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जनता के इस कदम के आगे झुक गई थी जर्मन सरकार, रातों रात सस्ता करना पड़ा पेट्रोल-डीजल

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 May 2018, 13:34 IST

भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में आए दिन उछाल देखने को मिल रहा है. यही कारण है कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल के दाम 85 रुपये 65 पैसे हो गए हैं, जबकि डीज़ल 73 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर खरीदने को लोग मजबूर हैं. पेट्रोल-डीजल खरीदने में लोगों का खुद तेल रहा है.

मुंबई ही नहीं देश के हर कोने में तेल के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं. जैसे मौजूदा समय में भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में आए दिन बढ़ोतरी देखी जा रही है कुछ इसी तरह साल 2000 में एक देश में भी हुआ था. दरअसल, उस साल जर्मनी में तेल के दाम उच्च स्तर पर पहुंच चुके थे, जिसके बाद वहां की जनता ने कुछ ऐसा किया कि सरकार झुक गई और तेल के दाम कम करने पड़े.

दरअसल, जब जर्मनी में दिन-ब-दिन पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे थे तो जर्मनी की जनता इस बात से काफी परेशान हो चुकी थी. इसके बाद लोगों ने ऐसा तरीका निकाला जिससे सरकार को झुकना पड़ गया. इसके बाद सरकार ने रातों-रात तेल की कीमतों में कमी कर दी.

टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, जर्मनी की जनता ने अपनी गाड़ियों को सड़कों पर छोड़ दिया और कई दिन ये प्रदर्शन किया. इस दौरान जर्मनी की राजधानी बर्लिन में गाड़ियों का हुजूम देखने को मिला. बर्लिन की सड़कों पर 4 हजार गाड़ियां खड़ी हुई थीं. इस प्रदर्शन में गांव के लोग भी शामिल रहे.

 

देश की राजधानी की सड़कों पर जब सरकार ने भारी मात्रा में गाड़ियां देखीं तो सरकार मजबूर हो गई. देखते ही देखते गाड़ियों से सभी सड़के भर चुकी थीं, लोग गाड़ियां छोड़ कर चले गए और राजधानी बर्लिन में लंबा जाम लग गया. इसके बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया.

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क्या शहर और क्या हाइवे पर सिर्फ गाड़ियां ही गाड़ियां नजर आ रही थीं. तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चल रहे इस विरोध के कारण शहर के यातायात पर तो असर पड़ा ही साथ ही काम भी ठप्प हो गया था. कई कंपनियों में उस दौरान काम बंद कर दिया था. इस प्रदर्शन से सरकार के पसीने छूट गए और तेल की कीमतों को रातोंरात कम कर दिया गया.

First published: 26 May 2018, 13:34 IST
 
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