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मोदी सरकार ने हुर्रियत को पाकिस्तान से बातचीत की दी इजाजत

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 May 2016, 16:49 IST

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की पाकिस्तान के साथ बातचीत पर रोक लगाने वाली केंद्र सरकार ने यू-टर्न लिया है.

लोकसभा में विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने अपने लिखित जवाब में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है और कश्मीर के अलगाववादी नेता भी भारतीय नागरिक हैं. 

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इसके चलते वे किसी भी देश के प्रतिनिधि से मुलाकात और बात कर सकते हैं. इससे पहले भारत, हुर्रियत नेताओं की पाकिस्तान के साथ बातचीत और मुलाकात का विरोध करता रहा है.

कश्मीर मुद्दे पर तीसरा कोई नहीं

मुलाकात के मुद्दे पर वीके सिंह ने साफ किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत में तीसरे पक्ष की भूमिका का कोई मतलब नहीं है. भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र के मुताबिक ही होगी. 

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भारत इस मुद्दे पर अपनी भूमिका कई बार साफ कर चुका है. भारत ने हमेशा कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष को लेकर ऐतराज जताता आया है. वहीं पाकिस्तान अलगाववादियों को तीसरे पक्ष के रूप में पेश करता है.

दो साल बाद यू टर्न !


अगस्त 2014 में मोदी सरकार ने विदेश सचिव स्तर की बातचीत से पहले पाकिस्तान की अलगाववादी नेताओं से मिलने की मांग को ठुकरा दिया था. बाद में इसी वजह से बातचीत भी रद्द हो गई थी.

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भारत सरकार द्वारा नापसंद किए जाने के बावजूद 2001 में हुए आगरा सम्मेलन के बाद से ही हुर्रियत के नेता पाकिस्तान से बात करते आए है. भारत सरकार की ओर से साफ तौर पर कहा जाता रहा है कि दोनों के बीच बातचीत का कोई आधार नहीं है.

First published: 2 May 2016, 16:49 IST
 
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