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नोटबंदी और मानवाधिकार: इन आठ तरीकों से हो रहा है मानवाधिकारों का हनन

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 December 2016, 8:29 IST
(मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • 8 नवंबर को नोटबंदी की नीति की घोषणा होने के बाद से देश में उथल-पुथल मची हुई है. क़तार में घंटों लगने और बैंकों में लगातार काम करने से मौतें हुई हैं. 
  • हर दिन दफ़्तर में ड्यूटी पूरी करने का दबाव एक तरफ़ है, वहीं बैंकों के सामने घंटों-घटों कई दिन तक लगे बिना कैश पाना नामुमकिन हो रहा है. 
  • 10 दिसंबर को पूरी दुनिया में मानवाधिकार दिवस मनाया गया. इसके घोषणा पत्र में कम से कम आठ ऐसे अनुच्छेद हैं जहां मोदी सरकार अपने ही नागरिकों के मानवाधिकार का उल्लंघन कर रही है. 

10 दिसम्बर 1948 को संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर के लिए समान मानवाधिकारों की घोषणा की थी. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के विधिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के प्रतिनिधियों ने मिल कर यह मानवाधिकार प्रपत्र तैयार किया. यह मानवाधिकार घोषणा पत्र दुनिया भर के देशों और लोगों के लिए उपलब्धियों का एक साझा पत्र कहा जा सकता है. पहली बार बने इस मानवाधिकार पत्र में दुनिया भर में मानवाधिकारों की एकसमान रक्षा की बात कही गई और इसे 500 भाषाओं में अनुवाद किया गया.

हो सकता है मोदी सरकार ने यह पत्र नहीं पढ़ा हो, वरना सरकार नोटबंदी की अचानक घोषणा से पहले कम से कम दो बार सोचती. इस मानवाधिकार प्रपत्र के 30 अनुच्छेद में से 8 पर एक नजर-

जहां तक रही बात स्वतंत्रता की तो ऐसा कोई दिन नहीं है जब इस देश के नागरिकों को यह अनुभूति नहीं हुई कि वे अपनी मर्जी से न तो घूम सकते हैं न खा-पी सकते हैं और न ही खर्च कर सकते हैं, हर वक्त ऐसा लगता है जैसे कोई उन पर नजर रख रहा है. दिसम्बर 2016 में हम उतने ही ‘आजाद’ हैं, जितने कि आपातकाल में थे.

अनुच्छेद 3

प्रत्येक व्यक्ति को जीने, स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार

नोटबंदी के बाद से अब तक 82 लोग मारे जा चुके हैं और अब भी यह संख्या बढ़ रही है. हो सकता है कि आप यह तर्क दें कि इन मौतों का नोटबंदी से क्या संबंध है? लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नोटबंदी की वजह से ही ये जानें गई हैं.

अनुच्छेद 5

किसी को प्रताड़ित नहीं किया जाए, न अमानवीय व्यवहार किया जाए और न ही सजा दी जाए

बैंक के बाहर लाइन में लगे किसी भी व्यक्ति से बात करो तो वह यही कहता नजर आता है कि हम सिर्फ यह सुनने के लिए रोज दिन भर लाइन में लगते हैं कि बैंक में कैश खत्म हो गया है. वे एक बैंक को छोड़ दूसरे बैंक के बाहर कतार में लगते हैं, इस उम्मीद में कि कहीं तो उन्हें पैसा मिलेगा.

दिन-पर-दिन बैंक के बाहर की ये कतारें लंबी होती गईं और लोग सुबह जल्दी ही लाइन में लग जाते, इनमें बुजुर्ग, बीमार और नौकरीपेशा लोग भी हैं जो नौकरी पर पहुंचने में लेट हो रहे हैं, लेकिन लाइन में खड़े रहना भी मजबूरी है. ये सब लोग इस अनुच्छेद के तहत बताए गए अधिकार से पूरी तरह वंचित हैं, जिसमें कहा गया है कि किसी को भी प्रताड़ित ना किया जाए, क्रूर और अमानवीय व्यवहार न किया जाए आदि.

अनुच्छेद 8

प्रत्येक व्यक्ति को अधिकार है कि अगर उसके संविधान या कानून के तहत प्रदत्त मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है तो वह किसी भी राष्ट्रीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटा सकता है.

देश भर में 8 नवम्बर को की गई नोटबंदी के खिलाफ हाई कोर्टों में याचिका लगाई गई है लेकिन उन पर सुनवाई ही नहीं हो रही. बंगलौर में ऐसी ही एक याचिका पर जज ने टिप्पणी की कि सरकार ने यह कदम राष्ट्र निर्माण के लिए उठाया है, इसलिए राष्ट्र निर्माण के सरकार के प्रयासों को किसी तरह से धक्का नहीं लगना चाहिए.

अनुच्छेद 12 और 19

किसी भी व्यक्ति की निजता, परिवार, घर या पत्राचार में बाहरी दखल नहीं दिया जा सकता और न ही उसके सम्मान और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जा सकती है. हरेक को इस दखल के खिलाफ कानून का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है. सबको अपनी राय व्यक्त करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है. इस अधिकार के तहत कोई भी व्यक्ति बिना किसी बाध्यता के किसी भी माध्यम से जानकारी व सुझावों का आदान-प्रदान कर सकता है. 

आज देश नोटबंदी के पक्ष और विपक्ष में दो फाड़ नजर आ रहा है. जो लोग नोटबंदी का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें ‘देश के साथ’ और जो विरोध कर रहे हैं, उन्हें ‘आतंकवादियों का साथी’ कहा जा रहा है. व्हाट्स एप और दूसरे सोशल मीडिया पर ऐसे हमले लगातार जारी हैं. इनमें दिन पर दिन कोई कमी होती नजर नहीं आ रही.

अनुच्छेद 17

1. हरेक को अपनी सम्पत्ति स्वयं या किसी के साथ रखने का अधिकार है.

2. किसी को भी जान बूझ कर उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता.

3. सारे वैध टेंडर निजी संपत्ति हैं. इन्हें एक झटके में ही यूं अचानक अवैध करार नहीं दिया जा सकता. 

अनुच्छेद 24

हरेक को आराम करने और फुर्सत के क्षणों का हक है. इसमें काम के सीमित घंटे और वैतनिक अवकाश का अधिकार शामिल है.

नोटबंदी के इस कदम से बैंक कर्मी सबसे ज्यादा इस हक से वंचित नजर आ रहे हैं; वे बिना लंच, टी या टॉयलेट ब्रेक के लगातार काम कर रहे हैं. नोटबंदी के शुरूआती दिनों में ऐसी खबरें आई कि एक बैंक मैनेजर ने लगातार तीन दिन तक बैंक में ही रहकर काम किया. वे वहीं सोये भी और उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई. इस खबर से पूरा बैंकिंग जगत सन्न रह गया. बैंकिंग कर्मियों का पिछला एक महीना बहुत ही दर्द भरा और स्वास्थ्य के लिहाज से बुरा निकला है.

अनुच्छेद 25

हरेक को एक सामान्य जीवन, अपने परिवार और अपने स्वास्थ्य का अधिकार है. इसके तहत रोटी, कपड़ा, मकान, चिकित्सा के अलावा सामाजिक सेवा और बेरोजगारी, बीमारी, अक्षमता, विधवा, बुढ़ापा, आजीविका की कमी जैसी परिस्थितियों में सुरक्षा का अधिकार है.

थोक व्यापारी, किसान उत्पादक संगठन, माइक्रोफाइनेंसिंग एजेंट, ग्रामीण ऋण सेवाएं और आजीविका के ऐसे ही सभी क्षेत्र नोटबंदी से बुरी तरह प्रभावित होते हैं. इस क्षेत्र के लोग बेरोजगार हो चुके हैं. उन्हें न तो सरकार से किसी तरह की कोई सुरक्षा या मुआवजा नहीं मिला है.

First published: 11 December 2016, 8:29 IST
 
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