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नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के विवादित सीईओ रमारमण पद से हटे

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:20 IST
(एजेंसी)

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के विवादित सीईओ रमारमण को सभी पदों से हटा दिया है.

बीते 20 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आईएएस रमारमण के तबादले के मामले में यूपी सरकार और रमारमण की अपील को नामंजूर करते हुए उनके काम पर लगी रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया था.

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आईएएस रमारमण से पूछा था कि इतने विवादों में फंसे होने के बावजूद वो आखिर इसी पद पर अब तक कैसे और क्यूों बने हुए हैं?

आईएएस रमारमण को पद पर बनाये रखने के लिए यूपी सरकार के कोर्ट में जाने पर कई सवाल उठे थे. ऐसा नहीं है कि रमारमण पर अखिलेश सरकार ही मेहरबान है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी अपने कार्यकाल में रमारमण को नोएडा में बिठाए रखा था.

हाईकोर्ट का सख्त रुख

20 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस दिलीप भोंसले और जस्टिस यशवंत शर्मा की बेंच ने रमारमण के कार्यकाल के दौरान हुए जमीन के अधिग्रहण की सारी फाइलें कोर्ट के सामने पेश करने का आदेश दिया था.

इसके अलावा कोर्ट ने यूपी सरकार से यह भी पूछा कि एनसीआर में रमारमण के कार्यकाल के दौरान कौन-कौन से अफसर तैनात थे और उन्हें क्यों हटाया गया?

गौरतलब है कि 1987 बैच के आईएएस रमारमण पिछले 10 साल से नोएडा, ग्रेटर नोएडा में ही तैनात थे. बीते एक जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार को झटका देते हुए रमारमण के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के सीईओ के तौर पर काम करने पर रोक लगा दी थी. इतना ही नहीं कोर्ट ने कड़े फैसले में रमारमण के अधिकार जब्त करने का भी आदेश दिया था.

First published: 25 August 2016, 5:17 IST
 
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