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छात्र राजनीति में नहीं होते तो आप भी संसद में नहीं होते वेंकैया नायडू

अभिषेक पराशर | Updated on: 5 March 2016, 17:13 IST
QUICK PILL
  • छात्रों को राजनीति से दूर रहने की सलाह देने वाले वेंकैया नायडू नेल्लोर में अपने काॅलेज और आंध्रप्रदेश विश्वविद्यालयमें छात्र संघ के प्रेसिडेंट रह चुके हैं. वे आपातकाल के दौरान लोकनायक जय प्रकाश नारायण छात्र संघर्ष समिति के संचालक भी रहे. 
  • राजनाथ सिंह 20 साल की उम्र में ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के गोरखपुर यूनिट के संगठन सचिव बन गए थे. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का छात्र संगठन है.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हुए कथित देश विरोधी प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने यह कहने में देर नहीं लगाई कि छात्रों को कॉलेज और विश्वविद्यालय के कैंपस में राजनीति की बजाए पढ़ाई करनी चाहिए. 

नेताओं की बयानबाजी के बीच सबसे ज्यादा चौंकाने वाले बयान संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू का रहा. नायडू ने कहा, 'उन्हें (छात्रों को) केवल पढ़ाई करनी चाहिए और राजनीति से दूर रहना चाहिए. अगर वह राजनीति में इच्छुक हैं तो उन्हें पढ़ाई छोड़ राजनीति में शामिल हो जाना चाहिए. वह (कन्हैया कुमार) किसी राजनीतिक दल में शामिल हो सकता है. उनकी पसंदीदा पार्टी (सीपीआई) अब संसद में एक अंक में सिमट कर रह गई है. उन्हें पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए.'

नायडू ने ऐसा पहली बार नहीं कहा है. पिछले महीने नायडू ने कहा था, 'राजनीतिक और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए कैंपस का इस्तेमाल करना सही नहीं है.' देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कन्हैया कुमार छह महीनों के जमानत पर जेल से बाहर आ चुके हैं. नायडू ने जिस वीडियो के आधार पर एक महीने पहले बयान दिया था, उस वीडियो में छेड़छाड़ की बात अब सामने आ चुकी है.

छात्र अगर राजनीति से दूर होते तो अरुण जेटली संसद में बजट भाषण नहीं पढ़ रहे होते और राजनाथ सिंह गृह मंत्रालय नहीं संभाल रहे होते

छात्रों को राजनीति से दूर रहने की सलाह देते हुए नायडू अपने साथ-साथ बीजेपी के उन तमाम बड़े नेताओं को कटघरे में खड़ा कर देते हैं जो आज नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में अहम मंत्रालयों को संभाल रहे हैं. खुद नायडू भी उनमें से एक हैं और यह सभी नेता छात्र राजनीति का रास्ता तय करते हुए ही देश की केंद्रीय राजनीति में आए हैं. 

छात्र अगर राजनीति से दूर होते तो वित्त मंत्री अरुण जेटली संसद में बजट भाषण नहीं पढ़ रहे होते और राजनाथ सिंह गृह मंत्रालय नहीं संभाल रहे होते. 

नेतृत्व की मौजूदा पीढ़ी के अधिकांश नेता छात्र राजनीति से ही उभरकर सामने आए हैं और इसमें सभी दल शामिल हैं. चूंकि बीजेपी नेता बार-बार छात्रों को राजनीति से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं इसलिए हम केवल बीजेपी के उन नेताओं की सूची आपके सामने रख रहे हैं जिन्होंने छात्र राजनीति का दामन पकड़कर संसद तक का रास्ता किया. निश्चित तौर पर इन सभी ने पढ़ाई करते हुए ही राजनीति की होगी. 

वेंकैया नायडू, संसदीय कार्य मंत्री

नेल्लोर और आंध्रप्रदेश में छात्र संघ के प्रेसिडेंट रहे नायडू आपातकाल के दौरान लोकनायक जय प्रकाश नारायण छात्र संघर्ष समिति के संचालक रहे. आपातकाल के खिलाफ सबसे पहला मुखर प्रतिरोध गुजरात में छात्रों ने ही किया था. खुद नायडू ने भी छात्र रहते हुए तत्कालीन सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ मोर्चा खोला था.

हालांकि यह अलग बात है कि आज उनकी सरकार को भी छात्र संगठन के विरोध का सामना कर रहा है और वह छात्रों की बात सुनने की बजाए उन्हें कैंपस में राजनीति छोड़ पढ़ाई करने की सलाह दे रहे हैं.

राजनाथ सिंह, गृह मंत्री

Rajnath_ Sanjeev Verma/Hindustan Times/Getty Images

कन्हैया की गिरफ्तारी राजनाथ सिंह के आदेश पर हुई. जेएनयू प्रकरण में राजनाथ से एक के बाद एक कई गलतियां हुई जिसमें हाफिज सईद के पैरोडी अकाउंट को सही मानते हुए उन्होंने यह कहने में देर नहीं लगाई जेएनयू के छात्रों को हाफिज सईद का समर्थन मिल रहा है. 

हालांकि बाद में उनकी जबरदस्त किरकिरी हुई लेकिन उन्होंने इसके लिए न तो माफी मांगी और नहीं किसी तरह की सफाई दी.

राजनाथ सिंह 20 साल की उम्र के पहले ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के गोरखपुर यूनिट के संगठन सचिव बन गए थे. उन्होंने 1969-71 तक संगठन सचिव की हैसियत से एबीवीपी में काम किया. 

22 साल की उम्र में अरुण जेटली 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डुसू) के प्रेसिडेंट बने

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का छात्र संगठन है. जेएनयू मामले में अखिल भारतीय विद्याथी परिषद वामपंथी छात्र संगठनों पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाता रहा है.

इससे पहले हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी दलित छात्र रोहित वेमुला को यूनिवर्सिटी में निकाले जाने के मामले में एबीवीपी के नेताओं का नाम सामने आया था.

अरुण जेटली, वित्त मंत्री

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22 साल की उम्र में अरुण जेटली 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डुसू) के प्रेसिडेंट बने. इसके ठीक एक साल बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया.

पढ़ाई के दौरान जेटली छात्र राजनीति में जरबरदस्त रूप से सक्रिय रहे. जेटली जबरदस्त वक्ता भी हैं और यह सब कुछ उन्होंने कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही सीखा. 

नितिन गडकरी, सड़क परिवहन मंत्री

गडकरी के राजनीतिक करियर की शुरुआत बतौर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता के तौर पर हुई. बाद में उन्होंने जनता युवा मोर्चा ज्वाइन किया जो कि भारतीय जनता पार्टी की एकमात्र युवा ईकाई है. 

टेलीकॉम मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने भी राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन में ही की

आम तौर यह समझा जाता है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद बीजेपी की छात्र ईकाई है जबकि वह संघ की छात्र ईकाई है.गडकरी फिलहाल मोदी कैबिनेट में सड़क परिवहन मंत्री हैं.

रविशंकर प्रसाद, टेलीकॉम मिनिस्टर

रविशंकर प्रसाद ने भी राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन में ही की. प्रसाद बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के सहायक रह चुके है जो 1972 में पटना यूनिवर्सिटी के जनरल सेक्रेटरी हुआ करते थे.

मोदी के वक्त बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के प्रेसिडेंट हुआ करते थे. प्रसाद फिलहाल मोदी कैबिनेट में टेलीकॉम मिनिस्टर हैं.

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First published: 5 March 2016, 17:13 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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