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झारखंड सरकार को चुभ गया आंबेडकर की अनुयायी एक IAS अफ़सर का सवाल

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 25 October 2016, 18:03 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • पिछले कुछ दिनों से झारखंड में धर्मांतरण का मु्द्दा सुर्ख़ियों में है. मुख्यमंत्री रघुबर दास ख़ुद भड़काऊ बयान दे रहे हैं. 
  • पंचायती राज सचिव ने जब इस मुद्दे को उठाने के पीछे सरकार की नीयत पर सवाल किया तो उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है. 

धर्मांतरण का मुद्दा अचानक चर्चा में आने पर राज्य की एक वरिष्ठ नौकरशाह वंदना डालेल ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है. मगर जवाब मिलने की बजाय सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है. 24 अक्टूबर को जारी नोटिस में अफ़सर से पूछा गया है कि सरकार को उनपर कार्रवाई क्यों नहीं करनी चाहिए. 

1996 बैच की आईएएस अफ़सर वंदना डालेल पंचायती राज सचिव हैं. उन्होंने 20 अक्टूबर की रात 11:15 बजे फेसबुक पर सवाल किया था, 'जब एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान आदिवासियों के धर्म के बारे में सवाल किया जाता है तो दिमाग में एक सवाल उठता है. क्या जनजातीय समुदाय के लोगों को अपनी पसंद के अनुसार किसी धर्म को चुनने का अधिकार नहीं है? अचानक क्यों लोगों ने जनजातीय समुदाय के लोगों के धर्म के बारे में सोचना शुरू कर दिया है?'

झारखंड में बार-बार सरकार और कई हिंदूवादी संगठन बयान के ज़रिए आदिवासियों तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि लालच देकर उनका धर्मांतरण करवाया जा रहा है. विदेशी ताक़तों के इशारे पर उनकी परंपरा और संस्कृति तबाह की जा रही है. 

यह संयोग है कि जब वंदना डालेल ने फेसबुक पर सवाल किया तो ठीक 7 मिनट बाद 11:22 बजे मुख्यमंत्री के फेसबुक हैंडल से एक पोस्ट जारी हुई. यहां रघुबार दास ने लिखा, 'झारखंड में कोई भी हमारे भोले-भाले आदिवासियों को भय या लालच दिखाकर उनकी परंपरा व संस्कृति से छेड़छाड़ करेगा, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. आदिवासियों की परंपरा-संस्कृति पर हमला करनेवाले सावधान हो जायें. संस्कृति को नष्ट करने के इस प्रयास को हम सफल होने नहीं देंगे'. 

मुख्यमंत्री की इस पोस्ट से पता चलता है कि वह झारखंड में कथित धर्मांतरण का मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसके ठीक एक दिन पहले भी रघुबर दास ने फेसबुक पर लिखा, 'ब्रिटिश काल से ही छोटानागपुर की संस्कृति-परंपरा को छिन्न-भिन्न करने के लिए विदेशी शक्तियां लगी हुई हैं. हमें उन्हें पहचान कर हमें मिलकर मुकाबला करना है. सरना समाज के युवाओं को संस्कृति-परंपरा बचाने की जिम्मेदारी उठानी होगी. इस काम में सरकार साथ है'. 

आरएसएस भी साथ

सरकार के इस अभियान में आरएसएस भी उसके साथ है. इस बयान से दो दिन पहले 17 अक्तूबर को गुमला के परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम में हिंदू जागरण मंच की ओर से सरना सनातन महासम्मेलन आयोजन हुआ जिसमें आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार आए. यहां आदिवासियों के जुटान में उन्होंने भाषण दिया कि सनातन और सरना धर्म एक ही हैं, जिसे अलग-अलग बताकर तोड़ने की साजिश चल रही है. 

इंद्रेश ने इसके बाद नियंत्रण रेखा पर हुई सर्जिकल स्ट्राइक का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को कई बार चेतावनी दी गयी, क्योंकि हम फसाद नहीं चाहते, दंगा, झगड़ा नहीं चाहते लेकिन पाकिस्तान नहीं माना तो सर्जिकल स्ट्राइक हुई. इसी तरह गुमला की धरती पर भी धर्मांतरण के खिलाफ हम सबों को मिलकर सर्जिकल स्ट्राइक चलाने की जरूरत है. 

कौन हैं वंदना डालेल

अफ़सर वंदना चूंकि पंचायती राज सचिव हैं. ग्रामीण विकास के कई सारे आयोजनों में वह मुख्यमंत्री के साथ मंच पर मौजूद होती हैं. 20 अक्टूबर को भी हुए ग्राम विकास मेला में वह सीएम के साथ थीं. तमाम भड़काऊ बयानों और उनपर होने वाली प्रतिक्रियायों को वह ख़ुद देख रही हैं. मुमकिन है कि वह इसकी राजनीति समझ रही हों, इसीलिए उन्होंने फेसबुक पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया. 

वंदना डालेल की फेसबुक टाइमलाइन से गुज़रने पर पता चलता है कि जनजातियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध वह एक प्रगतिशील विचारधारा की अफ़सर हैं. अपनी टाइमलाइन पर वह आदिवासियों के दर्शन, साहित्य और कविताएं साझा करती हैं. डॉक्टर भीमराव आंबेडकर भी उनकी टाइमलाइन पर मौजूद हैं. वंदना डालेल के पति संजय बारा भी आईआरएस हैं. 

First published: 25 October 2016, 18:03 IST
 
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