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आईआईएमसी फिर विवाद में, टीचर पर यौन शोषण का आरोप

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST
QUICK PILL
  • लेक्चरर के व्हाट्सऐप मैसेजों से पता चलता है कि आरोपी लेक्चरर लड़की को दो हफ्तों से\r\n लगातार अश्लील मैसेज भेज रहा था. 
  • लेक्चरर ने माना है कि वह व्हाट्सऐप मैसेज उसी ने भेजे हैं लेकिन लेक्चरर ने आरोप लगाया कि \r\nलड़की ने बातचीत में अपने भेजे हुए मैसेज जानबूझ कर डिलीट कर दिए हैं.

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) एक बार फिर विवादों में घिरता नज़र आ रहा है. आईआईएमसी के ओडिशा स्थित डेंकानाल की एक छात्रा ने एक पार्ट-टाइम लेक्चरर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

फरवरी में आईआईएमसी, दिल्ली के एक क्लर्क सागर पर कैम्पस में काम करने वाली दलित ठेका मजदूर के कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था.

असम की रहने वाली छात्रा द्वारा सात अप्रैल को संस्थान के आंतरिक शिकायत कमेटी में दर्ज करायी शिकायत के अनुसार अस्थायी लेक्चरर उस दो हफ्ते से ब्लैकमेल कर रहा था ताकि लड़की उसकी बात मान ले. मामला सामने के बाद आरोपी लेक्चरर ने इस्तीफा दे दिया. उसने छह महीने पहले ही संस्थान में पढ़ाना शुरू किया था.

कैच के पास उपलब्ध व्हाट्सऐप मैसेजों से पता चलता है कि आरोपी लेक्चरर लड़की को दो हफ्तों से लगातार अश्लील मैसेज भेज रहा था. एक मैसेज में उसे साफ-साफ फ़ोन न करने की हिदायत दी थी. फिर वो लगातार लड़की द्वारा फोन नहीं उठाए जाने के बावजूद अक्सर देर रात उसे फोन करता रहा.

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पीड़ित छात्रा की एक सहपाठी ने नाम न देने की शर्त पर बताया, "छात्रा को 'अज्ञात कारणों' से संस्थान से निलंबित किया गया था. लेक्चरर उसे ब्लैकमेल कर रहा था कि अगर उसने उसकी यौन मांगे नहीं मानीं तो वो छात्रा के परिवार को इसके बारे में बता देगा.

लेक्चरर लड़की को ब्लैकमेल कर रहा था कि अगर उसने उसकी यौन मांगे नहीं मानीं तो वह उसके परिवार से बता देगा

लड़की द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद संस्थान के छात्रों ने लेक्चरर के इस्तीफे की मांग में प्रदर्शन किया. पीड़ित छात्रा के एक अन्य सहपाठी ने कहा, "हम इंतजार कर रहे थे कि संस्थान कुछ करेगा लेकिन ऐसा लगा कि वो इस मामले को लेकर बहुत लापरवाह हैं. उन्होंने ये तक सुझाव दिया कि मामले को दोनों पक्ष मिलकर सुलझा लें."

ये कहने पर कि लेक्चरर ने तो इस्तीफा दे दिया है. छात्रा की सहपाठी ने कहा, "हमें इसके बारे में कोई पुष्ट सूचना नहीं दी गयी है."

दूसरा पक्ष

कैच से बातचीत में लेक्चरर ने माना कि वो व्हाट्सऐप मैसेज उसी ने भेजे हैं लेकिन उसका कहना था कि ये मैसेज कहानी का एक ही रुख बताते हैं. लेक्चरर ने आरोप लगाया कि लड़की ने बातचीत में अपने भेजे हुए मैसेज जानबूझ कर डिलीट कर दिए हैं.

लेक्चरर ने कैच से कहा, "हमारी बातचीत आपसी सहमति से हुई थी. शिकायतकर्ता ने जानबूझ कर अपने भेजे हुए मैसेज डिलीट कर दिए हैं."

लेक्चरर का कहना है कि लड़की से बातचीत आपसी सहमति से हुई थी

लेक्चरर ने इस बात से भी इनकार किया कि उसने छात्रा को ब्लैकमेल किया है. उसका कहना है कि खुद लड़की ने उससे अनरोध किया था कि वो "निजी रूप से कोशिश करे" कि उसके माता-पिता को उसके निलंबन के बारे में न बताया जाए.

लेक्चरर ने दावा कि उसने निलंबन की अवधि घटवाने में भी छात्रा की मदद की थी.

लेक्चरर के अनुसार जब उसे छात्रा द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बारे में पता चला तो उसने तत्काल इस्तीफा दे दिया ताकि "मीडिया में नकारात्मक प्रचार" न हो और "छात्रा की पढ़ायी भी न प्रभावित हो."

छात्रा से कैच का संपर्क नहीं हो सका लेकिन उसके साथ पढ़ने वाली लड़िकयों ने जोर देकर कहा कि लेक्चरर ने उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की थी.

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आईआईएमसी, ढेंकानाल कैम्पस की प्रमुख मृणाल चटर्जी ने कैच से कहा, "आतंरिक कमेटी पहले ही मामले को देख रह है. उसने शिकायतकर्ता का पक्ष सुन लिया है. लेक्चरर ने इस्तीफा दे दिया है. वापस आने के बाद मैं देखूंगी की मामले में क्या हो सकता है." चटर्जी फिलहाल समय छुट्टी पर हैं.

शिकायत कमेटी की प्रमुख जयश्री जेठवानी ने कैच से कहा, "मैंने शिकायतकर्ता से बात की है. आरोपी लेक्चरर के इस्तीफे से वो संतुष्ट है. रिजनल सेंटर ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. इस मामले में दिल्ली से एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ढेंकानाल आने वाली है."

आईआईएमसी का ढेंकानाल कैम्पस 1993 में शुरू हुआ था. कैम्पस में स्थायी टीचर नहीं हैं. संस्थान अनुबंधित टीचिंग असिस्टेंट के सहारे चल रहा है.

First published: 9 April 2016, 11:31 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @catchnews

एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म से पढ़ाई. पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी कहानियां करते हैं.

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