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कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए सैकड़ों तीर्थयात्री नेपाल-तिब्बत सीमा पर फंसे

सादिक़ नक़वी | Updated on: 28 May 2016, 12:27 IST

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए सैकड़ों तीर्थयात्री नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित हिल्सा और सिमिकोट में फंस गए हैं. कैच को यह जानकारी यात्रा में फंसे हुए एक तीर्थयात्री ने दी है.

तीर्थयात्रियों का ये दल एक प्राइवेट टूअर ऑपरेटर के माध्यम से यात्रा पर जा रहा था. कैच हिल्सा और सिमिकोट में फंसे तीर्थयात्रियों की वास्तविक संख्या की पुष्टि नहीं कर सका है.

यहां फंसे कई तीर्थयात्रियों ने ट्विटर पर विदेश मंत्रालय और अपने रिश्तेदारों को अपने हालात के बारे में सूचना दी है. एक तीर्थयात्री ने ट्वीट करके फंसे हुए तीर्थयात्रियों की संख्या 350 बतायी है.

सूचना का अभाव

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को ट्वीट करके तीर्थयात्रियों के परिवारवालों को बताया कि मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रदीप रावत को फंसे हुए तीर्थयात्रियों से संपर्क स्थापित करने के लिए कहा गया है.

मंत्रालय ने कहा कि वो फंसे हुए यात्रियों के बारे में विस्तृत ब्योरा पाने का प्रयास कर रहा है. नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावार को भी इस बाबत ज्यादा जानकारी नहीं है. दूतावास ने सूचना मिलते ही सूचित करने की बात कही.

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दूरदर्शन की पूर्व प्रस्तोता पार्वती कुमार ने बताया कि हिल्सा में करीब दो सौ यात्री फंसे हुए हैं, वहीं सिमिकोट में भी करीब इतने ही यात्री होंगे. कुमार ने बताया कि काठमांडू वापस जाने के लिए पर्याप्त हवाई जहाज नहीं उपलब्ध हैं.

कुमार ने बताया कि उनकी हालत "जानवरों से भी खराब" है. कुमार ने हिल्सा से फोन पर बताया, "चार लोगों के कमरे में बीस लोग रह रहे हैं. मुझे पता था कि ये यात्रा कठिन होगी लेकिन यहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव से अमानवीय स्थिति बन गई है."

हेलीकॉप्टर का वादा

नेपाल में आए भूकंप के बाद सड़कों की हालात अभी तक नहीं सुधरी है. ऐसे में सड़क मार्ग से यात्रा काफी मुश्किल साबित हो रही है.

कुमार कहती हैं कि प्राइवेट टूअर ऑपरेटर ने 'लग्जरी हेलीकॉप्टर टूअर' कराने का वादा किया था. उन्होंने बताया, "प्राइवेट ऑपरेट ने हर यात्री से 1,40,000 से Rs 2,00,000 रुपये लिए लेकिन यहां खाना और पानी भी पर्याप्त नहीं है."

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कुमार बताती हैं, "सड़क मार्ग चालू नहीं है. इसीलिए हेलीकॉप्टर वाले क्षमता से कई गुना ज्यादा यात्री ले जा रहे हैं."

कुमार और उनके साथियों को काठमांडू स्थित एक प्रतिष्ठित टूअर ऑपरेटर ने सिमिकोट तक हेलीकॉप्टर से ले जाने के लिए कहा था. लेकिन बीच में ही उन्हें सुरखेत में उतार दिया गया.

कुमार बताती है, "तीन दिनों तक हमें वो कहते रहे कि हमें जल्द ही सिमिकोट ले जाया जाएगा, जहां से हमें हिल्सा जाना था और वहां से कैलाश मानसरोवर."

देरी से दर्शन

कुमार तीन दिन देरी से 22 मई को कैलाश मानसरोवर पहुंच पाईं. वो कहती हैं, "ऑपरेटर के वजह से मैं बुद्ध पूर्णिमा को दर्शन नहीं कर पाई."

कुमार और उनके साथियों को कैलाश मानसरोवर में दो दिन रहने की बात थी लेकिन उन्हें रात भर रहने के बाद अगली सुबह वहां से आना पड़ा.

 कुमार बताती हैं, "इस वजह से कई लोग बीमार पड़ गए क्योंकि उन्हें शाम को स्नान करना पड़ा." 

सरकारी लॉटरी

कैलाश मानसरोवर यात्रा में समुद्र तल से करीब 20,000 फीट ऊपर सफर करना पड़ता है.

इस यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय ने कड़े नियम बना रखे हैं. यात्रा के लिए करीब 1000 यात्रियों का कम्प्यूटरीकृत लॉटरी सिस्टम द्वारा चयन किया जाता है.

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यात्रियों को दो मार्गों से भेजा जाता है. इनमें से एक मार्ग उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा से जाता है और दूसरा नया मार्ग सिक्किम के नाथू ला दर्रे से.

जिन लोगों का मंत्रालय की लॉटरी में चयन नहीं हो पाता वो प्राइवेट ऑपरेटरों की मदद से यात्रा पर जाते हैं.

कुमार कहती हैं, "प्राइवेट ऑपरेटरों पर अंकुश लगाए जाने की जरूरत है."

First published: 28 May 2016, 12:27 IST
 
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