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कौन हैं अरविंद सुब्रमण्यम, और क्यों उन्हें नौकरी जाने का डर है?

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 March 2016, 14:00 IST

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्‍यम ने मंगलवार को मुंबई यूनिवर्सिटी में छात्रों के एक सवाल के जवाब में कहा कि बीफ बैन पर बोलने से मेरी नौकरी जाने का खतरा है. इसलिए मैं इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अरविंद सुब्रमण्‍यम ने छात्रों से कहा कि, 'आप समझ सकते हैं कि आपके बीफ बैन के सवाल पर मैंने कुछ भी कहा तो मेरी नौकरी चली जाएगी, लेकिन मैं आपके इस सवाल के लिए धन्यवाद कहता हूं.'

अरविंद सुब्रमण्यम के जवाब को समझते हुए छात्रों ने तालियां बजाई. मुंबई यूनिवर्सिटी के छात्रों ने उनसे पूछा था कि क्‍या बीफ बैन से किसानों की कमाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल आ सकती है.

पिछले सप्ताह बेंगलुरु में लेक्चर में सुब्रमण्यम ने कहा था कि कोई देश धार्मिक असमानता को किस तरह से देखता, समझता और सामना करता है. इस बात से उस देश के आर्थिक विकास पर काफी असर पड़ता है.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में बीफ पर पूरी तरह से बैन लगा हुआ है. वहीं पिछले साल उत्तर प्रदेश के दादरी में कथित तौर पर बीफ खाने की अफवाह में हिंसक भीड़ ने अखलाक नामक व्यक्ति की हत्‍या कर दी थी. इसकी वजह से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की धर्मनिरपेक्षता पर मानवाधिकार संगठनों ने उंगली उठाई थी.

जानिये कौन हैं डॉ. अरविंद सुब्रमण्यम

  • केंद्र सरकार ने अमेरिका स्थित अर्थशास्त्री अरविंद सुब्रमण्यम को केंद्रीय वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) 16 अक्टूबर 2014 को नियुक्त किया.
  • अरविंद सुब्रमण्यम को अनुबंध के आधार पर तीन साल की अवधि के लिए भारत सरकार का मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया.
  • डॉ. सुब्रमण्यम का बतौर भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वेतनमान 80000 रुपये (निर्धारित) है.
  • डा. अरविंद सुब्रमण्यम सेंट स्टीफंस कॉलेज और भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद के भी छात्र रहे हैं.
  • डा. सुब्रमण्यबम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में अर्थशास्त्री तथा जी-20 पर वित्त मंत्री के विशेषज्ञ समूह के सदस्य भी रहे हैं.
  • डा. अरविंद सुब्रमण्यम पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में डेनिस वेदरस्टोन सीनियर फेलो और वैश्विक विकास केन्द्र में सीनियर फेलो हैं.
  • ‘आरईपीईसी’ रैंकिंग के मुताबिक, डॉ. सुब्रमण्यनम को मौजूदा समय में अनुसंधान उद्धरण के लिहाज से विश्व के शीर्ष एक फीसदी विद्वान अर्थशास्त्रियों में शामिल किया गया.
  • ‘फॉरेन पॉलिसी’ नामक पत्रिका ने डा. सुब्रमण्यम को वर्ष 2011 में विश्व के शीर्ष 100 वैश्विक चिंतकों में शामिल किया.
  • वर्ष 2011 में पत्रिका ‘इंडिया टुडे’ ने डा. सुब्रमण्यम को पिछले तीस वर्षों के दौरान भारत के शीर्ष 30 ‘मास्टर्स ऑफ द माइंड’ में शामिल किया.
  • डा. सुब्रमण्यम ने ‘इक्लिप्सल : लिविंग इन द शैडो ऑफ चाइनाज इकोनॉमिक डोमिनेंस’ नामक पुस्तक लिखी. जिसे चार भाषाओं प्रकाशित किया गया और इसकी 130,000 प्रतियां छापी गई. इस पुस्तक को पुरस्कृत भी किया गया.
  • डॉ. सुब्रमण्यम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के शोध विभाग में एवं उरुग्वे दौर की व्यापार वार्ताओं के दौरान गैट में भी कार्यरत रहे.
  • डॉ. सुब्रमण्यम ने भारत, विकास, व्‍यापार, संस्‍थानों, मदद, जलवायु परिवर्तन, तेल, बौद्धिक संपदा, डब्‍ल्‍यूटीओ, चीन और अफ्रीका पर काफी कुछ लिखा है। अमेरिकन इकोनॉमिक रिव्‍यू, जर्नल ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ एवं जर्नल ऑफ पब्लिक इकोनॉमिक्‍स जैसी कई जानी-मानी पत्रिकाओं में उनके बारे में काफी छपा है.
First published: 9 March 2016, 14:00 IST
 
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