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मुसलमान के रूप में जीवन बिताने के लिए गई SC: हादिया

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 March 2018, 13:42 IST

केरल के बहुचर्चित हादिसा केस में सुप्रीम कोर्ट ने हादिसा और उसके पति शफीन के पक्ष में फैसला दिया था. कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें उसने इस शादी को अवैध करार दिया था. कोर्ट ने कहा कि हादिया अपने पति के साथ रह सकती है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस निकाह को वैध बताया था. 

कोर्ट के फैसले के बाद हादिया ने सोमवार को मीडिया से बातचीत की. न्यूज एजेंसी आईएनएस के मुताबिक हादिया ने कहा कि मैं इस फैसले से खुश हूं. हादिया ने फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा," मैं आजादी मिलने से बेहद खुश हूं.मैं दो बातों के लिए सुप्रीम कोर्ट गई थी. पहला मैं मुसलमान के तौर पर जीवन जीना चाहती थी. दूसरा अपने अपने जीवनसाथी के रहना चाहती थी."

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही साफ कर दिया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) लव जिहाद के मामले में इसके पहुलओं पर पहले की तरह जांच कर सकती है.

क्या था मामला?

पिछले साल हादिया ने मुस्लिम धर्म अपनाकर शफीन जहां नाम के शख्स से निकाह कर लिया था. इसके बाद हादिया के अशोकन केएम ने इस मामले को लेकर केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. केरल हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए इसे 'लव जिहाद' का मामला माना था. केरल हाईकोर्ट ने हादिया और शफीन की शादी को रद्द कर दिया था. इसके बाद शफीन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
 
सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल नवंबर में हादिया को तमिलनाडु के सलेम स्थित होम्योपैथिक कॉलेज में अपनी शिक्षा जारी रखने की अनुमति दी थी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं हदिया ने अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई थी. जिसकी कोर्ट ने इजाजत दे दी. वहीं हादिया के पिता के.एम. अशोकन ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी अखिला अशोकन का गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराया गया था. 
 
First published: 12 March 2018, 13:39 IST
 
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