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दूसरी बार गुजरात की मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहती आनंदीबेन पटेल

आकाश बिष्ट | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने अगली बार मुख्यमंत्री नहीं बनने की इच्छा जताकर गुजरात की सियासत को गरमा दिया है. हालांकि विश्लेषकों की माने तो पटेल का यह बयान महज चेहरा बचाने की कवायद है.
  • पटेल को हाल ही में कांग्रेस के हाथों पंचायती चुनाव हारना पड़ा है. इसके अलावा उनकी बेटी के खिलाफ अनियमितिताओं के आरोप हैं. अहम बात यह है कि पटेल आंदोलन को लेकर अमित शाह और आनंदी बेन पटेल में कई मतभेद उभर आए हैं.

गुजरात की मुख्यमंत्री आनंबीबेन ने कहा है कि वह दूसरी बार मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालने को लेकर इच्छुक नहीं है. खबरों के मुताबिक पटेल का कहना है कि वह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सही तरीके से संभाल नहीं पाई हैं.

हालांकि गुजरात की राजनीति की समझ रखने वाले विश्लेषकों ने कहा कि पटेल को हाल ही में कांग्रेस के हाथों पंचायती चुनाव हारना पड़ा है. इसके अलावा उनकी बेटी के खिलाफ अनियमितिताओं के आरोप हैं. हालांकि अहम बात यह है कि पटेल आंदोलन को लेकर अमित शाह और आनंदी बेन पटेल में कई मतभेद उभर आए हैं. 

विश्लेषकों की माने तो इतना सब कुछ होने के बाद उनकी उम्मीदवारी खतरे में पड़ गई है. ऐसे में पटेल की तरफ से यह बयान आना चौंकाने वाली बात नहीं है. 

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं को कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दिए जाने की अपील भी आनंदी बेन के लिए सही नहीं है. आनंदी बेन अगले साल 75 साल की हो रही हैं. गुजरात में अगले साल ही चुनाव होने वाले हैं.

पटेल के बयान के बाद बीजेपी के बड़े नेताओं के बीच सुगबुगाहट शुरू हो गई है. उनका दावा है कि उन्होंने यह बात कहकर एक तरह से राज्य बीजेपी के नेतृत्व में बड़े बदलाव की राह तैयार कर दी है. 

गुजरात इकनॉमिक सेल के कन्वेनर यमल व्यास ने कहा, 'पार्टी इस बात को लेकर सहमत है कि राज्य नेतृत्व में बदलाव का समय आ गया है और हमें नए और युवा नेताओं को आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है.'

पार्टी में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था और यही वजह थी पार्टी के वरिष्ठ नेता ओम माथुर को दिनों के दौरे पर गुजरात भेजा गया. स्थानीय खबरों के मुताबिक माथुर ने माना कि पार्टी में जबरदस्त गुटबंदी है और उन्होंने इसे सुलझाने का वादा किया. माना जा रहा कि माथुर 11 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को रिपोर्ट सौंपेंगे.

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पटेल का यह बयान चेहरा बचाने की कवायद है. उन्होंने कहा कि आनंदीबेन पटले का यह बयान बीजेपी के आंतरिक गुटबाजी को जाहिर करता है. 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व जीपीसीसी प्रेसिडेंट अर्जुन मोढवाढिया ने कहा, 'उनका बयान बताता है कि गुजरात बीजेपी में आंतरिक तौर पर बेहद असंतोष है.' 

उन्होंने कहा कि अमित शाह और आनंदीबेन एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं और अब यह बात सामने आ चुकी है. पूरा घटनाक्रम यह भी बताता है कि बीजेपी राज्य में अपनी जमीन खो रही है और यह सब कुछ मतदाताओं को बिखरने से बचाने की कोशिश है.'

उन्होंने कहा, 'अगर बीजेपी को लगता है कि इससे उन्हें चुनाव में मदद मिलेगी तो वह भ्रम में है.' विश्लेषकों ने भी इस बात पर मुहर लगाई. उनका कहना है कि गुजरात में मोदी के बाद पार्टी में कोई करिश्माई नेता नहीं है और इस वजह से पार्टी का मनोबल टूट रहा है.

संभावना है कि अमित शाह को गुजरात भेजकर उन्हें मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर सामने रखा जा सकता है

2019 में गुजरात का बीजेपी के हाथों से निकलना बड़ा झटका होगा और यही वजह है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह राज्य की राजनीति पर करीब से नजर रखे हुए हैं. 

संभावना है कि अमित शाह को गुजरात भेजकर उन्हें मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर सामने रखा जा सकता है. हालांकि इस बात को लेकर भी शंका है कि क्या शाह बीजेपी के प्रेसिडेंट जैसे शक्तिशाली पद को छोड़ेंग. 

विश्लेषक ने अपना नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया, 'कोई भी कैबिनेट मंत्री या बीजेपी का प्रेसिडेंट गुजरात का मुख्यमंत्री बनना चाहेगा.' उन्होंने कहा कि पार्टी के पास राजनीतिक विजन नहीं है और कोई भी नेता अलग हट कर नहीं सोच रहा है.

उन्होंने कहा, '2017 में होने वाला चुनाव बीजेपी के लिए कड़ी परीक्षा साबित होगी.' हालांकि गुजरात बीजेपी का मानना है कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और जो कुछ भी सामने आ रहा है वह मीडिया की उपज है. 

आरएसएस के एक नेता ने बताया, 'जब आनंदीबेन को 2014 में सीएम का उम्मीदवार बनाया गया तब राज्य में किसी ने कुछ नहीं कहा. तो इस बार क्या अलग होगा. लेकिन 2017 का चुनाव जीतना बीजेपी के लिए मुश्किल होगा. पार्टी को जमीनी स्तर पर काफी कुछ करना होगा.' 

अब हर किसी की नजर ओम माथुर की रिपोर्ट पर है जिसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी. उनकी रिपोर्ट में कुछ बड़े बदलाव की सिफारिशों को किए जाने की उम्मीद है और इसके बाद गुजरात की राजनीति में फिर से बड़ा उठापटक होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

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First published: 12 March 2016, 8:45 IST
 
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