही वीडियो होते थे. हमने यह सब कुछ खुद से किया और फैज की सीडी 16 घंटों की बनी जबकि पहले इसके बारे में यह सोचकर चल रहे थे कि यह 2 घंटों की सीडी बनेगी.  

ग्राफिक डिजाइनिंग उसी ने किया था. विंडोज में ट्रांसफर का आइडिया उसी का था. हममें से कोई भी विंडोज पर काम करना नहीं चाहता था और हमने यह कहा कि सैब तुम हममें सबसे छोटी हो इसलिए तुम इस पर काम करो. उसने इसे पूरा भी किया.

फैज की 16 घंटों की सीडी की जबरदस्त बिक्री हुई और सबने उसे सराहा भी. इसमें सारी भूमिका सबीन की थी

बाद में हमने यह तय किया हम बड़ी कंपनी बनाएंगे और फिर हमने कराची में बिट्स (बियोंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस) बनाया. दो साल बाद मैंने अपनी टीम को घर पर बुलाया और कहा कि सैब ने हमारी कंपनी के लिए बहुत कुछ किया है और इसलिए मैंने सैब को कुछ देने का फैसला किया है. मैंने सैब को आधी कंपनी गिफ्ट में दे दी. 

सैब हमारी कंपनी में को-डायरेक्टर बनी. 

कुछ सालों बाद वह मेरे पास आई और कहा कि मैंने अपनी आधी जिंदगी आपके साथ काम करते हुए बिता दी. हम इस कंपनी को ऑनलाइन करेंगे और सभी स्टाफ को हटाकर उन्हें नई नौकरी पर रखवाएंगे. सैब ने कहा कि वह एक छोटा सा वेंचर शुरू करना चाहती है जहां लोग आएं और एक दूसरे से बात करें और आपस में दोस्त बनें. ऐसी किसी जगह को होना जरूरी है. 

मैंने सहमति दे दी और उसके साथ काम करने का फैसला किया. मैंने अपने ऑफिस का सेकेंड फ्लोर उसे दे दिया. यही टी2एफ (द सेकेंड फ्लोर) नाम दिया.

वह "दिलफेंक" बनाने की तैयारियों में व्यस्त थी. मैं उसे हर दिन थोड़े समय के लिए देखा करता. ब्रिटेन से लौटने के बाद उसने मेरे साथ कुछ समय बिताने का फैसला किया था. 24 अप्रैल को वह मेरे घर आई और कुछ समय मेरे साथ बिताया. यह मुलाकात 2 घंटों से अधिक तक चली. हमने टी2एफ के अलावा और कई मुद्दों पर बात की. 

मैंने उससे पूछा कि वह बलूचिस्तान ईवेंट पर क्यों काम कर रही है. उसने कहा कि वह बस इसे शुरू कर वापस अपने काम में लग जाएगी. उस वक्त कोई खतरा नहीं था. एक दोस्त ने कहा कि इसे करना है और सैब ने इसे करने का फैसला किया. मैंने उसे ईवेंट के दौरान देखा. मैं उसके साथ ही निकला. मेरी कार और उसकी कार साथ चल रही थी और फिर मैं बाएं मुड़ गया. मुझे बस दो बिल्डिंग दूर जाना था और फिर उसकी मां ने मुझे फोन कर बताया कि उसे गोली मार दी गई है. डॉक्टरों ने बताया कि वह गोली लगने के तुरंत बाद ही मर चुकी थी. 

सैब कॉन्फ्रेंस और मीटिंग के लिए पूरी दुनिया में जाती थी. सभी परिचित उसके इस जुनून से परिचित थे. सैब की याद में हर जगह सभाएं की जा रही हैं. ट्यूनिस सिंफनी ऑर्केस्ट्रा ने उसकी याद में एक पीस बनाया है जिसे यूट्यूब पर देखा जा सकता है.

उसे मौत से डर नहीं लगता था और ऐसा उसने अपने कई इंटरव्यू में कहा था. उसने टी2एफ के डायरेक्टर और अपनी करीबी दोस्त मर्वी मजहर को लिखा था, "मैं सोचती हूं हम तारों की तरह हैं. हमारे भीतर कुछ होता है जो एक धमाके से हमारे व्यक्तित्व को खोल देता है. हमें लगने लगता है कि हम मर रहे हैं लेकिन दरअसल हम सुपरनोवा में बदल रहे होते हैं. और फिर जब हम ख़ुद को दोबारा देखते हैं तो हमें पता चलता है कि हम इतने सुंदर पहले कभी नहीं थे."

 सैब के साथ बिताए गए 25 साल मेरे लिए बेहद ख़ास थे. मैंने जो कुछ लिखा वो मेरा निजी अनुभव था. उसके बारे में आप चाहें तो इंटरनेट पर बहुत कुछ पढ़ सकते हैं.

First published: 8 December 2015, 12:20 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी