Home » इंडिया » IAF needs Rs 8,100 cr for securing 54 air bases
 

एयर बेस में घुसपैठियों को देखते ही गोली मारने के आदेश

सुहास मुंशी | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • पठानकोट हमले के बाद भारतीय वायु सेना पश्चिमी कमान के फ्लाइट बेस को घुसपैठ होने की सूरत में देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं.
  • वायु सेना ने सरकार से एयर बेस के 100 मीटर और हथियारों के डिपो के 900 मीटर के दायरे में किसी प्रकार की निर्माण गतिविधि पर रोक लगाए जाने की मांग की है.

पठानकोट हमले से निश्चित तौर पर बड़ा नुकसान हुआ है और इस हमले की वजह से हुई किरकिरी को देखते हुए भारतीय वायु सेना ने बुधवार को पश्चिमी कमान के 25 फ्लाइंग बेस में किसी प्रकार की घुसपैठ होने की सूरत में देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए हैं. 

साथ ही देश भर के 54 संवेदनशील एयर बेस में सुरक्षा को सख्त करने के लिए 8,100 करोड़ रुपये के आधुनिकीकरण योजना के प्रस्ताव पर काम करना शुरू कर दिया गया है. 

वायु सेना के एक बड़े अधिकारी ने बताया, 'पश्चिमी कमान के सभी एयर बेस को हाई अलर्ट पर रखा गया है. किसी तरह की अवैध घुसपैठ के मामले में देखते ही गोली मारे के आदेश दिए गए हैं.' वायु सेना ने सरकार से एयर बेस के 100 मीटर और हथियारों के डिपो के 900 मीटर के दायरे में किसी प्रकार की निर्माण गतिविधि पर रोक लगाए जाने की मांग की है. 

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पठानकोट हमला एक तरह से हमारे लिए सबक रहा है जिसमें पाकिस्तानी आतंकवादी छावनी की दीवार चढ़कर अंदर आए और एक दिन से अधिक समय तक कोई उनकी गतिविधियों को भांप भी नहीं सका.

अधिकारी ने कहा, 'पठानकोट हादसा विफलता नहीं थी बल्कि इसने हमारी खामियों को सामने रखा. हम अब उन्हें दुरुस्त करने की कोशिश कर रहे हैं.'

देश भर के 950 फ्लाइंग बेस की समीक्षा वाली रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंप दी गई है. पठानकोट हमले के बाद इस जांच की सिफारिश की गई थी. रिपोर्ट में एयर बेस की चौहद्दी को दुरुस्त करते हुए उसमें सीसीटीवी कैमरा, मोशन डिटेक्टर्स, क्वाड्रो ड्रोंस लगाने की सिफारिश की गई है.

वायु सेना ने देश भर के एयर बेस को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार से 1,000 गरूड़ कमांडो की मांग की है

अधिकारी ने बताया कि एक बेस की सुरक्षा का आधुनिकीकरण किए जाने में 100-150 करोड़ रुपये की लागत आएगी. मंत्रालय के सामने कई प्रस्ताव रखे गए हैं लेकिन वित्तीय मजबूरी की वजह से अभी तक इन पर काम नहीं शुरू हो सका है. उन्होंने कहा, 'सभी प्रस्ताव पहले से ही विचाराधीन हैं. वित्तीय मजबूरियों की वजह से हम इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं. हमारी प्राथमिकता अपने मुख्य परिसंपत्तियों को सुरक्षित करने की है.'

दांव पर सुरक्षा

पठानकोट हादसे की जांच से यह बात सामने आई है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान किस तरह से असुरक्षित हो गए हैं. खुफिया एजेंसियों की सूचना के आधार पर पंजाब पुलिस ने हाल ही में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जिसके पास से पठानकोट छावनी की संवेदनशील सूचनाएं और तस्वीरें बरामद हुई हैं.

चौंकाने वाली बात यह रही कि इरशाद अहमद को फोटोग्राफी के दौरान गिरफ्तान नहीं किया जा सका. खबरों के मुताबिक उसने फोटो खींच कर उसे सज्जाद नाम के एक व्यक्ति को भेजा जिसे हाल ही में जम्मू से गिरफ्तार किया गया है. 

पुलिस के पास इस बात के सबूत हैं कि सज्जाद ने इन फोटो को पाकिस्तान भी भेजा. पठानकोट छावनी में छह आतंकवादियों के घुसने से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लग गई थी.

प्राथमिकता पर काम

पठानकोट हमले को लेकर चौतरफा विमर्श के बावजूद देश भर के एयर बेस का सुरक्षा आधुनिकीकरण किए जाने के मामले में 800 करोड़ रुपया खर्च किया जाना रक्षा मंत्रालय की प्राथमिकता नहीं है.

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर मंत्रालय को तीनों सेना के प्रमुखों के तेवर का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने रक्षा मंत्री को यह बता दिया है कि सैन्य अधिकारियों के मुकाबले सिविल अधिकारियों की सैलरी अधिक होने की वजह से सेना के मनोबल पर फर्क पड़ेगा.

हालांकि सच्चाई यह है कि रक्षा मंत्रालय को नकदी की तंगी का सामना करना पड़ रहा है. सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें तो दूर वन रैंक वन पेंशन को लागू किए जाने में मंत्रालय को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

वहीं सरकार को दूसरी तरफ रफेल डील को पूरा करना है जिसकी मौजूदा कीमत पर लागत करीब 80,000 करोड़ रुपये है. इसके अलावा अन्य रक्षा सौदे पर काम चल रहा है. ऐसे में यह देखना होगा कि मंत्रालय किस तरह से अपनी प्राथमिकताओं को तय करता है.

First published: 4 February 2016, 10:03 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

प्रिंसिपल कॉरेसपॉडेंट, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में आने से पहले इंजीनियर के रूप में कम्प्यूटर कोड लिखा करते थे. शुरुआत साल 2010 में मिंट में इंटर्न के रूप में की. उसके बाद मिंट, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और मेल टुडे में बाइलाइन मिली.

पिछली कहानी
अगली कहानी