Home » इंडिया » iims to admit more student but faculty crunch remains a big crisis, recruitment requires
 

आईआईएम में टीचरों की भर्ती नहीं हुई तो भेड़ बकरियों की फौज निकलेगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 September 2016, 7:26 IST
QUICK PILL
  • मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने भारत के प्रमुख प्रबंधन संस्थान से कहा है कि वे अपनी सीटें बढ़ा कर दोगुनी कर दें.
  • आईआईएम अहमदाबाद (आईआईएम-ए) के पूर्व निदेशक जगदीप चोकर कहते हैं कि सारे आईआईएम संस्थानों में केवल सीटें बढ़ाना ही उचित नहीं होगा और इससे गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है. 

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अपने संस्थान में प्रवेश लेने वाले विद्याार्थियों की संख्या दोगुनी करने पर विचार कर रहा है लेकिन इतनी ही संख्या में शिक्षकों के बढ़ाने की चुनौती भी बरकरार है. 20 सितम्बर को आईआईएम, शिलॉंग में सभी 119 आईआईएम संस्थानों के अध्यक्ष एवं निदेशकों की बैठक हुई. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने भारत के प्रमुख प्रबंधन संस्थान से कहा कि वे अपनी सीटें बढ़ा कर दोगुनी कर दें. इस पर निदेशकों और अध्यक्षों ने सहमति जता दी है और जल्द ही इस संबंध में सरकार के समक्ष अपने विस्तारीकरण की योजना प्रस्तुत करेंगे. हालांकि इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है. फिलहाल देश के सभी आईआईएम में तकरीबन 10,000 छात्र पढ़ रहे हैं.  

कैच ने आईआईएम के पुराने और मौजूदा कुछ उच्च स्तरीय अधिकारियों से इस बारे में बात की कि क्या सीटों की संख्या दुगनी करने का विचार सही है?, जबकि अध्यापकों की संख्या कम है जो कि 2015 में औसतन 22 प्रतिशत ही थी. आईआईएम अहमदाबाद (आईआईएम-ए) के पूर्व निदेशक जगदीप चोकर ने कहा, सारे आईआईएम संस्थानों में केवल सीटें बढ़ाना ही उचित नहीं होगा और इससे गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है. उन्होंने कहा, 'अच्छा है कि विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, साथ ही यह भी ध्यान में रखा जाना जरूरी है कि फैकल्टी और गुणवत्ता का भी खयाल रखा जाए, जिसकी वजह से आईआईएमएस की विशिष्ट पहचान है, वरना यह एक प्रकार से भेड़ बकरियों की तरह आईआईएम छात्रों की फौज खड़ी करना मात्र होगा. यहां बात आधारभूूत ढांचे के भौतिक विस्तार की नहीं है लेकिन एक ऐसे संस्थान का विस्तार करना जो समय के साथ धीरे-धीरे खड़ा हुआ हो, केवल भौतिकवादी बात नहीं है.' 

‘‘चूंकि यहां अघ्यापकों की कमी की समस्या काफी पहले से ही चल रही है. उस पर, साफ़तौर पर यहां बात सिर्फ संख्या बढ़ाने भर की नहीं है. आसानी से छात्रों की संख्या के बराबर फैकल्टी की नियुक्ति की जा सकती है लेकिन प्रबंधन जैसे प्रायोगिक क्षेत्र में शिक्षण की गुणवत्ता और छात्रों द्वारा उसे ग्रहण करना ही अहम है. छात्र-शिक्षक संबंध सबसे महत्वपूर्ण पहलू है.’ 

आईआईएम अहमदाबाद के मौजूदा डीन ने फैसले का स्वागत किया

हालांकि आईआईएम-ए के वर्तमान डीन एरल डिसूजा ने कहा, संस्थानों में छात्रों की संख्या बढ़ाने का निर्णय स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा, 'हम आईआईएम-ए ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक पहुंच बनाकर आगे विस्तार करना चाहते हैं. वास्तव में आईआईएम-ए में पिछले दस सालों में छात्रों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. उच्च गुण्वत्ता वाले प्रबंधन संस्थानों का बड़ा होना वक्त की जरूरत है.'

शिक्षकों के मुद्दे पर उन्होंने कहा, 'यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और योजना बनाने में समय लगता है लेकिन यह तुरंत नहीं होगा और हम यह ध्यान में रखते हुए फैकल्टी की संख्या बढ़ाएंगे और बाक़ी ज़रूरतें भी पूरी करेंगे. गुणवत्ता ही हमारी पहचान है और इसके साथ निश्चत तौर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा.'

वक्त के साथ शिक्षकों की भर्ती ज़रूर होनी चाहिए

इसी तरह आईआईएम उदयपुर (आईआईएम-यू) के निदेशक जनत शाह ने कहा, जहां तक नए आईआईएम संस्थानों का सवाल है, छात्रों की संख्या बढ़ाने का विचार मूल योजना का ही हिस्सा है. 2011 में शुरू हुए आईआईएमयू में फिलहाल 180 छात्र हैं और 2025 तक यह संख्या बढ़ कर 560 तक हो सकती है.

अध्यापकों की कमी पर उन्होंने कहा, ‘हां, शिक्षकों की कमी वाकई एक समस्या है, लेकिन यह कमी वक्त के साथ पूरी कर ली जानी चाहिए. मिसाल के तौर पर आईआईएम उदयपुर में अब तक अपेक्षाकृत अच्छे शिक्षक नियुक्त किए गए हैं. उन्होंने कहा, आईआईएम संस्थानों के डॉक्टोरल प्रोग्राम (एफडीएम) के विस्तारीकरण की ज़रूरत है. 20 सितम्बर की बैठक में इस पर भी चर्चा की गई थी. इसलिए निकट भविष्य में शिक्षकों के पद के लिए बहुत से आवेदन आए.

प्रबंधन संकाय में शिक्षकों की कमी का एक कारण यह भी है कि प्रबंधन के कुछ ही छात्र अघ्यापन को आजीविका बनाते हैं. शाह ने कहा, नए आईआईएम संस्थानों को सरकार ने पहले ही ‘एक वाजिब समयावधि तक आर्थिक सहायता देने की बात कही है. इसलिए रुपया तो कोई समस्या है ही नहीं. जहां तक छह पुराने आईआईएमएस का सवाल है, वे अपनी फीस, अनुसंधान शुल्क और परामर्श परियोजनाओं से ही ज़रूरी फंड जुटाते हैं.

First published: 24 September 2016, 7:26 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी