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सेल्फी विवाद वाली डीएम बी चंद्रकला और 29 आईएएस ने सार्वजनिक नहीं की है अपनी संपत्ति

आवेश तिवारी | Updated on: 7 February 2016, 8:24 IST

अपनी कड़क छवि की वजह से न सिर्फ यूपी बल्कि पूरे देश में युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बुलंदशहर की डीएम बी चन्द्रकला समेत यूपी के 29 आईएएस अधिकारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा आज तक सरकार को नहीं दिया है. इस मामले में ये सभी अधिकारी डिफाल्टर साबित हो चुके हैं.

अपने साथ सेल्फी खिंचवाने वाले लड़के को जेल भिजवाने के आरोप में चर्चा में रहीं बुलंदशहर की डीएम बी चन्द्रकला के साथ यूपी की 6 अन्य महिला आईएएस अधिकारियों ने भी अपनी संपत्ति का ब्यौरा अब तक नहीं दिया है. 

मालूम हो कि सिविल सेवा अधिकारियों को साल 2014 के लिए 15 जनवरी 2015 तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा देना था. लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद भी इन अधिकारियों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सरकार को उपलब्ध नहीं कराया है.

साल 2015 के लिए राज्य सरकार को 28 फरवरी तक सभी पदस्थ आईएएस अधिकारियों को संपत्ति का ब्यौरा उपलब्ध कराना है. ब्यौरा उपलब्ध न कराये जाने के मामले में जब डीएम बुलंदशहर से जानकारी मांगी गई तो डीएम ऑफिस से जवाब मिला कि 'मैडम' अभी व्यस्त हैं.

केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के जरिए जारी की गई सूचना के मुताबिक बुलंदशहर की डीएम बी चन्द्रकला की संपत्ति साल 2011-12 केवल 10 लाख रूपए थी, जो कि साल 2013-14 में बढ़ कर लगभग एक करोड़ हो गई.

साल 2011-12 में अपने गहने बेचकर और तनख्वाह के पैसे से चन्द्रकला ने आन्ध्र प्रदेश के उप्पल जिले में 10 लाख का फ़्लैट ख़रीदा था. इसके अलावा बी चन्द्रकला का लखनऊ के सरोजिनी नायडू मार्ग पर अपनी बेटी कीर्ति चन्द्रकला के नाम से 55 लाख का फ़्लैट है जिसके बारे में चन्द्रकला का कहना है कि यह फ़्लैट उनके सास-ससुर ने गिफ्ट किया है.

इसके अलावा आन्ध्र प्रदेश के अनुपनगर में भी उन्होंने 30 लाख का एक मकान अपने पैसे से ख़रीदा है जिससे वो 1.50 लाख रूपए सालाना की कमाई का दावा भी करती हैं. उनके पति रुमुलू अजमीरा के नाम एक खेती की जमीन भी करीम नगर में है.

आन्ध्र प्रदेश के उस्मानिया विश्वविद्यालय से स्नातक और इसी विश्वविद्यालय से डिस्टेंस एजुकेशन से एमए करने वाली बी चन्द्रकला के संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिए जाने को लेकर यूपी कैडर के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि 'समय से संपत्ति का ब्यौरा न दिया जाना आश्चर्यजनक है, बी चन्द्रकला जैसी अधिकारी से इन तरह की लापरवाही की उम्मीद कत्तई नहीं थी.'

गौरतलब है कि सिविल सेवा नियमावली में यह साफ़ उल्लिखित है की जो भी आईएएस अधिकारी प्रतिवर्ष 31 जनवरी तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराएगा उन्हें पदोन्नति नहीं दी जाएगी और अखिल भारतीय सेवा के अंतर्गत वरिष्ठ पदों के लिए उनका नाम भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

यहां हम यूपी कैडर के उन 29 आईएएस अधिकारियों की सूची दे रहे हैं, जिन्होंने आज की तारीख तक
साल 2014 के लिए अपनी संपत्ति का ब्यौरा सरकार को नहीं दिया है.
1    एलएम वैस (यूपी-1977)
2    शैलेश कृष्णा ( यूपी-1980)
3    राकेश शर्मा  (यूपी-1981)
4    हरी कृष्णा (यूपी-1981)
5    सूर्य प्रताप सिंह (यूपी-1982)
6    राज प्रताप सिंह (यूपी-1983)
7    अतुल बगाई (यूपी-1983)
8    पीवी जगन मोहन (यूपी-1987)
9    केआरएम राव (यूपी-1984)
10    प्रज्ञान राम मिश्रा (यूपी-1996)
11    रीता सिंह (यूपी-1997)
12    अनिल राज कुमार (यूपी-2000)
13    अजय दीप सिंह (यूपी-2002)
14    शरद कुमार सिंह (यूपी-2002)
15    भगेलू राम शास्त्री (यूपी-2003)
16    कनक त्रिपाठी (यूपी-2003)
17    अनिता श्रीवास्तव (यूपी-2004)
18    सुरेश कुमार- एक (यूपी-2004)
19    दिग्विजय सिंह (यूपी-2004)
20    एस मातु शालिनी (यूपी-2008)
21    बी चंद्रकला (यूपी-2008)
22    वैभव श्रीवास्तव (यूपी-2009)
23    आशुतोष निरंजन   (यूपी-2010)
24    नेहा शर्मा (यूपी-2010)
25    आन्द्रा वसमी (यूपी-2011)
26    चांदनी सिंह (यूपी-2013)
27    राज कमल यादव (यूपी-2013)
28    एसके वर्मा (यूपी-2013)
29    आरके मंदर(यूपी-2013)

First published: 7 February 2016, 8:24 IST
 
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