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एस्सार लीक्स: अगर ये टेप सच हैं तो देश में कोर्ट, संसद और अधिकारी सब कुछ कॉर्पोरेट की जेब में है

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 June 2016, 17:33 IST
QUICK PILL
  • एस्सार टेप कांड राडियागेट की पहली कड़ी है. यह अलग बात है कि राडिया टेप का भंडाफोड़ पहले हो गया. अगर एस्सार टेप में उजागर हुई बातचीत सही है तो इस पूरे विवाद का खुला संदेश यह है कि लोकतंत्र के तीनों खंभों (विधायिका, न्यायपालिक और कार्यपालिका) को आसानी से \'मैनेज\' किया जा सकता है.
  • टेप की बातचीत इस असलियत को सामने रखती है. टेप की अधिकांश बातचीत रिलायंस इंडस्ट्रीज के ईद-गिर्द घूमती है.
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपनी कंपनी के डायरेक्टर सतीश सेठ से बात कर रहे हैं. वह बीजेपी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन के जरिये सुप्रीम कोर्ट को मैनेज करने की बात कर रहे हैं. वह कह रहे हैं कि अजय सिंह और तत्कालीन चीफ जस्टिस के साथ बैठक के जरिये यह किया जा सकता है.

एस्सार टेप कांड राडियागेट की पहली कड़ी है. यह अलग बात है कि राडिया टेप का भंडाफोड़ पहले हो गया. अगर एस्सार टेप में उजागर हुई बातचीत सही है तो इस पूरे विवाद का खुला संदेश यह है कि लोकतंत्र के तीनों खंभों (विधायिका, न्यायपालिक और कार्यपालिका) को आसानी से 'मैनेज' किया जा सकता है.

टेप की बातचीत इस असलियत को सामने रखती है. टेप की अधिकांश बातचीत रिलायंस इंडस्ट्रीज के ईद-गिर्द घूमती है.

आम बातचीत में अक्सर यह कहा जाता है कि देश को नेता नहीं बनिए चलाते हैं, और एस्सार टेप ने यह साफ कर दिया है कि देश को 'बनिए' नहीं बल्कि बड़े बनिए चलाते हैं. 'बड़े बनिए' (जिन्हें कॉरपोरेट के नाम से जाना जाता है) संसद, नौकरशाह और बैंक तक को खरीदने और उनकी निष्ठा तय करने की ताकत रखते हैं.

राडिया गेट से तत्कालीन यूपीए सरकार की विश्वसनीयता दांव पर लगी थी. एस्सार टेपकांड ने साफ कर दिया है न्यायपालिका, संसद और नौकरशाहों को खरीदने और उनकी निष्ठा तय करने का कारोबार यूपीए सरकार के पहले एनडीए के काल में भी होता रहा है. 

एस्सार के एक पूर्व कर्मचारी ने करीब 11 सालों तक अवैध तरीके से फोन की टैपिंग की और इसके दायरे में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का प्रधानमंत्री कार्यालय भी था. हालांकि कैच इन टेप की सत्यता को प्रमाणित नहीं करता है. 

एस्सार के जिस कर्मचारी के नेतृत्व में फोन टैपिंग के इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया, वह अब व्हिसल ब्लोअर बन चुका है. सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल एस्सार के पूर्व कर्मचारी अलबासित खान की तरफ से इस मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्यान में ला चुके हैं. खान उस वक्त एस्सार में सिक्योरिटी और विजिलेंस विभाग के हेड थे और इसी दौरान फोन की टैपिंग की गई. खान ने 2011 में कंपनी छोड़ दी थी.

राडिया गेट से तत्कालीन यूपीए सरकार की विश्वसनीयता दांव पर लगी थी.

टेप की रिकॉर्डिंग लोकतंत्र के तीनों खंभो की असलियत को सामने रखती है. टेप की अधिकांश बातचीत रिलायंस इंडस्ट्रीज के ईद-गिर्द घूमती है. 

रिलायंस, रुइया बंधु के पुराने प्रतिद्वंद्वी रहे हैं लेकिन अब एस्सार की ताकत टूट चुकी है. वर्चस्व की लड़ाई में एस्सार अब रिलायंस के सामने घुटने टेक चुका है. 

राडियागेट में रिलायंस की ताकत और सरकारों को प्रभावित करने की उसकी क्षमता सामने आ चुकी है. एस्सार टेप का खुलासा राडिया गेट से पहले की कहानी बताता है. 

कहानी, लोकतंत्र को मैनेज करने की, सरकार और संसदीय समिति के फैसले को प्रभावित करने की. कैैबिनेट में अपनी पसंद के मंत्रियों को बिठाने की ताकत. न्यायपालिक को घूस देकर अपनी मर्जी के फैसले लिखवाने की. बजट तक को बदलवाने की जिद. एस्सार टेप लोकतंत्र के हर कोने में रिलायंस की पहुंच और साथ में कॉरपोरेट की आपसी गलाकाट स्पर्धा को भी बयां करता है.

1 दिसंबर, 2002 की बातचीत

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी अपनी कंपनी के डायरेक्टर सतीश सेठ से बात कर रहे हैं. वह बीजेपी के दिवंगत नेता प्रमोद महाजन के जरिये सुप्रीम कोर्ट को मैनेज की बात कर रहे हैं. वह कह रहे हैं कि अजय सिंह और तत्कालीन चीफ जस्टिस की बैठक के जरिये यह किया जा सकता है.

29 जनवरी, 2003 की बातचीत

अनिल अंबानी और सतीश सेठ की बातचीत है. इस बातचीत में यह साफ सुना जा सकता किस तरह से रिलायंस शिवानी भटनागर हत्याकांड को मैनेज करने की कोशिश कर रही थी ताकि बीजेपी नेता प्रमोद महाजन को बचाया जा सके. कंपनी इस मामले में किस तरह अमर सिंह की मदद से संसद में हो रहे हंगामे को दबाने में सफल रही. 

शिवानी भटनागर इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार थीं. 1999 में पूर्वी दिल्ली में उनके घर पर ही उनकी हत्या कर दी गई थी. भटनागर हत्याकांड में अब बरी हो चुके पूर्व पुलिस अधिकारी रविकांत शर्मा की पत्नी मधु शर्मा ने तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री प्रमोद महाजन पर हत्या का आरोप लगाया था.

शर्मा ने मीडिया को ललकारते हुए कहा था, 'अब मैं उनका नाम ले रही हूं. क्या आपमें इनती ताकत है कि आप उनसे या उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से इस बारे में पूछें? वह (एनडीए) प्रमोद महाजन जैसे हत्यारे को बचा रहे हैं. आप महाजन से जाकर पूछिए कि उसने भटनागर की हत्या क्यों की?'

28 नवंबर, 2002 की बातचीत

हाल ही में सपा में शामिल हुए नेता अमर सिंह और तत्कालीन समता पार्टी के सांसद कुंवर अखिलेश सिंह की बातचीत रिकॉर्ड है. 

बातचीत में पता चलता है कि किस तरह से रिलांयस की तरफ से काम करते हुए अमर सिंह ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को मैनेज कर लिया था ताकि केतन पारेख मामले में कंपनी की भूमिका और ग्लोबल ट्रस्ट बैंक मामले में रिलायंस पेट्रोलियम को बचाया जा सके. 

बातचीत के मुताबिक रिलायंस की तरफ से जेपीसी के प्रमुख प्रकाश मणि त्रिपाठी को भुगतान किया गया. त्रिपाठी का बेटा रिलांयस के लिए काम कर रहा था. इसके अलावा एसएस अहलूवालिया (मौजूदा बीजेपी सांसद), प्रफुल्ल पटेल (मौजूदा एनसीपी सांसद), प्रेम चंद गुप्ता (पूर्व सांसद आरजेडी) और किरीट सोमैया (मौजूदा सांसद बीजेपी) को भी रिलायंस की तरफ से पैसे दिए गए. 

प्रकाश मणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के देवरिया से बीजेपी के सांसद रह चुके हैं. त्रिपाठी स्टॉक मार्केट घोटाले पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के चेयरमैन थे. इस घोटाले का मुख्य आरोपी केतन पारेख था.

एक और टेप में एनके सिंह (तत्कालीन ओएसडी, पीएमओ) और मुकेश अंबानी सरकार के बजट के बारे में बात कर रहे हैं. अंबानी बजट को प्रभावित करने वाली बाते कर रहे हैंं. जेडीयू  से राज्यसभा सांसद रह चुके एन के सिंह फिलहाल बीजेपी में हैं. 

वी के धल (डीसीए सेक्रेेटरी), अनिल अंबानी, सतीश सेठ और राजीव महर्षि के बीच हो रही बातचीत में 65 अवैध कंपनियों की तरफ से की गई अनियमितताओं का जिक्र हो रहा है. इन कंपनियों को कैसे गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया, इसका जिक्र है. ये कंपनियां रिलायंस से संबद्ध थीं.

First published: 17 June 2016, 17:33 IST
 
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