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यूपी का मुख्यमंत्री बनने में बीजेपी नेताओं की दिलचस्पी नहीं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 May 2016, 19:04 IST

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के साथ उतर सकती है. बीजेपी ने असम चुनाव से पहले ही केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और पार्टी को राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत मिला.

पिछले साल बीजेपी ने बिहार और दिल्ली चुनावों में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया और दोनों राज्यों में पार्टी की करारी हार हुई.

अब असम के परिणाम से उत्साहित पार्टी ने उत्तर प्रदेश के चुनावों से पहले मुख्यमंत्री प्रत्याशी का नाम घोषित करने पर विचार करने की घोषणा की है. इस घोषणा के बाद संभावित नामों पर अटकलों का दौर चल रहा है.

कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को इसमें शामिल कर सकता है. उनके अलावा पार्टी के आतंरिक सर्वेक्षण में वरुण गांधी का नाम भी शामिल हैं.

दूसरी ओर बीजेपी के कई कद्दावर नेता मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर अपनी अनिच्छा जाहिर कर रहे हैं. इनमें उमा भारती, मनोज सिन्हा और योगी आदित्यनाथ प्रमुख हैं.

उमा भारती, केंद्रीय मंत्री

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से सांसद और केंद्र सरकार में जल संसाधन मंत्री उमा भारती का कहना है कि वह यूपी की राजनीति में फिलहाल अपनी गुंजाइश नहीं देख रहीं. सीएम पद से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके एजेंडे पर अभी सिर्फ गंगा है.

53 वर्षीय उमा भारती खुद लोध समाज से आती हैं और उत्तर प्रदेश में इस जाति के अच्छे खासे मतदाता हैं. वह मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं.

2005 में पार्टी से निष्कासित की गई उमा भारती की नितिन गडकरी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद 2011 में बीजेपी में दोबारा वापसी हुई थी. इसके अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने बुंदेलखंड इलाके में महोबा जिले के चरखारी विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी.

मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री

केशव प्रसाद मौर्य के उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनने से पहले केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा का नाम इस पद के लिए प्रमुखता से सामने आया था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि बीजेपी सिन्हा को आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी का चेहरा बनाएगी.

मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर मनोज सिन्हा का कहना है कि वे बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए जाने की दौड़ में शामिल नहीं हैं.

उन्होंने कहा, 'मैं इस प्रकार की किसी भी दौड़ में शामिल नहीं हूं. मैं जहां हूं, वहीं खुश हूं. पार्टी ने मुझे जनता की सेवा के लिए जो जिम्मेदारी दी है, मैं उसे पूरी ईमानदारी से निभा रहा हूं.'

मनोज सिन्हा उत्तर प्रदेश के बिहार से सटे जिले गाजीपुर की लोकसभा सीट से तीसरी बार (1996, 1999 व 2014) सांसद चुने गए हैं. सिन्हा की गिनती पूर्वी उत्तर प्रदेश के दमदार नेताओं में होती है.

योगी आदित्यनाथ, सांसद

1998 से लगातार गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम हर चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद की रेस में होता है. आदित्यनाथ पूर्वांचल में बीजेपी के वरिष्ठ नेता है. उनकी छवि उग्र हिंदुत्ववादी नेता की है.

सीएम पद की रेस में शामिल होने के सवाल पर आदित्यनाथ का कहना है, ' सीएम उम्मीदवार बीजेपी संसदीय बोर्ड तय करेगा, मैं सीएम पद का दावेदार नहीं हूं.'

कुछ महीने पहले गोरखनाथ मंदिर में भारतीय संत सभा की बैठक में संतों ने इशारों- इशारों में उनका नाम मुख्यमंत्री पद के लिए उछाल दिया था.

बीजेपी का यूपी में रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है. पार्टी के प्रदेश में 1989 में 57, 1991 के राम मंदिर की लहर में 221, बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद 1993 में 177, 1996 में 174, 2002 में 88, 2007 में 51 और 2012 में 48 विधायक जीते थे.

पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने प्रदेश की 80 संसदीय सीटों में से 73 सीटों पर जीत हासिल की थी. ऐसे में पार्टी विधानसभा चुनाव में भी अपना दमदार प्रदर्शन दोहराना चाहेगी.

First published: 30 May 2016, 19:04 IST
 
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