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आईआईएमसी में दलित और गैर दलित के बीच बंटे छात्र

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 February 2016, 15:26 IST

देश के सबसे नामी पत्रकारिता शिक्षण संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में इन दिनों दलितों से भेदभाव का मुद्दा गरमाया हुआ है.

यह मामला हैदराबाद युनिवर्सिटी के दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद शुरू हुआ.

आईआईएमसी के एक दलित-आदिवासी छात्र समूह ने आरोप लगाया है कि संस्थान के ही कुछ वर्तमान छात्र फेसबुक पर दलित छात्रों के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं. उनके खिलाफ एक तरह का अभियान चला रहे हैं.

18 जनवरी को हिंदी पत्रकारिता के एक छात्र ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी थी जिस पर संस्थान के दलित-आदिवासी छात्रों ने आपत्ति जताई है.

इस मामले में आरोपित छात्र का कहना है कि उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखी टिप्पणी में सुधार कर लिया है. इस मामले में अगर किसी व्यक्ति को ठेस पहुंची हैं तो वह खेद व्यक्त करते हैं. उन्होंने बताया कि दो फरवरी को संस्थान के ओएसडी के सामने उन्होंने लिखित में माफी मांग ली है.

लेकिन आईआईएमसी में दलित छात्रों का समूह निष्कासन की मांग कर रहा है. सामाजिक न्याय मंत्रालय, आईआईएमसी प्रशासन और एसटी-एसी आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन छात्रों ने मामले की जानकारी दी है. कैच के पास छात्रों के पत्र, विवादित फेसबुक पोस्ट और उनके समर्थन में फेसबुक पर चलाए जा रहे अभियान की तस्वीरें मौजूद हैं. 

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आरोपी छात्र के अनुसार संस्थान के ही कुछ छात्र जानबूझकर इस मामले को तूल दे रहे हैं. यह विवाद कैंपस के अंदर का था जिसे बाहर लेकर जाने की जरूरत नहीं थी.

आरोपी छात्र के फेसबुक पोस्ट पर आईआईएमसी के ईजे के छात्र प्रशांत कनोजिया ने कार्रवाई की मांग की है. दलित और आदिवासी छात्रों की तरफ से सामूहिक रूप से उन्होंने पहले माफी की मांग की थी लेकिन अब इनकी मांग है कि उक्त छात्र को निष्कासित किया जाय. उनके अनुसार संस्थान को तीन दिन पहले इस मामले की जानकारी दी गई थी. लेकिन संस्थान ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं है.

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उन्होंने बताया कि आईआईएमसी में दलित-अादिवासियों के लिए अलग से कोई सेल नहीं है. प्रशांत के अनुसार आरोपी छात्र के मामले में संस्थान के ओएसडी अनुराग मिश्रा ने कहा है कि पहले एससी-एसटी सेल का गठन किया जाएगा. उसके बाद इस मामले की जांच होगी. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई होगी.

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प्रशांत के अनुसार संस्थान के रवैये नाखुश होकर उन्होंने इस मामले को लेकर सामाजिक न्याय मंत्रालय, आदिवासी मामलों के मंत्रालय और एससी-एसटी आयोग के चेयरमैन को पत्र लिखा है. उनके अनुसार खेद केवल दिखावा है कि और फेसबुक पर उसके समर्थन में पोस्ट लिखे जा रहे हैं.

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प्रशांत के अलावा 16 अन्य छात्रों ने मंत्रालय और आईआईएमसी प्रशासन को लिखे पत्र में अपने हस्ताक्षर किए हैं. इस मामले में आईआईएमसी संस्थान के अधिकारियों ने कोई स्पष्ट जवाब देने की बजाय टालमटोल करते नजर आए. हिंदी पत्रकारिता के विभागाध्यक्ष हेमंत जोशी ने कहा कि इसका बेहतर जवाब ओएसडी ही दे सकते हैं. ओएसडी अनुराग मिश्रा से बात करने पर उन्होंने भी यह कहकर बात टाल दी कि इस मामले में बोलने के लिए उपयुक्त व्यक्ति नहीं है.

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संस्थान के आधिकारिक सूत्र ने बताया कि आरोपी छात्र ने दो फरवरी को लिखित में खेद व्यक्त कर दिया है. इसके बाद यह मामला रफा-दफा हो गया. लेकिन तीन फरवरी को प्रशांत ने कई मंत्रालयों को फिर से पत्र लिखा है.

जाहिर है देश के शीर्षस्थ पत्रकारिता संस्थान में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.

First published: 4 February 2016, 15:26 IST
 
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