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'आईबी मिनिस्ट्री का आदेश संसद के बनाये कानून की अवमानना'

सुनील रावत | Updated on: 4 March 2018, 17:44 IST

सूचना प्रसारण मंत्रालय और प्रसार भारती बोर्ड पिछले कुछ हफ्तों से कई मुद्दों को लेकर आमने-सामने हैं. अपनी स्वायत्तता का बचाव करते हुए प्रसार भारती ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के कई निर्देशों को खारिज कर दिया. प्रसार भारती का कहना है कि ये निर्देश प्रसार भारती अधिनियम 1990 की अवमानना हैं.

प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश और प्रसार भारती बोर्ड के सदस्यों ने गुरुवार को बैठक में प्रसार भारती के सभी संविदागार कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के निर्देश की भाषा पर भी सख़्त आपत्ति ज़ताई. प्रसार भारती का तर्क है कि दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो दोनों में ऐसे कर्मचारियों कीबड़ी संख्या है जो अनुबंध पर काम करते हैं और उन्हें वैकल्पिक रूप से व्यवस्थित किए बिना और निकाले जाने से कामकाज पर असर पड़ेगा.

प्रसार भारती का इस पर भी विरोध है कि मंत्रालय वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ ज़रावी और अभिजीत मजूमदार को प्रसार भारती बोर्ड में नियुक्त करना चाहता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ज़रावी की तनख़्वाह सालाना एक करोड़ रुपए और मजूमदार की 75 लाख रुपए तय की गई थी. प्रसार भारती का कहना है कि अनुबंध पर रखे गए कर्मचारियों की अधिकतम तनख़्वाह 1.6 लाख रुपए महीना (19.2 लाख रुपए सालाना) है. इसलिए कर्मचारी को एक करोड़ रुपए सालाना का पैकेज़ देना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता.

प्रसार भारती बोर्ड की बैठक में आईबी के मंत्रालय के उस प्रस्ताव को भी ख़ारिज कर दिया गया, जिसमे एक सर्विंग आईएएस अधिकारी को बोर्ड के सदस्य के रूप में अपॉइंट करने को कहा जा रहा था. जो यह प्रसार भारती अधिनियम के खिलाफ था.

First published: 4 March 2018, 17:40 IST
 
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