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1984 सिख दंगों पर घिरे कमलनाथ का पंजाब कांग्रेस प्रभारी पद से इस्तीफा

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 June 2016, 11:40 IST

1984 के सिख दंगों में कथित भूमिका को लेकर उठे विवाद के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने पंजाब कांग्रेस प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा, जिन्‍होंने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया है. पंजाब और हरियाणा के तीन दिन पहले प्रभारी महासचिव बनाए गए कमलनाथ ने सोनिया को लिखे अपने पत्र में कहा, "मैं आग्रह करता हूं कि मुझे (पंजाब में) मेरे पद से मुक्त किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो कि पंजाब के असल मुद्दों से ध्यान नहीं भटके."

पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने अपने पत्र में लिखा कि वह पिछले कुछ दिन से दिल्ली में 1984 के दर्दनाक दंगों को लेकर पैदा गैर जरूरी विवाद से जुड़े घटनाक्रम से आहत हैं.

1984 सिख दंगों पर विपक्ष हमलावर

कमलनाथ ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब अकाली दल, बीजेपी और आप ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगों में उनकी कथित भूमिका को लेकर हमला बोला.

कमलनाथ की नियुक्ति को सिखों के 'जख्मों पर नमक छिड़कने' जैसा बताते हुए तीनों दल इस नियुक्ति को बड़ा तूल देने की तैयारी में थे. 

सोनिया गांधी को लिखा खत

कमलनाथ ने कहा, "दंगा मामले में 2005 तक उनके खिलाफ कोई सार्वजनिक बयान या शिकायत या प्राथमिकी तक नहीं थी. पिछली एनडीए सरकार द्वारा गठित नानावटी आयोग ने उन्‍हें बाद में दोषमुक्त करार दिया था."

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कमलनाथ ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे अपने पत्र में कहा, "यह विवाद कुछ नहीं, बल्कि चुनावों से पहले लाभ उठाने के लिए सस्ता राजनीतिक प्रयास है. कुछ खास तत्व केवल राजनीतिक लाभ के लिए इन मुद्दों को उठा रहे हैं." 

'पंजाब में असल मुद्दे से न भटकें'

पंजाब का प्रभारी महासचिव नियुक्त किए जाने पर सोनिया का आभार जताते हुए उन्होंने लिखा, "मैं नेहरूवादी राजनीति करने वाला व्यक्ति हूं और झूठे आरोपों से कांग्रेस की छवि खराब करना मेरे लिए अस्वीकार्य है."

कमलनाथ ने कहा, "मेरी इच्छा है कि पार्टी आगामी चुनावों पर ध्यान केन्द्रित करे और कुशासन, किसानों एवं युवाओं की बदहाली, लचर कानून व्यवस्था और मादक पदार्थों के कारोबार के मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करें, क्‍योंकि इन कारणों से पंजाब की जनता की हालत दयनीय है."

इसके तुरंत बाद पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने एआईसीसी महासचिव के रूप में कमलनाथ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है.

सुरजेवाला ने कहा, "कमलनाथ ने एआईसीसी में उन्हें दी गई जिम्मेदारियों से अपना इस्तीफा दे दिया. उनके आग्रह पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया."

'कांग्रेस में बेदाग करियर'

कमलनाथ ने अपने पत्र में कहा कि युवा कांग्रेस से महासचिव और फिर 1991 से पार्टी की सरकारों में मंत्री के रूप में उनका कांग्रेस के साथ लंबा करियर रहा है और उनके नाम पर कभी कोई दाग नहीं लगा है.

कमलनाथ ने कहा, "जब मैं दिल्ली का प्रभारी महासचिव था, तब यह कोई मुद्दा नहीं था. मेरे कार्यकाल में एमसीडी चुनाव जीता गया था."

नानावटी आयोग से क्लीन चिट

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखी अपनी चिट्ठी में कमलनाथ ने कहा, "संसद में नानावटी आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान सुखबीर सिंह बादल सहित किसी भी अकाली और भाजपा सांसद ने मेरे नाम का जिक्र नहीं किया था."

राज्यसभा चुनाव नतीजे आने के एक दिन बाद कांग्रेस ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कमलनाथ और गुलाम नबी आजाद को क्रमशः पंजाब और उत्तर प्रदेश का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया था.

इस बीच इस्तीफे के बाद कमलनाथ पर बीजेपी ने निशाना साधा है. पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "जिस तरह से उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा है, उससे साफ है कि कहीं न कहीं वे 1984 के सिख दंगों में दोषी हैं."

'कांग्रेस को गलती का अहसास'

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा, "मैंने सुना है कि कमलनाथ ने पंजाब चुनाव का प्रभारी पद छोड़ दिया है. कांग्रेस को शायद अहसास हो गया है कि उन्होंने गलती की थी." 

किरण रिजिजू ने कहा, "ये बिल्कुल साफ और प्रामाणिक है कि 1984 के सिख दंगे कांग्रेस और उनके नेताओं की सुनियोजित साजिश थी."

First published: 16 June 2016, 11:40 IST
 
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